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Archive for the ‘बुराइयों’ Category

मदहोश करने का पक्का सरकारी इंतज़ाम (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 17, 2009

=>हिक्क! मदहोशी का डबल तड़का । सुरा और सुंदरी दोनो साथ- साथ । आखिर प्रशासन ने हमारी भी सुध ले ही ली । ठीक सामने पुलिस की चेतक रात दिन पहरा देती रहती है ताकि कोई नासपीटा हमारे आनन्द में बाधा न पहुंचाये । शाबाश ! पहली बार अच्छा इंतजाम किया है सरकार ने हम बेवड़ों के लिए । हिक्क!
->ये है इलाहाबाद का प्रतिष्ठित गल्र्स इंटर कालेज ”सेण्ट एंथोनी गल्र्स इंटरमिडियट कालेज“ और उससे मात्र पचास मीटर की दूरी पर शासनादेश और माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेशों की खिल्ली उड़ाती अभी हाल ही में शुरू हुयी ये ठेका देशी शराब की दुकान । जल्दी ही मिड डे मील की जगह सरकारी देशी शराब के ठेके ले लेंगे और सरकार की शिक्षा नीति भी बदल कर “खूब पियो, खूब पढो” हो जायेगी ।

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रोज़गार के नये अवसर – 1 (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 15, 2009


वित्त मंत्री प्रणव दा ने इस बजट में एक करोड़ बीस लाख नये रोज़गार पैदा करने की बात कही है । कारपोरेट सेक्टर कहता है कि ये सारे रोज़गार नरेगा या आंगनबाड़ी जैसी योजनाओं के लिए है और ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 100 दिन के ही रोज़गार की गारंटी देते हैं । शहरी और शिक्षित युवकों के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है जबकि आज देश में 20 करोड़ रोज़गार की जरूरत है । तो दोस्तों वित्त मंत्री ने तो बजट संसद में रख कर अपने हाथ झाड़ लिये । अब आप जानो, आपका काम जाने । कांग्रेस तो युवाओं का वोट लेकर पांच साल के लिए तगड़ा रोज़गार पा गयी ।

युवा मित्रों, ये तो आप जानते ही हो कि अपना हाथ, जगन्नाथ । माफ कीजिएगा टाईम पास की बात नहीं कर रहा हूं बल्कि आपको स्वरोज़गार के नये क्षेत्र बता रहा हूं । हालांकि ये स्वरोज़गार के क्षेत्र नये नहीं हैं लेकिन इनमें नोट कूटने की अपार संभावनाएं हैं और साथ ही ये समाजसेवा से भी जुड़े हुए हैं । स्वरोज़गार के अपने मजे हैं । कोई ससुरा बॉस नहीं होता । जब मन किया काम किया जब मन किया तब बाल-बच्चों को (अगर ये कष्ट आपके ऊपर नहीं पड़ा है) तो बाजूवाली भाभीजी को, पड़ोसी की लड़की को, अपनी हसीन सेक्रेटरी को स्कूटर की पिछली सीट पर बैठाया और सिनेमा देखने या इडली-डोसा के बाद आइसक्रीम खाने निकल गये । जिंदगी का मजा तो इसी में है । जब मन किया काम किया जब मन किया तफरी कर डाली । न किसी के बाप से लेना, न किसी के बाप को देना यानी न लेना एक, न देना दो ।

तो दोस्तों मैंने इस बढ़ती हुयी बेरोज़गारी पर गंभीरता से विचार किया और इस कारण मुझे एक झपकी भी आयी (दिमाग पर लोड डालते ही थोड़ी देर के लिए दिमाग की एम.सी.वी ट्रिप कर जाती है) । काफी देर तक विचारने (झपकने) के बाद ये लाखों का आइडिया दिमाग में लपलपाया । हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा वाला आइडिया था । ढेर सारे नये स्वरोज़गार के क्षेत्र हैं जिनपर सरकार की नजर नहीं पड़ी है हालांकि सरकार बहुत कुछ इन्हीं तरीकों और सिद्वांतों पर चला करती हैं । इस श्रंखला के अन्तर्गत मैं आपको इन्हीं तरीकों की जानकारी दूंगा । इसमें बहुत ज्यादा इन्वेस्टमेन्ट की जरूरत नहीं है, हां, अपने स्किल डेवलप करना जरूरी है । आप इनको प्रोफेशन का दर्जा दे सकते हैं जैसे डाक्टर, वकील, सी.ए. वगैरह होते हैं । अगर आप गौर से देखेंगे तो हर प्रोफेशनल आदमी मूल रूप से इन्हीं सिध्दांतों की मदद लेता है । चलिए अब ज्यादा आपकी दिमाग का दही नहीं करूंगा और शुरूआत करते हैं इस श्रंखला की पहली कड़ी की ।

