सुदर्शन

(हास्य व्यंग्य पर आधारित ब्लॉग) अब सुदर्शन www.kmmishra.tk पर भी उपलब्ध है .

क्रांतिकारी ! बहुत ही क्रांतिकारी !

Posted by K M Mishra on मार्च 23, 2014

लेखक : नरेश मिश्र

 

भोलाभंडारी मीडिया ने भस्मासुर केजरीवाल को वरदान दिया । वरदान पाकर भस्मासुर ने सोचा कि पहले मीडिया पर ही इस नेमत को ट्राई करें । भस्मासुर के डर से मीडिया भाग रहा है । भस्मासुर पीछे पड़ा है । मीडिया अपने बचाव का रास्ता खोज रहा है । इस दिलचस्प नजारे का एक मजेदार पहलू और है । जिस खबरनवीस चैनल पर केजरीवाल इंटरव्यू देते हैं, सवाल पूछने पर वे उसे ईमानदारी का सर्टिफिकेट देने से नहीं चूकते । कहते हैं, आपतो ईमानदार हो बाकी सारे चैनल  चोर हैं । जवाब सुन कर इंटरव्यू लेने वाला बोलता है “क्रांतिकारी ! बहुत ही क्रांतिकारी !”  चैनल खुश,केजरीवाल डबल खुश ।

 

पिछली पांच विधानसभाओं के चुनाव का जायजा लें तो मीडिया ने ओपीनियन पोल से एक्जिट पोल तक जो आंकड़े दिये थे कमोवेश वे सही निकले । मीडिया इतना पावरफुल तो हो ही नहीं सकता  कि वो बस्त्र के जंगलों,मध्यप्रदेश के पहाड़ी गांवों और राजस्थान के रेगिस्तान तक अपनी धाक जमा  ले,जहॉं बिजली और यातायात के साधन भी सुलभ नहीं हैं । जाने माने सैफोलाजिस्ट जनाब योगेन्द्र यादव ने अपने सर्वे में आप की जीत का जो दावा किया था वह किसी को याद नहीं । याद दिलाना जरूरी है कि उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव में 45 से 48 सीट जीतने का दावा किया था । एक्सपर्ट का यह आंकड़ा क्यों गलत साबित हुआ । अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में ओपिनियन पोल कराने वाली 11 एजेंसियों का स्टिंग आपरेशन हुआ था । वे सभी नामी गिरामी एजेंसियॉं पैसे लेकर जनता से लिये गये आंकड़ों में फेर बदल करके मन मुताबिक सर्वे दिखा देती थीं । योगेन्द्र यादव ने भी दिल्ली विधानसभा चुनाव के बारे में  गलत,भ्रामक और बढ़ा चढ़ा कर आंकड़े दिये थे,आज तक किसी ने उनसे इस बारे में कोयी सवाल नहीं किया । किसी ने पैसे लेकर ये काम किया और किसी ने टिकट लेकर ।

(नीचे दिए लिंक पर जाएँ…योगेन्द्र यादव का किया सर्वे विडियो सहित देखने को मिलेगा).

http://ibnlive.in.com/news/aap-claims-victory-in-delhi-polls-says-clear-win-in-17-seats/429051-80-258.html

 

 

दिल्ली में सतजुग  लाने का सपना दिखाने  के बावजूद सिर्फ अट्ठाइस सीटें हासिल हुयीं । सरकार बनाने का पाखंड रचकर इस्तीफा देने का नाटक करना पड़ा । गुदड़ी तो शानदार,चमकदार थी लेकिन उसके अंदर चीलर बहुत थे । काटने लगे तो गुदड़ी फैंक कर भागना पड़ा । भागते वक्त कहना पड़ा हम कुर्सी के लिये थोड़े ही आये थे व्यवस्था परिवर्तन के लिये आये थे । देश का बंटाधार करने के काम में लगातार लगे रहेंगे । जबतक लोकतंत्र का सर्वनाश नहीं हो जायेगा,लालपट्टी के माओवादी दिल्ली की गद्दी पर कब्जा नहीं कर लेंगे तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा । झूठ,छल,प्रपंच,आरोप,मनगढंत कहानियों के हथियार हमारे शस्त्रागार में बहुत हैं । देश की जनता वैसे भी व्यवस्था से बहुत नाराज है,उसकी नाराजगी को हम बिंदास भुनायेंगे । कोई हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता है ।

