सुदर्शन

धन प्राप्ति के सिद्ध टोटके और तंत्र-मन्त्र

कुछ काम ऐसे होते हैं जो बहुत कोशिश करने के बाद भी नहीं होते। इसका कारण खराब ग्रह योग या अन्य कुछ भी हो सकता है।
उपाय

– किसी के प्रत्येक शुभ कार्य में बाधा आती हो या विलम्ब होता हो तो रविवार को भैरवजी के मंदिर में सिंदूर का चोला चढ़ा कर बटुक भैरव स्त्रोत का एक पाठ कर के गाय, कौआ और काले कुत्तों को उनकी रुचि का पदार्थ खिलाना चाहिए। ऐसा करने से कार्य में आ रही बाधाएं नष्ट हो जाती हैं।

– गणेश जी का ऐसा चित्र घर या दुकान पर लगाएं, जिसमें उनकी सूंड दायीं ओर मुड़ी हुई हो। इनकी आराधना करें। इनके आगे लौंग तथा सुपारी रखें। जब भी कहीं काम पर जाना हो, तो एक लौंग तथा सुपारी को साथ ले कर जाएं, तो काम सिद्ध होगा। लौंग को चूसें तथा सुपारी को वापस ला कर गणेश जी के आगे रख दें तथा जाते हुए कहें गणेश काटो कलेश। इन उपायों को करने से रुके हुए काम पूरे हो जाएंगे।

१) किसी महत्वपूर्ण कार्य के लिए घर से बहार जाते वक्त या व्यापार हेतु शहर से बहार जाना पड़े उस वक्त घर से बहार जाते समय अपने हाथ में मुंग के कुछ दाने लें, यह दाने साबुत होने चाहिए टुटा हुआ दाना न लें. दरवाज़े के पास रुक कर उन दानो को हाथ में ले कर साधक निम्न मन्त्र को बोले और फूंक मारे.
ॐ श्रीं ह्रीं सर्वविघ्न विनाशाय सर्व कार्य सिद्धिं नमः

इस प्रकार ७ बार मन्त्र बोले और फूंक मारे. इसके बाद साधक बहार निकले तथा उन मुंग के दानो को घर के बहार फेंक दें. और यात्रा का प्रारम्भ करे. इस प्रकार करने से, साधक के रस्ते में आने वाले सभी विघ्न समाप्त होते है तथा कार्य में होने वाली बाधा का निराकरण प्राप्त होता है.
२) साधक को कौए का एक पंख प्राप्त करना चाहिए. फिर साधक शनिवार की रात्री में उस पंख पर सिन्दूर से शत्रु का नाम लिखे तथा निम्न मन्त्र का १०८ बार पाठ करे. इसके लिए कोई भी माला की ज़रूरत नहीं है. साधक का मुख दक्षिण दिशा की तरफ होना चाहिए, वस्त्र आसन आदि का विधान नहीं है.
ॐ क्रीं शत्रु उच्चाटय उच्चाटय फट्

इसके बाद साधक उस पंख को ले जा कर स्मशान में जला दे. या स्मशान के किनारे जला दे तथा घर आ कर स्नान कर ले. इस प्रकार करने से साधक के शत्रु का स्तम्भन होता है तथा शत्रु भविष्य में उसे परेशान नहीं करता.
३) रविवार के दिन साधक स्नान आदि से निवृत हो कर साधक सफ़ेद वस्त्र को धारण करे. इसके बाद साधक सूर्योदय के समय सूर्य के सामने देखते हुवे बीज मन्त्र ‘ह्रीं’ (HREEM) का १०८ बार जाप करे इसके लिए साधक को कोई भी माला की आवश्यकता नहीं है अगर साधक चाहे तो स्फटिक या रुद्राक्ष की माला का प्रयोग कर सकता है. सूर्य को अर्ध्य प्रदान करे. इसके बाद साधक बीज मन्त्र ‘ह्रीं’ का जाप करते हुवे ही सफ़ेद रंग के चन्दन से अपने मस्तक पर तिलक करे. इस प्रकार साधक यह क्रिया एक या कई रविवारों तक कर सकता है. यह अद्भुत प्रयोग है जिससे साधक के मान सन्मान में वृद्धि होती है. साधक को ध्यान रखना है की तिलक ऐसे ही नहीं लगाना है तिलक लगाते समय बीज मंत्र ‘ह्रीं’ का जाप होना इस प्रयोग में आवश्यक है तथा तिलक सूर्य देव के सामने ही लगाना है.

