सुदर्शन

नई साईट पर जायें – www.ksudarshan.in

Archive for the ‘सामाजिक’ Category

ज़रा आंख में भर लो पानी (विजय दिवस पर विशेष) (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 27, 2009

यह व्यंग्य लेख एक दूसरी  साईट पर ट्रान्सफर कर दिया गया है. लेख पढने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.

ज़रा आंख में भर लो पानी (विजय दिवस पर विशेष)

Advertisements

Posted in आतंकवाद, कारगिल युद्ध, कार्टून, पाकिस्तान, भारत, भ्रष्टाचार, युद्ध, राष्ट्रीय, सामाजिक, हिन्दी हास्य व्यंग्य, cartoon, Humor, kargil war | Tagged: , , , , , , , , , , , | 7 Comments »

जहां हरे-हरे नोट बंटते हैं (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 24, 2009

यह व्यंग्य लेख एक दूसरी  साईट पर ट्रान्सफर कर दिया गया है. लेख पढने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.

जहां हरे-हरे नोट बंटते हैं

Posted in आर्थिक, ए.टी.एम. बूथ, कार्टून, बाजार, राष्ट्रीय, सामाजिक, हिन्दी हास्य व्यंग्य, cartoon, comedy, Hasya Vyangya, Humor | Tagged: , , , , , , , , , , , | 5 Comments »

मदहोश करने का पक्का सरकारी इंतज़ाम (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 17, 2009

=>हिक्क! मदहोशी का डबल तड़का । सुरा और सुंदरी दोनो साथ- साथ । आखिर प्रशासन ने हमारी भी सुध ले ही ली । ठीक सामने पुलिस की चेतक रात दिन पहरा देती रहती है ताकि कोई नासपीटा हमारे आनन्द में बाधा न पहुंचाये । शाबाश ! पहली बार अच्छा इंतजाम किया है सरकार ने हम बेवड़ों के लिए । हिक्क!
->ये है इलाहाबाद का प्रतिष्ठित गल्र्स इंटर कालेज ”सेण्ट एंथोनी गल्र्स इंटरमिडियट कालेज“ और उससे मात्र पचास मीटर की दूरी पर शासनादेश और माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेशों की खिल्ली उड़ाती अभी हाल ही में शुरू हुयी ये ठेका देशी शराब की दुकान । जल्दी ही मिड डे मील की जगह सरकारी देशी शराब के ठेके ले लेंगे और सरकार की शिक्षा नीति भी बदल कर “खूब पियो, खूब पढो” हो जायेगी ।

Posted in आर्थिक, कार्टून, कुरीतियों, देशी शराब, प्रशासन, बाजार, बुराइयों, भ्रष्टाचार, मीडिया, राजनैतिक विसंगतियों, राष्ट्रीय, सामाजिक, स्वास्थ्य, cartoon, comedy, Hasya Vyangya, Humor | Tagged: , , , , , , , , , , , , | 7 Comments »

रोज़गार के नये अवसर – 1 (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 15, 2009


वित्त मंत्री प्रणव दा ने इस बजट में एक करोड़ बीस लाख नये रोज़गार पैदा करने की बात कही है । कारपोरेट सेक्टर कहता है कि ये सारे रोज़गार नरेगा या आंगनबाड़ी जैसी योजनाओं के लिए है और ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 100 दिन के ही रोज़गार की गारंटी देते हैं । शहरी और शिक्षित युवकों के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है जबकि आज देश में 20 करोड़ रोज़गार की जरूरत है । तो दोस्तों वित्त मंत्री ने तो बजट संसद में रख कर अपने हाथ झाड़ लिये । अब आप जानो, आपका काम जाने । कांग्रेस तो युवाओं का वोट लेकर पांच साल के लिए तगड़ा रोज़गार पा गयी ।

युवा मित्रों, ये तो आप जानते ही हो कि अपना हाथ, जगन्नाथ । माफ कीजिएगा टाईम पास की बात नहीं कर रहा हूं बल्कि आपको स्वरोज़गार के नये क्षेत्र बता रहा हूं । हालांकि ये स्वरोज़गार के क्षेत्र नये नहीं हैं लेकिन इनमें नोट कूटने की अपार संभावनाएं हैं और साथ ही ये समाजसेवा से भी जुड़े हुए हैं । स्वरोज़गार के अपने मजे हैं । कोई ससुरा बॉस नहीं होता । जब मन किया काम किया जब मन किया तब बाल-बच्चों को (अगर ये कष्ट आपके ऊपर नहीं पड़ा है) तो बाजूवाली भाभीजी को, पड़ोसी की लड़की को, अपनी हसीन सेक्रेटरी को स्कूटर की पिछली सीट पर बैठाया और सिनेमा देखने या इडली-डोसा के बाद आइसक्रीम खाने निकल गये । जिंदगी का मजा तो इसी में है । जब मन किया काम किया जब मन किया तफरी कर डाली । न किसी के बाप से लेना, न किसी के बाप को देना यानी न लेना एक, न देना दो ।

