सुदर्शन

मौसम की मार (व्यंग्य, कार्टून)

Posted by K M Mishra on May 13, 2009

आंधी-पानी से उत्तर प्रदेश में 28 की मौत । बिजली के खंभे उखड़ने से बिजली, पानी की किल्लत । जन जीवन प्रभावित ।

=>इसीलिए मैं शहर छोड़ कर जंगल में रहने लगा । एक तो बिजली, पानी के बिल के साथ दर्जन भर टैक्स भरो, ऊपर से आंधी-तूफान में बिजली के टूटे तारों से चिपक कर जान दे दो या बरसात में अपने घर में घुसे घुटने तक नाले के गंदे पानी में डूबकर आत्महत्या करलो। अपन तो यहां खुली हवा में चैन से रहते हैं । न उल्टे सीधे चैनलों की चिक-चिक और न ट्रैफिक की भीड़, शोर-शराबा और प्रदूषित वातावरण ।

4 Responses to “मौसम की मार (व्यंग्य, कार्टून)”

  1. Mayank Mishra said

    Amazing livlihood on your blog.
    !!CHEERS!!

  2. आइडिया तो अच्छा है..कम से कम सुकून से जी तो पाएंगे..!यहाँ शहरों से तो अच्छा ही रहेगा..!बहुत ही अच्छा कटाक्ष किया है आपने व्यवस्था पर..

  3. सच में इस अशान्त वातावरण से दूर जाने को जी करता है।
    पर शान्ति शायद जंगल में भी न मिले। शान्ति बहुत रिलेटिव फिनॉमिना है।
    बढ़िया लिखा!

  4. Xenia said

    This is a great blog post many thanks for sharing this informative information.. I will visit your blog regularly for some latest post. With regards, Xenia.

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