४) सिद्धो के मध्य पीपल की प्रदक्षिणा से सबंधित कई प्रकार के टोटके प्रचलित है. साधक को पीपल के ऐसे पेड को देखना चाहिए जो नदी के किनारे हो या स्मशान के किनारे हो. रविवार को सूर्यास्त के समय साधक पेड के पास एक दीपक प्रज्वलित करे. पेड पर कुमकुम हल्दी तथा अक्षत समर्पित करे, भोग के लिए खीर रखे. तथा ११ प्रदक्षिणा करे. यह प्रदक्षिणा घडी की दिशा में अर्थात बाएँ से दाएँ तरफ होनी चाहिए . इसके बाद साधक अपने कष्टों के निवारण के लिए प्रार्थना करे तथा चला जाए. पीछे मुड़ कर ना देखे. सामान्यतः निर्जन स्थान में यह प्रयोग करना सर्वोत्तम है, यह प्रयोग मात्र सूर्यास्त के समय ही होना चाहिए. इस प्रकार करने से साधक के कष्टों का निवारण होता है, अगर कोई विशेष कार्य आदि में बार बार बाधा आ जाती है या कोई काम रुक गया है तब साधक को समाधान की प्राप्ति होती है. साधक यह प्रयोग एक से ज्यादाबार भी कर सकता है.

५) मंगलवार के दिन साधक कम से कम आधामीटर का एक लाल रंग का कपडा ले, उसी कपडे में साधक गेहूं रखे. साधक जितना चाहे उतना गेहूं रख सकता है, साथ ही साथ उसमे कुछ पैसे भी रख दे तथा पोटली बना ले. उस पोटली को सूर्यास्त के बाद किसी हनुमान मंदिर पे ले जाएँ, तथा मूर्ति को स्पर्श कराएं. उस पोटली को फिर ब्राह्मण को या किसी ज़रूरत मंद व्यक्ति को दक्षिणा रूप में अर्पित करे. इस प्रकार करने से साधक को ग्रह सबंधित पीड़ा से राहत मिलती है. अगर ग्रह दोष के विपरीत प्रभाव साधक के जीवन पर पड़ रहे है तो साधक को राहत मिलती है.

शुक्रवार के दिन आटे की छोटी छोटी गोलियाँ बनायी जाए, उसके बाद उन गोलियों पर केसर से ‘श्रीं’ चांदी की कलम से या अनार की कलम से लिखे. एसी कम से कम ७ गोलियों को बनाए. ज्यादा कितनी भी बनाई जा सकती है. ‘श्रीं’ लिखने के बाद अगर वह अच्छे से दिखाई नहीं देता या फिर केसर फ़ैल जाए तो चिंता की बात नहीं है. गोलीयाँ छोटी हो, चने के आकार से बड़ी ना हो. फिर इन गोलियों को किसी तालाब या नदी पर जा कर मछलियों को खिला दे. इस प्रकार करने पर महालक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और साधक की धन सबंधित समस्याओ का निराकरण होता है.

