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Archive for the ‘राष्ट्रीय’ Category

आ गया शत्रुहंता आई.एन.एस. अरिहंत (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 28, 2009

Zardari=>सर जी! एक मशवरा है । या तो पूरी पाक नेवी को सिन्धु या दूसरी नदियों में ट्रान्सफर कर दीजिये या फिर मेरा तबादला कराची से रावलपिंडी कर दीजिये क्योंकि भारतीय नौसेना में आई.एन.एस. अरिहंत और चक्र के आ जाने के बाद अब अपनी नेवी का तो खुदा ही मालिक है ।


मित्रों, 26 जुलाई को आई.एन.एस. अरिहंत का विशाखापत्तनम में जलावतरण हुआ और 27 जुलाई को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के चिंचियाने की आवाज़ सुनाई दी । ”अच्छा नईं कर्र रएं हैं ये आप लोग । कमज़ोर को मारने के लिए इत्ते वड्डे-वड्डे हैवी हथियारां बना रएं हैं । ठीक बात नईं हैं ये । पहले अवाक्स रडार और अब न्यूक्लियर सबमरीन । हम लोग तो पहले से ही तालिबान और अल-कायदा की दी हुई मौत मर रहे हैं । आप लोग क्यूं फालतू में परेशान हो रएं हैं । अब क्या छोरे के टेंटुए पर लात ही धर देंगे । हैं । अपनी तो चङ्ढी-बनयान तक सब गिरवी रखी है वाशिंगटन में । इत्ता पैसा कआं से लायेंगे अम लोग । बोलो ।”

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का कहना है ”भारत का यह कदम समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा में खतरा पैदा कर सकता है ।” भले मानुस लगता है तुमने हमारे शाकाहारी प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह का बयान नहीं पढ़ा है । मनमोहनसिंह जी का कहना है ”हम कोई आक्रामक कदम नहीं उठा रहे है और नहीं किसी को धमकाने के लिये यह कर रहे हैं ।” इसीलिये हमने न्यूक्लियर पनडुब्बी का नाम भी बहुत ही सात्विक और अहिंसा की पूजा करने वाले जैन तीर्थंकरों के नाम पर रखा है । हालांकि कुछ जैन मुनियों को इस नाम पर आपत्ति है लेकिन हम ठहरे अहिंसा के पुजारी । शांति के समय बापू को याद करते हैं और युध्द के समय उनकी लाठी उधार ले लेते हैं । डरने की कोई बात नहीं है । आप हमारे घटिया पड़ोसी हैं और इंशाल्लाह आपके घटियापन में कभी कोई कमी भी न आयेगी लेकिन ये न्यूक्लियर पनडुब्बी आपकी भी रक्षा करेगी । बूझिये कैसे ? अरे भइया ! हर बार लड़ाई तो तुम ही शुरू करते हो और बाद में पिट पिटा कर घर पोलो ले लेते हो । अब इन बेजोड़ हथियारों के खौफ से तुम युध्द शुरू ही नहीं करोगे । इसमे फायदा किसका है । ज़ाहिर है तुम्हारा ही है । लात खाने से बचे रहोगे । अब देखो न, तुम्हारी इज्ज़त आबरू सुरक्षित रहे इसके लिए हमें क्या क्या करम नहीं करने पड़ते ।

पिरायेगी तो है ही पड़ोसी की मित्रों क्योंकि आई.एन.एस. अरिहंत है काला ब्रह्मास्त्र । एक लगभग अदृश्य पनडुब्बी । जिसे ट्रेस कर पाना पाकिस्तान और चीन के लिए निहायत मुश्किल काम है । 110 मीटर लंबी, काले रबर से कोटिंग की हुयी, 6000 टन की ये पहली स्वेदेशी न्यूक्लियर सबमरीन भारत के लिए पोखरन परमाणु परीक्षण से भी बड़ी उपलब्धि है । आज पूरे विश्व में चार दर्जन से भी ज्यादा देश परमाणु ऊर्जा का दोहन कर रहे हैं । बीसियों देशों के पास परमाणु हथियार हैं । उत्तरी कोरिया और इरान बमबाज बनने के लिए धरती आसमान एक किये हुये हैं । लेकिन न्यूक्लियर सबमरीन सबके बस की बात नहीं है । हम दुनिया के ऐसे छठे देश हैं जिसके पास न्यूक्लियर सबमरीन है । ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है ।