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केजरीवाल का ठुल्लू ।

Posted by K M Mishra on मार्च 20, 2014

लेखक: नरेश मिश्र

जंगल में एक मस्त साण्ड चर रहा था । शिकार की तलाश में निकले सियार-सियारिन  के जोड़े ने साण्ड को गौर से देखा । खा पीकर मस्त मुटाये साण्ड के बड़े अण्डकोष जमीन को छूने की कोशिश कर रहे थे । सियारिन ने सियार से “कहा यह पका गूलर बेहद जायकेदार होगा । अब यह किसी भी वक्त गिर सकता है । तुम इस साण्ड का पीछा करो । लटकता गूलर जमीन पर गिरे तो मुझे बुला लेना ।

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सियार ने छूटते ही कहा “इस गूलर के फेर में मत पड़ो हमें तालाब के किनारे चलना चाहिये । वहॉं बहत से शिकार मिल जायेंगे ।“

 

सियारिन तिरिया हठ पर अड़ गयी और बोली “मेरा मन आज मीठा खाने को करता है । मेरे पेट में तुम्हारा बच्चा पल रहा है । गूलर खाने से पेट में पल रहे बच्चे को भी पौष्टिक  रस मिलेगा । तुम इस जानवर का पीछा करो ।

 

तिरियाहठ से हार मानकर सियार साण्ड का पीछा करने लगा । साण्ड अपनी मस्त चाल से जंगल में कई दिनों घूम कर चलता रहा । भूखा सियार गूलर टपकने की आस में उसके पीछे लगा रहा । वह सोच रहा था कि गूलर अब गिरा,तब गिरा ।  कई हफ्ते बीत गये तो भूखा सियार धरती पर धड़ाम हो गया । गूलर को गिरना नहीं था,वह नहीं गिरा ।

 

पंचतंत्र की यह चटपटी मसालेदार कहानी दिल्ली समेत देशवासियों को गौर से पढ़नी और समझनी चाहिये । जनाब अरविंद केजरीवाल की तुलना हम उस मुफलिस मजनूं से कर सकते हैं जो अपनी प्रेमिका से मिल कर उसे हसीन ख्वाब दिखाता था । मजनूं के बाल चिकटे गंदे थे । उसकी दाढ़ी बढ़ी थी । कपड़े बास मार रहे थे फिर भी वह अपनी लैला को होनूलूलु में हनीमून के सपने दिखा रहा था । पंचतारा होटेल की डिजाइन बता रहा था। डिनर के तमाम “कोर्स”समझा रहा था । आजिज लैला ने चिढ़ कर एक दिन अपनी जेब से सौ की नोट निकाली और मजनूं की और  बढ़ा दिया “पहले तुम साबुन खरीद कर अपने कपड़े साफ करो । शेव करा लो फिर होनूलूलु के फाईव स्टार होटेल में हनीमून मनाने की कसमें खाना ।“

 

दुनिया का आंठवा अचरज हमारे सामने है । जनबा केजरीवाल ने दिल्ली के वोटरों को आसमान के तारे का सपना दिखाया था । वे उन्चास दिन बाद उस सपने को गैस गुब्बारे की तरह हवा में उड़ा कर लोकसभा की राह चल पड़े । लेकिन मुल्क की भोली जनता  आज भी इस खाम ख्याली में जी रही है कि केजरीवाल बेहद ईमानदार,सत्य हरिश्चंद्र के उत्तराधिकारी हैं । वे एक बार लोकसभा में प्राईमनिस्टर की कुर्सी पर विराजमान होंगे तो देश में सतयुग का अवतरण होगा ।

