सुदर्शन

रिश्वतखोरी चालू है । (हास्य,व्यंग्य, कार्टून)

Posted by K M Mishra on April 23, 2009

                                                                            – नरेश मिश्र

 साधो, चुनाव का मौसम है । इस मौसम में सियासी पार्टियों से जो चाहो मांग लो । ऐसा मौका पांच साल में सिर्फ एक बार आता है । इस महापर्व पर नेताओं के चरण चूमने वाला वोटर उनसे चरण धुलवाता है। भक्त और भगवान की कुर्सी बदल का यह खेल बेहद दिलचस्प होता है ।

 

अब कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में गरीबों को तीन रूपये किलो गेहूं और महिलाओं को नौकरियों में तीस फीसदी आरक्षण देने का लालीपाप दिखाया है । संसद ओर विधान सभाओं में महिलाओं को तैंतीस फीसदी आरक्षण देने का वायदा बासी हो गया । वह इस हद तक बुस गया है कि अब कुत्ते भी उसे सूंघ कर भाग खड़े होते हैं ।

 

कांग्रेस ने इस संसदीय चुनाव में महिलाओं को कितने फीसदी टिकट दिये हैं, यह सवाल  पूछना गुस्ताखी होगी । कांग्रेस और दूसरी पार्टियों ने व्यवस्थापिका में महिलाओं को वाजिब आरक्षण क्यों नहीं दिया, इस सवाल को उठाना वाजिब नहीं है । सभी पार्टियां जानती हैं कि चुनाव में महिलाएं बाहुबलियों और माफियाओं से पार नहीं पा सकतीं । चुनाव में टिकट देने का सिर्फ एक मकसद चुनाव जीतना होता है । चुनाव जीतने के बाद संसद और विधान सभाओं में दाखिल माफिया और बाहुबली जिस तरह हंगामा खेज माहौल बनाते हैं, उसके लिए महिलाएं माफिक साबित नहीं होतीं ।

 

फिलहाल नौकरी मे महिलाओं को तीस फीसदी आरक्षण देने का चारा मुफीद है । उम्मीद है कि इस चारे में चिड़िया फंस जायेगी और कांग्रेस की पौ बारह हो जायेगी ।

 

वैसे भी रिश्वतखोरी अपने लोकतंत्र का सर्वश्रेष्ठ और सबसे मान्य सिध्दांत है । चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद भी सियासी पार्टियां रिश्वत का चारा फेंक ही सकती हैं । इसके लिए उन पर कोई रोक नहीं लगायी जा सकती । यह बात दीगर है कि तीन रूपये किलो गेहूं कोटेदार काले बाजार में बेंच देंगे और गरीब के हाथ सिर्फ कांग्रेस का हाथ ही आयेगा । महिलाओं के तीस फीसदी आरक्षण का विधेयक भी ठंडे गोदाम में चला जायेगा । महिलाओं में आरक्षण की मांग      उठना तय है । सर्व सम्मति का ब्रेक इस्तेमाल कर इस विधेयक की गाड़ी को आसानी से रोका जा सकता है और पटरी से उतरा जा सकता है ।

 

रिश्वखोरी हमारे देश का सर्वमान्य धर्म है । यही एक मात्र ऐसा धर्म है जिसका पालन देशवासी बड़ी निष्ठा से करते हैं । गरीब, मजदूर, किसान, लेखपाल से लगाकर कलक्टर, कमिश्नर, सांसद, विधायक और मंत्री तक इस धर्म के पालन पर एकमत हैं । वे अपने धर्मों को लेकर आपस में चाहे जितना सिर फुटौवल करें, लेकिन रिश्वत धर्म निभाने में सभी एकमत हैं ।

 

हमारे देश की एकता और अखण्डता का सबसे बड़ा सबूत है रिश्वतखोरी । कश्मीर से कन्याकुमारी और असम से गुजरात तक हमें रिश्वतखोरी के मजबूत धागे ने ही एकमत होने पर विवश किया है । पुराने जमाने के ऋ़षियों ने कहा था कि सोने के ढक्कन से सत्य के कलश का मुंह ढक दिया गया है । इसका मतलब है कि पुराने जमाने में भी सचाई पर रिश्वत का जोर चलता था । अगर वह इक्कीसवीं सदी में भी चल रहा है तो हमें सियापा क्यों करना चाहिए ।

 

साधो, जैसे बकरे को हलाल करने से पहले उसे खिला-पिलाकर मोटा किया जाता है । वैसे ही चुनाव के वक्त रिश्वत का चारा खिलाकर वोटर बकरे को मोटा किया जाता है । कटना तो बकरे की किस्मत में लिखा है, इसलिए उसे ज़ायकेदार चारा खाने से परहेज नहीं करना चाहिए ।

 

 

=>महिलाओं के लिए नौकरी में तीस फीसदी आरक्षण, हुंह ! सोनिया गांधी, शीला दीक्षित और अंबिका सोनी । कांग्रेस ने इन तीनों को तीस फीसदी आरक्षण तो पहले से ही दे रखा है, दूसरी तमाम महिलाओं को आरक्षण की क्या जरूरत है ।

 

 

6 Responses to “रिश्वतखोरी चालू है । (हास्य,व्यंग्य, कार्टून)”

  1. अच्छा है जी!

  2. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said

    मिश्रा जी,
    आपका ब्लॉग आपकी कड़ी मेहनत और लगन को प्रतिबिम्बित करता है। इसे ब्लॉगवाणी और चिठ्ठाजगत पर पंजीकृत कराया कि नहीं? हार्दिक शुभकामनाएं।

  3. Deepti said

    The great Indian Bribe festival

  4. Interesting post, thank you! Can you explain the second paragraph more?

  5. The moment I found your blog was like wow. Thank you for putting your effort in publishing this blog.

  6. simran chauhan said

    niceee…

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