आई.एन.एस. अरिहंत में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर द्वारा बनाया गया स्वेदेशी ‘प्रेशराइज्ड़ वाटर रियेक्टर’ लगाया गया है जो कि पनडुब्बी को 82 मेगावॉट बिजली की ताकत देता है । एक बार ईंधन लेने के बाद आई.एन.एस. अरिहंत को दसियों-बीसियों साल तक दुबारा ईंधन की जरूरत नहीं पड़ेगी । दूसरी आम डीज़ल पनडुब्बियों की तरह इसको हर रोज सतह पर आकर कार्बन-डाई-आक्साइड निकालने की जरूरत भी नहीं पड़ती है जिसकी वजह से इसको ट्रेस कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है । अबाध ऊर्जा मिलने के कारण इसकी गति भी 25 से 30 नॉटिकल माइल की होगी । फिलहाल इसमें अत्याधुनिक तारपीडो और स्वदेश निर्मित पानी के अंदर से ही 700 कि.मी. तक मार करने वाली एस.एल.बी.एम. के-15 सागरिका मिसाइल लगेगी और बाद में इसमें 500 से 800 कि.मी. तक मार करने वाली क्रूज मिसाइल भी लगा सकते हैं । भारत 3500 कि.मी. तक मार करने वाली एस.एल.बी.एम. के-5 के विकास में लगा हुआ है जो कि आई.एन.एस. अरिहंत और इसके जैसी दूसरी स्वदेशी न्यूक्यिर सबमरीन में लगाई जायेंगी । केन्द्रीय मन्त्रीयमण्डल ने पांच और न्यूक्लियर सबमरीन तैयार करने की अनुमति दे दी है ।

और इसके साथ ही मित्रों इसी सितंबर-अक्टूबर में हमें रूस से आकुला-2 श्रेणी की ”के-152 नेरपा” न्यूक्लियर सबमरीन दस साल के लिये लीज़ पर मिलने जा रही है । 12000 टन वजनी इस न्यूक्लियर सबमरीन का भारतीय नाम है आई.एन.एस. चक्र । फिलहाल इस पर कौन कौन से हथियार लगाये जायेंगे इसके बारे में सरकार अभी कुछ नहीं कह रही है लेकिन उम्मीद यही है कि आई.एन.एस. चक्र आम तौर पर लगने वाली 2500 से 5000 कि.मी. तक मार करने वाली ब्लास्टिक मिसाइलों और 500 से 800 कि.मी. तक मार करने वाली क्रूज़ मिसाइलों से लैस होगी ।

हमारे लिये हिंद महासागर आर्थिक और रणनीतिक रूप से निहायत ही महत्वपूर्ण है । हिंद महासगर की एकमात्र सबसे बड़ी नौसेना भारतीय नौसेना है लेकिन पिछले कुछ सालों से चीन हिंद महासागर मे घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा है । चीन हिंदमहासागर में हमें चुनौती देने की कोशिश कर रहा है । हिंदमहासागर में शांति बनाये रखने और अपनी सुरक्षा को पुख्ता बनाने के लिए 2016 तक हमें तीन एयरक्राफ्ट कैरियर और 6 से 10 न्यूक्लियर सबमरीन की जरूरत पड़ेगी । विध्वंसक पोत और डीज़ल चालित पनडुब्बियों की संख्या में भी वृध्दि की तत्काल जरूरत है । पाकिस्तान हमारे लिये कभी चुनौती नहीं रहा लेकिन आज हमारे सामने चुनौतियां क्षेत्रीय कम वैश्विक ज्यादा हैं और इनके लिये जल्दी ही कमर कसने की जरूरत है ।