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सेकुलरिज़्म का गड्ढा

Posted by K M Mishra on मार्च 17, 2014

लेखक – नरेश मिश्र

Cute_lion जंगल का राजा शेर शिकार को पेट के हवाले करने के बाद अपनी मांद की ओर जा रहा था । रास्ते में एक नौजवान जिद्दी, गुस्सैल बनैला सुअर मिल गया ।   

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सुअर ने शेर को ललकारा “तुम जंगल के राजा कहलाते हो अगर ताकत है तो मुझसे लड़ कर राजा होने का दावा साबित करो ।

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शेर का पेट भरा था । उसे नींद सता रही थी । उसने कहा भाई ! अपने रास्ते जाओ । मुझे तुमसे नहीं लड़ना है ।

 बनैला गुर्राया तुम डर गये । अपने से ज्यादा ताकतवर जानवर से पाला पड़ता है तो तुम्हारी सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है ।”

 

शेर ने अपना पिण्ड छुड़ाते हुये कहा यही समझ लो । अब मुझे अपने रास्ते जाने दो ।

 

बनैला छूटते ही बोला मैं तुम्हें आसानी से छोड़ने वाला नहीं । या तो तुम हार मानलो या फिर मेरा मुकाबला करो ।

 

शेर ने जवाब दिया मुझसे लड़ना ही चाहते हो तो किसी और दिन आना मैं तुम्हारी यह इच्छा भी पूरी कर दूंगा ।jungle_book_tiger

बनैला ललकारते हुये बोला ठीक है । आज तो तुम्हें छोड़ देता हूँ । अगले हफ्ते इसी दिन,  इसी जगह मिलना । फैसला हो जायेगा कि जंगल का राजा कौन है ।

 

एक हफ्ते बाद भूखा, गुस्साया शेर उसी जगह चट्टान पर खड़ा बनैले की राह देख रहा था । बनैला ठीक वक्त पर झाड़ी से निकल कर सामने आया । उसे देखते ही शेर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया ।  उसने दहाड़ मारी तो बनैला डर से थर थर कांपने लगा । उसके होश उड़ गये । शेर उसकी ओर लपका तो बनैला जान बचाने के लिये जंगल की ओर झाड़़ी फलांगता भाग खड़ा हुआ । शेर उसका पीछा छोड़ने वाला नहीं था । King_runs बनैला पहाड़ की चोटी पर चढ़ गया । नीचे एक बहुत बड़ा गड्ढा था। वनवासी साधु संत उसमें मल-मूत्र त्याग करते थे । बनैला उस गड्ढे में कूद पड़ा और चुनौती के स्वर में चीखने लगा हिम्मत है तो आ जाओ, मैं तुमसे निपट लूंगा ।”  Mad_pig

 

शेर की ऑंखे फटी की फटी रह गयीं । उसने कहा जिस नीचता के दलदल में तुम खड़े हो वहॉं मैं नहीं आ सकता । तुम जीत गये मैं चला ।”

 

जातक की यह कहानी चुनावी जंग में मुल्क को राह दिखाती है, सबक देती है । झूठ, घमण्ड, आरोप-प्रत्यारोप, घटिया जबान, तरह- तरह के नाटक नौटंकी और सेकुलर पाखण्ड का यह बदबूदार गड्ढा राजनीति के रणक्षेत्र में कूदने वाले खास नेता और उसके सहयोगियों क पनाहगाह है । विकासपरक राजनीति, सुशासन और सबको खुशहाली देने की चिंता करने वाला कोयी शेरदिल नेता इस बदबूदार, बदनुमा गड्ढा में उतर कर खास तरह के सियासी प्राणियों को चुनौती नहीं दे सकता । माना की झूठ का घटाटोप अंधेरा वोटरों को सही राह नहीं देखने देता लेकिन हर अंधेरी रात की सुबह जरूर होती है । सूरज निकलता है तो सारे सियासी चमगादड़ अंधेरे की तलाश करते हुये किसी कंदरा में उलटे लटक जाते हैं ।