किसी भी पूर्णिमा के दिन एक नारियल को लिया जाए, उस पर कुमकुम से स्वस्तिक का निर्माण करना चाहिए. इसके बाद उस नारियल को लाल वस्त्र में लपेट कर पुरे घर में घुमाएँ. इसके बाद इस नारियल को ले कर नदी या समुन्दर किनारे ले कर जाए और अपने जूते चप्पल उतार दे, यह क्रिया नंगे पाँव होनी चाहिए. अपने दुर्भाग्य की निवृति के लिए या घर में सुख शांति के लिए मन ही मन भगवान विष्णु को प्रार्थना कर ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ (om namo bhagawate vaasudevaay) का मन ही मन ११ बार उच्चारण कर के उस नारियल को प्रवाहित कर दे. इससे घर में सुख शांति की वृद्धि होती है.

किसी भी बुधवार की रात्री में या शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को चमेली की जड़ या उसका एक टुकड़ा ले. सुर्यस्स्त के समय उसको घूप दे कर उसका पूजन करे. पूजन के बाद साधक उत्तर दिशा की तरफ मुख कर के बैठ जाए तथा निर्वस्त्र हो कर उसके सामने बिना किसी माला के ‘ॐ वशमानय फट’ (om vashamaanay phat) का १०८ बार उच्चारण करे. यह क्रिया कहीं पर भी की जा सकती है लेकिन मंत्र जाप के समय किसी की नज़र साधक पर न पड़े. यह क्रिया कर लेने पर साधक को वह टुकड़ा किसी धागे में बांध कर या तावीज़ में भर का पहन लेना चाहिए. सुबह तक उसे धारण करना चाहिए. सुबह तावीज़ को निकाल कर या बांधे हुवे टुकड़े को खोल कर किसी पात्र में शहद ले कर उसमे वह तावीज़ डुबो दे. उसके बाद शहद को फेंक दे और तावीज़ को या जड़ को नदी, तालाब, समुन्दर में विसर्जित कर दे. इससे शत्रुबाधा का निराकरण हो जाता है और कठोर ह्रदय शत्रु भी वश हो कर मित्रता के लिए हाथ बढ़ा देता है.

किसी भी रविवार के दिन प्रातः सूर्योदय के समय एक कटोरे में शुद्ध पानी भर लेना चाहिए. अब सूर्य प्रकाश में बैठते हुवे साधक को ‘ॐ ह्रीं सूर्याय नमः’ (om hreem suryaay namah) का १०८ बार उच्चारण करे. इसमें माला आसान वस्त्र आदि का कोई विधान नहीं है. दिशा पूर्व हो. साधक को उस पात्र में रखे पानी में अपने ही प्रतिबिम्ब को देखते हुवे मंत्र जाप करना है. इसके बाद मन में अपनी उन्नति के लिए भगवान सूर्यदेव को प्रार्थना करे और उस पानी की किसी वृक्ष या पौधे को अर्पित कर दे. साधक की सभी द्रष्टि से उन्नति होती है.

किसी भी शुभ दिन में पीपल का एक पत्ता ले तथा उसे अपने सामने रख दे. उसके ऊपर कुमकुम से ‘ह्रीं’ लिखे. उसके बाद उस ह्रीं बीज पर एक सुपारी रखे. इसके बाद साधक मन ही मन ‘ह्रीं’ का उच्चारण जितना भी संभव हो उतना करे. कम से कम १०८ बार करना ही चाहिए. इसके बाद साधक उस पत्ते को तथा सुपारी को किसी एकांत स्थान में रख दे या प्रवाहित कर दे. साधक को अपने ऊपर आई हुई विपदा से या अज्ञात आशंका से समाधान प्राप्त होता है.