तो दोस्तों मैंने इस बढ़ती हुयी बेरोज़गारी पर गंभीरता से विचार किया और इस कारण मुझे एक झपकी भी आयी (दिमाग पर लोड डालते ही थोड़ी देर के लिए दिमाग की एम.सी.वी ट्रिप कर जाती है) । काफी देर तक विचारने (झपकने) के बाद ये लाखों का आइडिया दिमाग में लपलपाया । हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा वाला आइडिया था । ढेर सारे नये स्वरोज़गार के क्षेत्र हैं जिनपर सरकार की नजर नहीं पड़ी है हालांकि सरकार बहुत कुछ इन्हीं तरीकों और सिद्वांतों पर चला करती हैं । इस श्रंखला के अन्तर्गत मैं आपको इन्हीं तरीकों की जानकारी दूंगा । इसमें बहुत ज्यादा इन्वेस्टमेन्ट की जरूरत नहीं है, हां, अपने स्किल डेवलप करना जरूरी है । आप इनको प्रोफेशन का दर्जा दे सकते हैं जैसे डाक्टर, वकील, सी.ए. वगैरह होते हैं । अगर आप गौर से देखेंगे तो हर प्रोफेशनल आदमी मूल रूप से इन्हीं सिध्दांतों की मदद लेता है । चलिए अब ज्यादा आपकी दिमाग का दही नहीं करूंगा और शुरूआत करते हैं इस श्रंखला की पहली कड़ी की ।

रोज़गार नं0 एक – हाईटेक तांत्रिक या ज्योतिषाचार्य बनिये ।

मित्रों, मुंह न बनाओ । कुन्टलों संभावनाएं हैं इस क्षेत्र में और बोरा भर कर नोट भी हैं । घर बैठे आमदनी । पैर छूने वालों की भीड़ । कैश और काइंड में इंकम । बलभर यश । अफसर और नेता चरणों में लोटन कबूतर । बाबा बन कर ठाठ से गद्दी पर विराजो । समाजसेवा की समाजसेवा और खूबसूरत औरतों से संपर्क बढ़ाने के मौके । मैं कहता हूं क्या कमी है इस धंधे में । पैसा ही पैसा और ग्लैमर के साथ नाम भी । कोई आई.ए.एस या किसी मल्टीनेशनल का सी.ई.ओ क्या खा कर तुम्हारी बराबरी करेगा । चलो अब धंधे की बारीकियां भी समझा दूं और ट्रेनिंग कैसे लेनी है वो भी बता दूं । ध्यान से सुनना । हास्य, व्यंग्य समझ कर हंसी में मत उड़ा देना । जीवन बदल जायेगा ।

पहले तो अख़बार पढना सीखो । काहे कि ये सारे चऊचक धंधेबाज रोज अखबारों के वर्गीकृत पन्ने पर छपते हैं और इनकी कोई जांच भी नहीं होती । विज्ञापन इस तरह का होता है – विवाह में अड़चन, प्रेमविवाह, मोहनी वशीकरण, यंत्र हाथ पर रगड़िये प्रेमी-प्रेमिका भाग आयेंगे, धनवान बनें, व्यापार, विदेश यात्रा, नौकरी, लॉटरी, सौतन, गृहक्लेश, तलाक, अदालत, शिक्षा, संतान न होना, आदि एक यंत्र सौ काम । मिलिए पहाड़ वाले बाबा से । पुराने डॉट के पुल के बगल में, मसाले वाली गली, मिंया की सरांय, अलीगढ ।

इस तरह के विज्ञापन रोज अख़बार में छपते हैं । जाइये पहले वो विज्ञापन पढ़ कर आइये फिर धंधे की बात बताता हूं ।

जारी…………

=>पुत्र तुम्हारे हाथ में कालसर्प योग स्पष्टरूप से दिखाई पड़ रहा है । राहु-केतु ने तुम्हारा जीवन नर्क बना रखा है ।

=>हां महाराज, आप सही कहते हैं । मेरी पत्नी और मेरी सास ही मेरे लिए साक्षात राहु-केतु का अवतार हैं । इनसे मेरे प्राणों की रक्षा का कोई उपाय बतायें ।

Posted in आर्थिक, कार्टून, कुरीतियों, बाजार, बुराइयों, भ्रष्टाचार, मीडिया, रोज़गार, सामाजिक, हिन्दी हास्य व्यंग्य, cartoon, comedy, Hasya Vyangya, Humor | Tagged: | 2 Comments »

खाना ख़जाना: भाग – 1 (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on June 10, 2009

यह व्यंग्य लेख एक दूसरी  साईट पर ट्रान्सफर कर दिया गया है. लेख पढने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.

खाना खजाना – १

Posted in कार्टून, खाना ख़जाना, बाजार, मीडिया, मौसम, सामाजिक, स्वास्थ्य, cartoon, Hasya Vyangya, Humor | Tagged: , , , , , , | 12 Comments »

मुक्केबाज राहुल गांधी (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on May 28, 2009

राहुल गांधी ने चुनाव के पहले 2 महीने तक द्रोणाचार्य पुरूस्कार विजेता मुक्केबाजी कोच श्री ओम प्रकाश भरद्वाज से मुक्केबाजी का विधिवत प्रशिक्षण लिया था अपने आप को चुस्त दुरूस्त रखने के लिए और आत्मरक्षा की कला सीखने के लिए ।

– हें ! जे बात थी । तभी मैं सोचूं कि हम जैसे खुर्राट अखाड़ेबाजों को कोई कैसे दिन में तारे दिखा सकता है । जाय छोरो ने तो मोको एकइ पंच में धूल चटाये दियो । – मुलायम सिंह यादव ।

Posted in कार्टून, चुनाव, मुक्केबाजी, राजनैतिक विसंगतियों, राष्ट्रीय, राहुल गांधी, सामाजिक, हिन्दी हास्य व्यंग्य, cartoon, election, Hasya Vyangya, Humor | Tagged: , , , , , , , , , , , | 6 Comments »