वही हो रहा है मित्रों जिसका मुझे डर था । शांति का नोबेल भारत को भारी पड़ने जा रहा है । मियां ओबामा न्यूक्लियर डील के बाद भी अपनी आंखों के मोतियाबिंद से छुटकारा नहीं पा सके हैं । डील के एक साल बाद अचानक उन्होंने भारत से परमाणु अप्रसार पर आश्वासन पत्र की मांग कर डाली। भारत का परमाणु अप्रसार में अब तक का बेदाग रिकार्ड उनकी आंखों के मोतियाबिंद ने छिपा दिया । मियाँ ओबामा, अमेरिकी सरकार आज भी आई.एस.आई जो कि पूरी दुनिया में फैले आतंकवादियों की घोषित मालकिन है को गुप्त रूप से धन मुहैया कराती है, उससे आज तक कोई आश्वासन पत्र नहीं प्राप्त कर सकी और हम जो कि विश्व शांति के सबसे ऊंचे एफिल टावर है सो तुम्हें दिखाई नहीं पड़ रहा है । गांधी के भारत के साथ ऐसा सलूक । धन्य हो तुम और तुम्हारी चिरकुटई । चित्थड़ कहीं के, तुम्हें शांति के नोबेल का मोतियाबिंद हुआ है, जिसका कोई इलाज नहीं । ओबामा मियां, तुम शांति के नोबेल की झाड़ पर ज्यादा दिन नहीं टिक पाओगे और जल्द ही मुंह के बल अफ्गानिस्तान, पाकिस्तान में ढेर पड़े मिलोगे ।
शांति के नोबेल का साईड इफैक्ट अब नजर आने लगा है । ओबामा आजकल चीन की यात्रा पर हैं । चीन के नाम से आजकल बड़े बड़ों की पेंट गीली हो जा रही है । ओबामा ठहरे वैसे ही शांति के पुजारी । एक बयान में तिब्बत की दिक्कत को सुलटा दिया । ”तिब्बत चीन का हिस्सा है और दलाई लामा को चीन के साथ बैठ कर सब मसले सुलटा लेने चाहिये ।” प्राचीन काल के संतों वाली मोहक अदाएं । एक डायलॉग बोला और हो गया दुष्ट का हृदय परिवर्तन । बीजिंग से आया ओबामा का यह बयान दुष्ट दलाईलामा का हृदय परिवर्तन कर देगा । आक्रमणकारी चीन ने तिब्बत हड़प लिया तो क्या हुआ । समरथ को नाहीं दोष गुसाईं । विश्व शांति के लिये बड़ी-बड़ी कीमतें चुकानी पड़ती हैं । अबकी कीमत चुकाने की बारी दलाईलामा की है । दबंगों ने एक गरीब, दुखियारी माँ का अपहरण कर लिया तो शांति के पुजारी उसके रोते बच्चे को विश्व शांति की नसीहत देकर चुप करा रहे हैं । ओबामा तुम टुन्न हो गये हो शांति के नोबेल की शराब से । जब तक किसी नाली में नहीं गिरोगे तब तक इसका हैंगओवर बना रहेगा ।
ओबामा के राष्ट्रपति बनने से पहले बड़े हल्ले थे । बड़ी उम्मीदें थीं कि जो गंदगी जार्ज बुश पूरी दुनिया में फैला कर गये हैं शायद ओबामा उसे साफ कर सकें । शुरू शुरू में ऐसा लग भी रहा था । लेकिन शांति का नोबेल लग रहा है सारा खेल ही चौपट कर डालेगा । नवजात ओबामा के सकुमार कंधों पर इत्ता भारी बोझ । कदम डगमागने लगे हैं । तिब्बत चीन का हिस्सा है, भारत से परमाणु अप्रसार के लिये आश्वासन पत्र की मांग, अफ्गानिस्तान में नर्म तालिबानियों की तरफ झुकाव ये सब शांति के नोबेल की करतूत है ।
जल्द ही मनमोहन सिंह ओबामा के सरकारी मेहमान बनने जा रहे हैं । मनमोहन के एजेंडे में इस्तेमाल हो चुके यूरेनियम के पुनर्संस्करण की तकनीकी हासिल करना है और ओबामा के एजेंडे में भारत को ठेंगा दिखाना है । मुझको लगता है कि आश्वासन पत्र की मांग भारत पर प्रेशर बनाने के लिये की जा रही बार्गेनिंग भर है । बना लो प्रेशर । यहां तो एन.एस.जी. से छूट मिलते ही भारत सरकार ने न्यूक्लियर डील की हांडी आधे दर्जन देशों के साथ चढ़ा ली है । तुम नहीं सनम, कोई और सही । रानी रूठेगी तो अपना ही सुहाग लेगी । डील नहीं होगी तो तुम्हारी ही कम्पनियां बैठ कर टापेंगी । और अच्छा ही है कि यह डील न हो क्योंकि हमारे वैज्ञानिक हैवी वॉटर रियेक्टर और लाइट वॉटर रियेक्टर दोनों ही प्रकार के न्यूक्लियर रियेक्ट बनाने में सक्षम हैं । पूर्ण स्वेदेशी न्यूक्लियर सबमरीन आई. एन. एस. अरिहंत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है । रही सही कसर हम रूस और फ्रांस से तकनीकी सहयोग लेकर पूरी कर लेंगे । रही यूरेनियम की उपलब्धता की बात तो लाखों टन यूरेनियम मेघालय और राजस्थान मे पड़ा हुआ है । भारत में किसी चीज की कमी नहीं है प्यारे ओबामा । बस नेताओं को कमीशन खाने का रोग लगा हुआ है । यही हमारी सबसे बड़ी दिक्कत है ।