टोटके

1. पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करने से पितृ दोष का शमन होता हैं.
2. खुशहाल पारिवारिक जीवन के लिए किसी भी आश्रम में कुछ आटा ओर सरसों का तेल दान करे.
3. अच्छी तरह से हाँथ पैर धो कर बिस्तर पर सोने जाने से स्वपन दोष की समस्या में कमी आती हैं .
4. कटेरी की जड़ चार /पांच बार सूंघने से व्यक्ति उस दिन काफी उर्जावान महसूस करता हैं .
5. यदि नीबू के चार तुकडे करके चार दिश में फ़ेंक दिए जाये तो ओर ये प्रक्रिया ४० दिन तक की जाये तो रोजगार प्राप्त होने की दिशा में विशेष अनुकूलता होती हैं .
6. लक्ष्मी पूजन अकेले नहीं बल्कि भगवान विष्णु का भी पूजन साथ किया जाना चाहिए तभी तो लक्ष्मी की अनुकूलता अनुभव होती हैं .
7. यदि महा मृत्यु न्जय मन्त्र का जप करके घर से बाहर निकले तो व्यक्ति को दिन भर सुरक्षा रहती हैं .
8. शनिवार के दिन पीपल की जड़ छूने से व्यक्ति की आयु बढती हैं ओर अ काल मृत्यु की सम्भावनाये कम होती हैं .
9. कुलदेवी /देवता का ध्यान /पूजन करने से सारा दिन मगलदायक बना रहता हैं .
10. यदि व्यक्ति हर अमावस्या को भोजन ग्रहण करने से पूर्व कुछ भाग अपने पितरो को अर्पित करता हैं तो उनके आशीर्वाद से अत्यधिक अनुकूलता उसे अर्जित होती ही हैं.
चाहे कोई प्रयोग कितना भी छोटा या बड़ा हो पर यदि वह आपके जीवन को आरामदायक बनाने में सहयोगी सा होता हैं तो उसे निश्चय ही जीवन में स्थान देना चाहिए . इसी तरह के कुछ प्रयोग आपके लिए …
1. यदि हर बुधवार , एक पीला केला गाय को खिलाया जाये तो यह धन दायक होता हैं , आवश्यक यह हैं की इस कार्य का प्रारंभ , शुक्ल पक्ष से ही किया जाना चाहिए.
2. यदि धतूरे की जड़ को अपने कमर में बाँध लिया जाये तो यह जो व्यक्ति विशेष स्वपन दोष से पीड़ित हैं उनके लिए लाभदायक होगा.
3. सूर्योदय के पहले किसी भी चोराहे पर जाकर थोडा सा गुड चवा कर थूक दे फिर बिना किसी से बात करे बिना , नहीं पीछे देखे ओरअपने घर आ जाये , आपकी सिरदर्द की बीमारी में यह लाभदायक होगा .
4. अपने व्यापारिक स्थल को यदि वह उन्नति नहीं दे रहा हैं तो एक नीबू लेकर उसे अपने प्रतिष्ठान के चारों ओर घुमाएँ तथा बहार लाकर चार भाग में काट दे ओर फ़ेंक दे. आपकी उन्नति के लिए यही भी लाभदायक होगा.
5. किसी भी शुक्रवार को यदि तेल में थोडा सा गाय का गोबर मिला कर मालिश अपने शरीर की जाये फिर स्नान कर लिया जाये , तो यह व्यक्ति के विभिन्न दोषों को दूर करने में सहयोगी होता हैं .
6. सुबह उठ कर यदि थोडा सा आटा यदि चीटीयों के सामने डाल दे तो यह भी एक पूरे दिन का रक्षाकारक प्रयोग होता हैं .
7. यदि रवि पुष्प के दिन अपामार्ग के पौधे को विधि विधान से उखाड़ लाये ओर फिर तीन माला नवार्ण मंत्र जप करें, इसे पूजा स्थान या अपने व्यापारिक स्थान पर रखे आपके यहाँ धनागम में वृद्धि होगी .
8. परिवार में दोषों को समाप्त करने के लिए कुछ मीठा या मिठाई ओर उसके ऊपर थोडा सा मीठा पानी भी पीपल के वृक्ष की जड़ में अर्पित करे .
9. रविवार के दिन पीपल का वृक्ष नाछुये .
10. यदि व्यक्ति दोपहर के बाद यही पीपल के वृक्ष को स्पर्श करे तो व्यक्ति की अनेको बीमारी स्वतः ही नष्ट होती जाती हैं


 