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ज़रा आंख में भर लो पानी (विजय दिवस पर विशेष) (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 27, 2009

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ज़रा आंख में भर लो पानी (विजय दिवस पर विशेष)

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कारगिल युद्ध भाग : 1 (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 25, 2009

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कारगिल युद्ध भाग : 1

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जहां हरे-हरे नोट बंटते हैं (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 24, 2009

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जहां हरे-हरे नोट बंटते हैं

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मदहोश करने का पक्का सरकारी इंतज़ाम (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 17, 2009

=>हिक्क! मदहोशी का डबल तड़का । सुरा और सुंदरी दोनो साथ- साथ । आखिर प्रशासन ने हमारी भी सुध ले ही ली । ठीक सामने पुलिस की चेतक रात दिन पहरा देती रहती है ताकि कोई नासपीटा हमारे आनन्द में बाधा न पहुंचाये । शाबाश ! पहली बार अच्छा इंतजाम किया है सरकार ने हम बेवड़ों के लिए । हिक्क!
->ये है इलाहाबाद का प्रतिष्ठित गल्र्स इंटर कालेज ”सेण्ट एंथोनी गल्र्स इंटरमिडियट कालेज“ और उससे मात्र पचास मीटर की दूरी पर शासनादेश और माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेशों की खिल्ली उड़ाती अभी हाल ही में शुरू हुयी ये ठेका देशी शराब की दुकान । जल्दी ही मिड डे मील की जगह सरकारी देशी शराब के ठेके ले लेंगे और सरकार की शिक्षा नीति भी बदल कर “खूब पियो, खूब पढो” हो जायेगी ।

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समलैंगिकता से देशसेवा (हास्य/व्यंग्य)

Posted by K M Mishra on July 4, 2009

=>मां का लड़ला बिगड़ गया ।

साधो, अब हम मंज़िले-मक़सूद पर जल्दी ही पहुंच जायेंगे। बस दो-चार कदम का फासला बाकी है, उसे तय करने में चंद दिन बाकी रह गये हैं । हलब्बी जनादेश हासिल कर सरकार ने सौ दिन के विकास का प्रोग्राम बनाया है । इस एजेंडे पर अमल करते ही  अरहर की दाल तो 80 रू0 किलो हो गई और रजामंदी से बनाये गये समलैंगिक रिश्तों को अदालत ने हरी झंडी दे दी ।

अब कौन मुल्क हमसे आंखे मिलाकर कह सकता है कि हम डेवलप्ड कंट्री नहीं हैं । पश्चिम की ओर थोबड़ा करके हम उस जानिब की खिड़की खोलते हैं तो ताजी हवा, चमकदार रोशनी और पुर सुकून पर्यावरण मिलता है । पश्चिम की खिड़की नहीं खुले तो दम घोंटू माहौल में तबीयत घबराने लगती है और पिछड़ेपन की कालिख धोने के लिए कोई माकूल साबुन नहीं मिलता है ।

सो, पश्चिम के विकसित मुल्कों ने समलैंगिक रिश्तों को कानूनी जामा पहले ही पहना दिया था । हम कुछ कदम पिछड़ गये थे, अब अदालत के आदेश से समलैंगिकता का गलाफाड़ समर्थन करने वाली संस्थाएं उछल कूद मचा रही हैं । मानवाधिकार समर्थकों का कलेजा बल्लियों उछल रहा है । केन्द्रीय केबिनेट के मंत्री भी मुस्कुरा रहे हैं । उन्होंने भानुमति के पिटारे से निकाल कर एक चूहा उछाल दिया । मीडिया को बैठे बिठाये बढ़िया मुद्दा  हाथ लग गया । वे कई दिनों तक इस अदालती आदेश के गन्ने को जोर-शोर से पीसेंगे और इसकी खोई से एक-एक बूंद निचोड़े बिना चैन से नहीं बैठेंगे ।