<=ओबामा के राष्ट्रपति बनने से पहले बड़े हल्ले थे । लेकिन अब इनके लच्छन देख कर अवधी की एक कहावत याद आती है ''रात भर सोहर गायेन । सवेरे देखे तो बेटवा के औजारय नाहीं ।''
देश प्रेम के दो शब्दों के सामंजस्य में वशीकरण मंत्र है, जादू का सम्मिश्रण हैं । यह वह कसौटी है जिस पर देश भक्तों की परख होती है । - मैथिलीशरण गुप्त























श्री कृष्ण गोविन्दाय नमः स्वाहा .
वक्रतुंड महाकाय कोटि सूर्यसमप्रभ ।
निर्विध्नं कुरू मे देव सर्वकार्येशु सर्वदा ।।
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।
ऊं नमः कमलवासिन्यै स्वाहा .





=>प्रणाम अग्निदेव । 


=>जज साहब, कृपया मुकद्दमे की बारीकियों पर नज़र डालें. मोहतरमा की टांगों से ज्यादा संगीन मुलजिम के अपराध हैं.



<=सर जी जो 14 लाख डालर आपको मिल रहे हैं इनाम के वो हमें दे दीजिये । उनसे हम कुछ हथियार खरीद लेंगे तालिबान और भारत से लड़ने के लिये । इन हथियारों से हमारे मन को शांति मिलेगी और भारत की नींद हराम होगी । 

<=शरीफ औरतों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है । नासपीटा रात दिन पृथ्वी के चक्कर लगाता फिरता है । चांद सी शक्ल पर बड़ा गुमान है न तेरे को । इतनी मार मांरूगा कि शेरो-शायरी से चांद सा चेहरा डिलीट हो जायेगा । 



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=>भौं, भौं, भौं, भौं, भौं,
<=अबे साले ! तेरे कू इतना भी नहीं पता कि अतिथि देवो भव होते हैं । फिर सरकारी अतिथि पर भौंक कर तू अपनी हड्डी से भी पंजे धो बैठेगा । सरकारी नौकरी में सिर्फ उसी पर भौंका जाता है जिससे सरकार को खतरा हो ।
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