1.घर मे क्लेश का वातावरण अचानक से हो जाए तो थोडा नमक ले कर उसे अपने कंधे पर रख कर उत्तर दिशा की तरफ मुख कर ११ बार निम्न मंत्र का उच्चारण करे. “ ॐ उत्तराय सर्व बाधा निवारणाय फट्” उस नमक को फिर हाथ मे ले कर घर के बहार थोड़े दूर कही रख दे तो घर मे क्लेश का वातावरण दूर होता है.
• 2.अगर घर मे उपरीबाधा या इतरयोनी की शंका हो तो शाम के समय धूप जलाए और पुरे घर मे “ हं रुद्ररूपाय उपद्रव नाशय नाशय फट्” इस मंत्र का उच्चारण करते हुए घुमाए. ऐसा कुछ दिन करने पर इतरयोनी परेशान नहीं करती
• 3.नौकरी के interview के लिए जब जाना हो, उसके एक दिन पहले किसी मज़ार पर जा कर सफ़ेद मिठाई बच्चो मे बांटे, मज़ार पे दुआ करे और एक हरे रंग का धागा बिछे हुए कपडे से निकाले. घर पर आ कर उसे लोहबान का धुप लगाए और “ अल्लाहु मदद” का जाप कर फूंक मारे, ऐसा ८८ बार जाप करे और फूंक मारे. इस धागे को अपनी जेब मे रखकर interview के लिए जाए, सफलता मिलेगी.
• 4.व्यापर वृद्धि के लिए व्यक्ति को अपने व्यापर स्थान पर एक अमरबेल लगानी चाहिए. उसे रोज पानी देना चाहिए तथा अगरबत्ती दिखा कर कोई भी लक्ष्मी मंत्र का जाप करने पर, उस लक्ष्मी मंत्र का प्रभाव बढ़ता है
• 5.किसी भी प्रकार की औषधि लेने से पूर्व उसे अपने सामने रख कर १०८ बार निम्न मंत्र का जाप कर लिया जाए और उसके बाद उसको सेवन के लिए उपयोग किया जाए तो उसका प्रभाव बढ़ता है. “ॐ धनवन्तरि सर्वोषधि सिद्धिं कुरु कुरु नमः”
• 6.हाथी दांत का टुकड़ा अपने आप मे महत्वपूर्ण है. किसी भी शुक्रवार की रात्री को उस पर कुंकुम से ‘श्रीं’ लिख कर श्रीसूक्त के यथा संभव पाठ करे. इसके बाद उसे लाल कपडे मे लपेट कर तिजोरी मे रख देने पर निरंतर लक्ष्मी कृपा बनी रहती है
• 7. सूर्य को अर्ध्य देना अत्यंत ही शुभ है. अर्ध्य जल अर्पित करने से पूर्व ७ बार गायत्री का जाप कर अर्पित करने से आतंरिक चेतना का विकास होता है
8. घर के मुख्य द्वार के सामने सीधे ही आइना ना रखे. इससे लक्ष्मी सबंधित समस्या किसी न किसी रूप मे बनी रहती है, अतः इस चीज़ का ध्यान रखना चाहिए.
घरेलु टोटके

1. भगवती लक्ष्मी के चित्र के सामने ९ बत्तियाओ वाला दिया/दीपक जलाये यह धन लाभ की स्थिति बनाता हैं .

2. जीवन मे कठिनाईयां यदि बहुत बढ़ गयी हो तो जिस पानी से आप स्नान कर रहे हो उसमे थोड़े से काले तिल डाल ले फिर स्नान करें अनुकूलता प्राप्त होगी .

3. जीवन की अनेको समस्याए जो लगातार सामने आती रहती हैं उसके निराकरण के लिए व्यक्ति यहाँ वहां भागता रहता हैं पर यदि किसी भी अमावस्या को किसी भी गरीब व्यक्ति को भोजन कराएं और उसे वस्त्र और दक्षिणा दे तो उसके पितृ वर्ग प्रसन्न होते हैं और उनकी प्रसन्नता पाने से आपके जीवन के कार्य सफल होना प्रारंभ हो जायेंगे .