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 चित्र : साभार फेसबुक

  

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दारू सुलभ, आलू सस्ती । खींचो पापड़ संग विस्की । (हास्य/व्यंग्य: होली)

Posted by K M Mishra on मार्च 17, 2014

Originally posted on सुदर्शन:

 

-बुरा न मानो होली है, हिक्क !

           

                      पड़ोसी के आंगन में खड़ा दशहरी खड़े-खड़े बौरा रहा है । बसंत आ रहा है । इस मौसम में प्रकृति से लेकर जीव-जन्तु तक सभी बौरा जाते हैं । नई-नई पत्तियाँ, रंग-बिरंगे फूल, बौराने के लिये प्रेरित करते हैं । नायिका को जो विरह वेदन वर्षा ऋतु में सताने लगती है उसकी नींव मार्च-अप्रेल में ही पड़ती है । बसंत में बौराया हुआ नायक नायिका से मिलता है । शायद होली पर । होली के दिन हिंदुस्तान में सभी बौरा जाते हैं । रंग बिरंगे हो कर, पी कर, मस्तीयाये बौराये गलियों में घूम रहे हैं । हालांकि अधिक न बौरा जायें इस लिये प्रशासन पुलीस की भी व्यवस्था करती है । पर क्या कीजियेगा, मौसम ही बौराने का है । दारू सुलभ, आलू सस्ती । खींचों पापड़ संग विस्की । अपन तो…

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लज्जा का अंगोछा (मफलर)

Posted by K M Mishra on मार्च 15, 2014

लेखक: नरेश मिश्र

सेठजी ने अपने पिता के श्राद्ध में भोजन करने के लिये चौबेजी को बुलाया । चौबेजी भीम भयंकर भोजनभट्ट थे । सेठानी ने अपने हिसाब से दस लोगों का भोजन बनाया था । सेठजी खुद दो फुल्के और लौकी की सब्जी पर जिंदगी की गाड़ी खींच रहे थे । चौबेजी ने सेठानी का बनाया सारा भोजन उदर के हवाले किया तो सेठानी ने कड़ाही पर कलछुल बजा कर संकेत दिया  कि अब रसोई में कुछ भी नहीं बचा है । सेठजी को गुस्सा आया । वे बोले – चौबे जी,लज्जा तो नहीं आयी । चौबे जी ने अपने दाहिने कंधे का अंगोछा सेठ की ओर बढ़ा कर कहा,लज्जा नहीं आयी । उसने अंगोछा भेजा है । उसका परोसा इसी अंगोछे में बांध दीजिये ।“

 

दरअस्ल,चौबेजी  की बेटी का नाम लज्जा था । वे अपनी बेटी के लिये पत्तल परोसवा कर घर ले जाना चाहते थे । लज्जा का यह अंगोछा अरविंद केजरीवाल के हाथ कैसे लगा यह शोध का विषय है । बहरहाल इस चमत्कारी अंगोछे में गजब के गुण हैं । यह अंगोछा अपने साथ रखने वाला लज्जा को बाय-बाय कह देता है । उसे दुनिया के सारे लोग चोर नजर आते हैं । इस अंगोछे में केजरीवाल ने संविधान,कानून,शालीनता,सियासत,टोलबूथ,मेटल डिटेक्टर,टेंपो  के साथ सारे मुल्क को बांध लिया है । इस अंगोछे में झूठ का इतना बड़ा पुलिंदा आसानी से समा सकता है कि संसार के सारे झूठे इसकी खासियत पर दांतों तले उंगली दबायें ।