रोज़गार नं0 एक – हाईटेक तांत्रिक या ज्योतिषाचार्य बनिये ।

मित्रों, मुंह न बनाओ । कुन्टलों संभावनाएं हैं इस क्षेत्र में और बोरा भर कर नोट भी हैं । घर बैठे आमदनी । पैर छूने वालों की भीड़ । कैश और काइंड में इंकम । बलभर यश । अफसर और नेता चरणों में लोटन कबूतर । बाबा बन कर ठाठ से गद्दी पर विराजो । समाजसेवा की समाजसेवा और खूबसूरत औरतों से संपर्क बढ़ाने के मौके । मैं कहता हूं क्या कमी है इस धंधे में । पैसा ही पैसा और ग्लैमर के साथ नाम भी । कोई आई.ए.एस या किसी मल्टीनेशनल का सी.ई.ओ क्या खा कर तुम्हारी बराबरी करेगा । चलो अब धंधे की बारीकियां भी समझा दूं और ट्रेनिंग कैसे लेनी है वो भी बता दूं । ध्यान से सुनना । हास्य, व्यंग्य समझ कर हंसी में मत उड़ा देना । जीवन बदल जायेगा ।

पहले तो अख़बार पढना सीखो । काहे कि ये सारे चऊचक धंधेबाज रोज अखबारों के वर्गीकृत पन्ने पर छपते हैं और इनकी कोई जांच भी नहीं होती । विज्ञापन इस तरह का होता है – विवाह में अड़चन, प्रेमविवाह, मोहनी वशीकरण, यंत्र हाथ पर रगड़िये प्रेमी-प्रेमिका भाग आयेंगे, धनवान बनें, व्यापार, विदेश यात्रा, नौकरी, लॉटरी, सौतन, गृहक्लेश, तलाक, अदालत, शिक्षा, संतान न होना, आदि एक यंत्र सौ काम । मिलिए पहाड़ वाले बाबा से । पुराने डॉट के पुल के बगल में, मसाले वाली गली, मिंया की सरांय, अलीगढ ।

इस तरह के विज्ञापन रोज अख़बार में छपते हैं । जाइये पहले वो विज्ञापन पढ़ कर आइये फिर धंधे की बात बताता हूं ।

जारी…………

=>पुत्र तुम्हारे हाथ में कालसर्प योग स्पष्टरूप से दिखाई पड़ रहा है । राहु-केतु ने तुम्हारा जीवन नर्क बना रखा है ।

=>हां महाराज, आप सही कहते हैं । मेरी पत्नी और मेरी सास ही मेरे लिए साक्षात राहु-केतु का अवतार हैं । इनसे मेरे प्राणों की रक्षा का कोई उपाय बतायें ।

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रामपुर की बसंती (जयाप्रदा) (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on May 16, 2009

=>नाच मेरी बुलबुल तुझे पैसा मिलेगा, ऐसा कदरदान तुझे कहां मिलेगा ।

=>मैं इतना ज़ोर से नाची आज, की घुंघरू टूट गये ।

=>जरा नचनिया के हाथ पांव तो देखो ।  बहुत करारे है साले ।  इ रामपुर की कौने चक्की का पिसा आटा खाती है ।

(चुनाव के दौरान रामपुर में जयाप्रदा के अश्लील पोस्टर लगाये गये थे और उनकी अश्लील सी.डी. बांटी गई थी । अमर सिंह का आरोप है कि ये शुभ काम आज़म खां के दिशा निर्देशन में किया गया था ।)

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मनमोहन सिंह की वफादारी (व्यंग्य, कार्टून)

Posted by K M Mishra on May 13, 2009

”सिख समाज 84 के दंगों को भूल जाए । इस मामले का पटाक्षेप हो चुका है ।                                                                                              – प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ।

=> ठीक ही कह रहे हैं मनमोहन सिंह जी आप, पर उपदेश कुशल बहुतेरे । चुनाव के वक्त कांग्रेस मुस्लिम संवेदनाओं को उभाड़ने के लिए गुजरात दंगों की माला जपने लगती है लेकिन 84 के दंगों के प्रतापी कांग्रेसी वीर जगदीश टाइटलर और सज्जन सिंह को निर्दोष साबित करने के लिएं सी.बी.आई. उन्हें क्लीनचिट दे देती है । सिख हो कर भी आप सिख समुदाय का दर्द नहीं समझ पा रहे हैं । सच्चा कांग्रेसी बनने के लिए क्या इस हद तक संवेदनहीन होना पड़ता है ।

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मदर्स डे स्पेशल (व्यंग्य, कार्टून)

Posted by K M Mishra on May 12, 2009

=>हैप्पी मदर्स डे माम !