साधो, सवाल यह है कि अदालत के इस फैसले में नया क्या है । रजामंदी से बनाये गये किसी भी रिश्ते पर पुलिस की दखल का दायरा बहुत सिकुड़ा होता है । अदालत ने बड़ी दूर तक सोच कर ये फैसला दिया है । देश की बढ़ती हुयी आबादी को रोकने के लिए अब समलैंगिकता को कानूनी जामा पहना देना चाहिए । सरकार को संसद में  बिल लाकर दस साल के लिए समलैंगिकता को सभी नागरिकों के लिए बाध्यकारी बना देना चाहिए, इससे देश की बढती हुयी जनसंख्या पर रोक लगेगी, नागरिकों को देशसेवा का एक मौका मिलेगा और देश दस साल के भीतर विकसित देशों की कतार में खड़ा हो जायेगा ।

रजामंदी से बनाये गये समलैंगिक रिश्तों का इतिहास आधुनिक युग की देन तो नहीं है । आदिम जमाने से आदमजाद यह हरकत करता आया है । धर्मों ने इसे नैतिकता के दायरे से बाहर कर दिया लेकिन पोप, पण्डित, मुल्ला, मौलवी और रब्बीयों की पाबंदी में ज्यादा दम नहीं था । वे खुद भी सेक्स के इस रंगोबू का मजा लेने से नहीं चूकते थे । धर्म का समलैंगिकता के खिलाफ फतवा भी कायम रहेगा और समलैंगिकता भी वजूद में रहेगी । दोनो के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता । हमें हर कीमत पर विकसित राष्ट्रों की बराबरी करना है । समलैंगिकता को कानूनी छूट देकर हमने इसी दिशा में एक ठोस कदम उठाया है । अब धर्म धुरंधरों के धमाकेदार बयानों से आसमान नहीं फट पड़ेगा ।

साधो, हमारी जवानी के दिनों में अंताक्षरी की प्रतियोगिता में शामिल होने वाले मुकाबला इस कविता से शुरू करते थे–समय बिताने के लिए करना है कुछ काम, शुरू करो अंताक्षरी लेकर हरि का नाम । अब समय बिताने के लिए राजनैतिक, विधिक, सामाजिक दायरे में कुछ तो करना ही पड़ेगा । पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ गये । मंहगाई सुरसा के मुंह से प्रेरणा ले रही है । मंदी की मार ने कमर तोड़ दी है । बेरोजगारी माउंट एवरेस्ट पर झंडा लहरा रही है । भारी जनादेश हासिल करने वाली सरकार इन बीमारियों का कोई कारगर इलाज नहीं तलाश सकती । उसे वोटरों का ध्यान किसी ऐसे मुद्दे की ओर आकर्षित करना है जिससे देशवासी कुछ दिनों के लिए तो भूख और बेरोजगारी को भुला कर इस बहस में उलझ जायें । समलैंगिकता से बढ़िया कारगर मुद्दा कुछ और हो नहीं सकता ।  विकसित दुनिया सेक्स के पीछे दीवानी है । वियेग्रा का इजाद हो चुका है । 80 वर्ष की उम्र वालों को भी जापानी और मद्रासी तेल 16 बरस की उम्र का जायका दिलाने का दावा करते हैं । समलैंगिकता की बहस से सेक्स की एक और तंग गली अब नेशनल हाइवे बन जायेगी ।

साधो, अब तो मान लो कि हम विकसित राष्ट्रों से एक कदम भी पीछे नहीं है । न मानो तो माला और सुमिरनी फेरो । हमारे बाप का क्या जाता है ।

– नरेश मिश्र

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