 

स्वर्गलोक में यमराज विस्मित थे । उन्होंने ब्रह्मा जी से पूछा,  देव ! कितने झूठे मरते हैं तो एक केजरीवाल पैदा होता है । आप सृष्टि रचते हैं । आपको इसका हिसाब देना पड़ेगा ।“  ब्रह्मा जी छूटते ही बोले “यमराज!आपने ही शिकायत की थी कि कुंभीपाक नर्क मे झूठों का जनसंख्या विस्फोट हो रहा है,इससे नर्क का पर्यावरण भी दूषित हो रहा है । मैंने पर्यावरण स्वच्छ करने के लिये धरती पर एक केजरीवाल भेज दिया तो आप मुझसे स्पष्टीकरण क्यों मांग रहे हैं ।

 

स्वर्गलोक में यह बहस चल रही है । इसबीच नये सियासी बछेड़े केजरीवाल ने ढाई दिन गुजरात का दौरा कर इस राज्य के सारे विकास को झूठा करार दिया । जिस विकास का समर्थन सरकारी दस्तावेज भी करते हैं, उसे पट्ठे ने बकवास करार दिया । फटी शर्ट और मंहगा मोबाईल वाला यह सियासी पट्ठा बीस हजार की रकम लेकर पूँजीपतियों को डिनर पर बुलाता है । यह अमरीकी नुस्खा केजरीवाल के शातिर दिमाग की उपज है । फोर्ड फाउंडेशन का पैसा लेने में कोयी हर्ज नहीं । अमरीका तो पूरी ताकत से मोदी को चुनाव में शिकस्त देना चाहता है । मोदी आ गये तो अमरीका का भारतीय बाजार ठप्प हो जायेगा । उसने केजरीवाल के जरिये एक कारगर चमचा तलाश कर लिया है ।

 

ताजी खबर यह कि केजरीवाल मीडिया पर लालताल हैं । कहते हैं “वे प्रधानमंत्री बने तो मोदी का गुणगान करने वाले सारे मीडियाकर्मियों को जेल भेज देंगे ।“ आप पार्टी के एजेंडे में बड़ी जेलों का निमार्ण है । कांग्रेस को इससे सबक लेकर मुल्क में बड़े पागलखाने बनवाने चाहिये । देश का विकास अब जेल और पागलखाना बनाने से ही हो सकता है ।

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स्वर्ग में सत्याग्रह

Posted by K M Mishra on मार्च 13, 2014

लेखक: नरेश मिश्र

 मोदी की लहर है ये केजरीवाल भी मानते हैं -

  यमलोक में मनुष्यों के पाप-पुण्य का लेखा जोखा रखने वाले भगवान चित्रगुप्त आंखे तरेर कर यमदूतों को घूर रहे थे । यमदूत उनके सामने अपराधी की तरह हाथ बांधे खड़े थे । चित्रगुप्त ने गुस्सा कर कहा – तुम लोग अपना काम ठीक प्रकार से नहीं करते । जब गुजरात में चार आर. टी. आई. कार्यकर्ता हिंसा के शिकार हुये हैं तो तुम उनकी आत्मा लेकर क्यों नहीं आये । यमदूत ने हाथ जोड़ कर कहा – भगवान आप को गलत सूचना मिली है,एक ही आर. टी. आई. कार्यकर्ता हिंसा का शिकार हुआ है । उसे हम आपके सामने प्रस्तुत कर चुके हैं । चित्रगुप्त चीख उठे – तुम असत्य भाषण कर रहे हो । अरविंद केजरीवाल ने भरी सभा में जिन मृतक कार्यकर्ताओं को श्रद्धांजलि दी है उनकी आत्मा कहॉं है । यह मत समझों की मैं भारतवर्ष का टेलिवीजन नहीं देखता । यमदूत बोला – देव ! किसी को समय से पहले मारने का अधिकार हमें नहीं है । आपने अरविंद केजरीवाल को यह विशेषाधिकार दिया हो तो आप जानिये । केजरीवाल की माया अपरमपार है । वे सोते- जागते,उठते-बैठते,झूठ बोलते हैं । “झूठमेव जयते” उनका नारा है । हम उनके खिलाफ कोयी कदम नहीं उठा सकते ।