4. कुछ ऐसी ही स्थिति हम सभी कि कुल देव या कुलदेवी के बारे मे हैं साधारणतः सिर्फ कुछ लोगों को छोड़ दें तो त्यौहार के अलावा उनकी याद भी कोई नही करता ,पर किसी भी काम पर जाने से पहले यदि विधिवत उनकी पूजन हो तो क्यों नही उनका आशीर्वाद आपकी सफलता का मार्ग और सरल कर देगा .

5. छत पर और ईशान दिशा मे काम मे न आने वाली वस्तुए नही रखना चाहिये क्योंकि ईशान दिशा का बहुत आधिक महत्त्व हैं ,पर रखना ही पड़ जाए तो उसे दक्षिण दिशा की ओर रखना चाहिए ,ऐसा करने से से वाधाए कम होगी और लाभ की अवस्था बनने लगेगी,

6. घर की सुख शांति बनाए रखने के लिए काले कुत्ते को जो भगवान भैरव का वाहन माना जाता हैं उसे सरसों के तेल मे लगी रोटी और उसमे थोडा सा काली उडद की दाल मिलाकर खिलाए तो बहुत अनुकूलता होगी पर यह शनिवार को करना कहीं जयादा लाभदायक हैं .

7. ठीक ऐसा ही एक उपाय सदगुरुदेव जी ने बताया हैं कि मंगलवार को बंदरों को चने खिलाना ,ऐसा करने से भी घर मे सुख शांती बनी रहती हैं ,

8. यदि आप अपने विस्तर मे इस तरह से शयन करते हैं कि आपका सिर पूर्व दिशा की ओर और आपके पैर पश्चिम दिशा कि ओर रहते हो तो आध्यत्मिक अनुकूलता पाने के लिए यह अनुकूल उपाय होगा .

9. ठीक इसी तरह सिर यदि दक्षिण की तरफ और उत्तर दिशा मे पैर कर के सोने से धन लाभ की स्थिति बनती हैं .पर इसके ठीक उलटे सोने से मानसिक चिंताए कहीं अधिक होने लगती हैं .

10. घर से जब बाहर जाया जा रहा हो तब घर कि कोई भी महिला एक मुठी भर काले उडद या राई को उस व्यक्ति के सिर पर तीन बार भुमाकर जमीन पर डाल दे , तो जिस कार्य के लिए जाया जा रहा हैं उसमे सफलता मिलना प्रारंभ हो जाती हैं .

व्यापार वृद्धि
१॰ व्यवसाय प्रारम्भ करने से पूर्व पत्नी या माता द्वारा यथासंभव भगवान की पूजा कराए, उसके पश्चात् पेड़े का प्रसाद बांटें तथा नौकरों को एक-एक रुपया बांटें। ऐसा नियमपूर्वक प्रत्येक शुक्रवार को करते रहें।
२॰ यदि ग्राहक कम आते हैं अथवा आते ही न हों तो यह अचूक प्रयोग करें। सोमवार को सफेद चन्दन को नीले डोरे में पिरो लें तथा २१ बार दुर्गा सप्तशती के निम्न मन्त्र से अभिमंत्रित करें-
“ॐ दुर्गे! स्मृता हरसि भीतिमशेष-जन्तोः,
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव-शुभां ददासि।
दारिद्र्य-दुःख-भय-हारिणि का त्वदन्या,
सर्वोपकार-करणाय सदाऽऽर्द्र-चित्ता।।”
अब अभिमन्त्रित चंदन को पूजा स्थल पर स्थापित कर दें या कैश-बॉक्स में स्थापित कर दें।
३॰ व्यवसाय स्थल पर श्रीयंत्र का विशाल रंगीन चित्र लगा लें, जिससे सबको दर्शन होते रहें।
४॰ व्यवसाय को नजर-टोक लगी हो अथवा किसी ने तांत्रिक प्रयोग कर दिया हो तो U आकार में काले घोड़े की पुरानी नाल चौखट पर इस प्रकार लगा दें, जिससे सबकी नजर उस पर पड़े।
५॰ व्यवसाय स्थल पर प्रवेश करने से पूर्व अपना नासिका स्वर देखें-जिस नासिका से श्वास चल रहा हो, वही पाँव प्रथम अंदर रखें। यदि दाहिनी नासिका से श्वास चल रहा हो तो अत्यन्त शुभ रहता है।