 

चित्रगुप्त कुछ और कहते इससे पहले ही नारद मुनि वीणा बजाते नारायण,नारायण कहते प्रकट हुये । उन्होंने चित्रगुप्त के सामने अपराधी की तरह सिर झुकाये यमदूतों को खड़ा देखा तो वे बोले चित्रगुप्त जी भूल देवता करें और दंड यमदूतों को मिले यह तो बड़ा अन्याय है । चित्रगुप्त आसन से उठ कर बोले देवर्षि आप क्या कह रहे हैं ?नारद जी ने कहा – मैं ठीक ही कह रहा हूँ ।  स्वर्गलोक से एक चमत्कारी टोपी धरती पर गिरी । उसे अरविंद केजरीवाल नामके बहुरूपिये ने उठा लिया । टोपी पहनते ही वह एक क्षण में नेता बन गया । उसने भारत वर्ष में हाहाकार मचा रखा है । चित्रगुप्त की ऑंखे फटी की फटी रह गयीं,उन्होंने कहा – स्वर्गलोक से ऐसी कोयी टोपी नहीं भेजी गयी । नारद छूटते ही बोले – आपने गांधी टोपी का नाम सुना होगा । गांधी जी खुद तो टोपी नहीं पहनते थे लेकिन भारतवासियों को पहना गये । उसी टोपी का चमत्कारी प्रयोग केजरीवाल कर रहा है । टोपी लगाते ही वह और उसके अनुयायी सत्य, अहिंसा,सत्याग्रह,समता,सद्भावना के प्रतीक बन जाते हैं । टोपी उतारने के बाद वे गुंडे,मवाली बन कर हर तरह का दुराचार करते हैं । उन्होने लोकतंत्र का कबाड़ा करने की कसम खायी है । उनकी चण्डाल चौकड़ी में एक से बढ़ कर एक चालू और टालू हस्तियॉं हैं । वे दूसरों पर आरोप लगाने में माहिर हैं । उनके कुकर्मों से भारत में हाहाकार मचा है ।

 

नारद अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाये थे कि दो यमदूत एक टोपीधारी को सशरीर ले आये,बोले – महाराज ये मृतक लोकल ट्रेन के दरवाजे पर लटक कर नारे लगा रहा था । झटका लगा तो कट कर मर गया । आप इसका न्याय करें । चित्रगुप्त बिफर पड़े – तुम इसे सशरीर क्यों लाये हो । इसकी आत्मा को लाना चाहिये था । टोपीधारी की चीख पड़ा – आप कौन हैं,आपने मेरी टोपी पर उंगली उठाई तो मैं यहीं धरने पर बैठ जाउंगा । सच-झूठ का हिसाब किताब हमारी पार्टी के लोग करते हैं । मैं टोपी पहनता हूँ तो हरिश्चंद्र बन जाता हूँ । टोपी उतार कर कुकर्म करता हूँ । अभी तो हमारी पार्टी ने भारत में हाहाकार मचाया है । आप नहीं माने तो हम स्वर्गलोग में सत्याग्रह करेंगे । हम कानून,संविधान,विधान मानने वाले नहीं हैं । हम स्वर्गलोक का कानून बदलने की ताकत रखते हैं । महर्षि नारद और चित्रगुप्त उस टोपीधारी को मौन भाव से निहारते रहे । उनकी समझ में नहीं आ रहा था कि मृत्युलोक के इस प्राणी को स्वर्ग-नर्क में जगह दें कि धरती पर वापस लौटा दें ।

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चित्र फेसबुक से साभार.

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