न्यायालय में विजय
१॰ तीन साबुत काली मिर्च के दाने तथा थोड़ी-सी देसी शक्कर मुंह में चबाते हुए निकल जाएं (जिस दिन न्यायालय जाना हो) अनुकूलता रहेगी।
२॰ जिस नासिका से श्वास चल रहा हो, वही पाँव प्रथम बाहर रखें। यदि दाहिनी नासिका से श्वास चल रहा हो तो अत्यन्त शुभ रहता है।
३॰ गवाह मुकर रहा हो या जज विपरीत हो तो विधिपूर्वक हत्थाजोड़ी साथ ले जाने से चमत्कारी प्रभाव उत्पन्न होता है।

रोग शान्ति
१॰ घर के सदस्यों की संख्या + घर आये अतिथियों की संख्या + दो-चार अतिरिक्त गुड़ की बनी मीठी रोटियां, प्रत्येक माह कुत्ते तथा कौए इत्यादि को खिलानी चाहिए। इससे साध्य तथा असाध्य दोनों ही प्रकार के रोगों की शांति होती है। यह रोटी तन्दूर या अग्नि पर ही बनाएं, तवे आदि पर नहीं।
२॰ प्रत्येक शनिवार को प्रातः पीपल को तीन बार स्पर्श करके शरीर पर हाथ फेरना तथा जल, कच्चा दूध तथा गुड़ (तीनों किसी लोटे में डाल कर) पीपल पर चढ़ाना भी लाभकारी होता है।
३॰ दवा आदि से रोग नियंत्रित न हो रहा हो तब-
शनिवार को सूर्यास्त के समय हनुमानजी के मन्दिर जाकर हनुमान जी को साष्टांग दण्डवत् करें तथा उनके चरणों का सिन्दूर घर ले आयें। तत्पश्चात् निम्न मंत्र से उस सिन्दूर को अभिमन्त्रित करें- “मनोजवं मारुततुल्यवेगं, जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये।।”
अब उस सिन्दूर को रोगी के माथे पर लगा दें।
४॰ जो व्यक्ति प्रायः स्वस्थ रहता हो, जिसे कोई विशेष रोग न हुआ हो, उस व्यक्ति का वस्त्र रोगी को पहनाने से तुरन्त स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करता है।

दुर्घटना से रक्षा
१॰ वाहन में विधिवत् प्राण प्रतिष्ठित वाहन-दुर्घटना-नाशक “मारुति-यन्त्र” स्थापित करें।
२॰ जिस नासिका से स्वर चल रहा हो, थोड़ा-सा श्वास ऊपर खींचकर वही पांव सर्वप्रथम वाहन पर रखें।
३॰ वाहन पर बैठते समय सात बार इष्टदेव का स्मरण करते हुए स्टेयरिंग को स्पर्श करें तथा स्पर्शित हाथ माथे से लगाएं।
४॰ घर से निकलते समय “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जप करने चाहिए।
५॰ अपनी और अपने वाहन की सुरक्षा के लिए आठ छुहारे लाल कपड़े में बांधकर अपनी गाड़ी या जेब में रखें।
६॰ वाहन दुर्घटना के लिए एक सरलतम उपाय यह है कि घर से बाहर जाते समय श्रद्धापूर्वक बोलें कि “बजरंगा ले जायेगा ते बजरंगा ले आयेगा”

 
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