=>जुग-जुग जियो बेटा । मेरी उम्र भी तुम्हे लग जाये मेरे लाल ।

अभी कुछ साल पीछे तक हम होली, दीपावली आदि पुराने प्राचीन त्यौहारों को मनाते थे । अब भी मनाते हैं, पर इस सदी के आखिर तक मनायेंगे, कुछ पक्का नहीं है । क्योंकि इन त्यौहारों के प्रति लोग अब उदासीन होते जा रहे हैं । भविष्य में लोग होली त्यौहार को इसलिए नहीं याद करेंगे कि एक होलिका जी थीं (प्रहलाद की बुआ) और एक प्रहलाद जी । दोनो कम्पटीशन में अंगीठी में कूद पड़े । होलिका जर बुताईं (जल मरीं), प्रहलाद का बाल भी बांका नहीं हुआ । बल्कि होली इस लिए याद की जायेगी क्योंकि आबकारी वाले साल भर दारू की धीमी बिक्री की वजह से स्टॉक फिनिश करने के लिए होली मनवाते थे, जिससे दारू का पुराना स्टॉक निकल जाता था और नये के लिए जगह खाली हो जाती थी । दारू के नशे में गुझिया, पापड़ हींचे जाते थे । रंग लगाने के चक्कर में रंगीले मर्द रंगीली स्त्रियों की खोज किया करते थे । छेड़ा-छेड़ी होती थी, बाद में परंपरा के अनुसार पिटते भी थे । एक ऐसा त्यौहार जिसमें एक दिन के लिए पूरा देश असभ्य हो जाता था । फिर एक पर्व होता है दीपावली । ये त्यौहार इस लिए याद किया जायेगा क्योंकि इसमें लोग दिये जलाने और घर की साफ सफाई से अधिक बमों और आतिशबाजी को अधिक प्राथमिकता देते थे । पूरा देश बमबाज हो जाता था । रावण के मरने के बाद राक्षसी वीरता धमाके करने लगी ।

नये नवेले अंतर्राष्ट्रीय त्यौहारों का जिक्र करना हो तो सबसे पहले वैलेंटाइन डे का ख्याल आता है । 14 फरवरी का इंतजार सयाने युवक साल भर से करते हैं । इस साल पिट-पिटा कर फारिग हुए तो अगले साल फिर किस हसीना से सैंडिलें खानी हैं उसकी तैयारियों में लग जाते हैं । और अगर दरियादिल हसीना मान भी गई तो कम्बख्त भगवा फौज के डंडों और जूतों से कैसे बचेगें खुदा ही जाने । इसी लिए किसी भुक्तभोगी ने बहुत पहले ही लिख मारा था ”एक आग का दरिया है और डूब कर जाना है” ।

फिर मार्च में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है । एक दिन के लिए शहरो में रहने वाली महिलाएं खुश हो लेती हैं । जबकि उसी दिन किसी दूर दराज के गांव में शौच क्रिया के लिए जाती किसी युवती के साथ गांव के कुछ दबंग मिलकर सामूहिक महिला दिवस मना डालते हैं । या देश भर के हजारों नर्सिंग होमों में दसियों हजार कन्या भ्रूणों की हत्या कर दी जाती है । या उसी दिन नेपाल, बंग्लादेश से या फिर भारत के ही किसी आदिवासी क्षेत्र से भगाई गई हजारों मासूम लड़कियों को बेच दिया जाता है । अपना-अपना तरीका है महिला दिवस मानने का । कोई किसी तरीके से मनाता है, कोई किसी तरीके से ।

11 मई, मदर्स डे । आप लोगों को शायद याद न होगा कि 11 मई सन 1998 को ही पोखरन में द्वितीय परमाणु परीक्षण किया गया था । जिसे ”शक्ति 98” का नाम दिया गया । ”शक्ति” ने पैदा होते ही ऐसी दहाड़ लगाई कि पूरा विश्व कांप उठा था । लायक पुत्र इसी को कहते हैं । शत प्रतिशत मां की रक्षा करेगा । पश्चिमी देशों की देखा देखी अब हमारे यहाँ भी मदर्स डे मनाया जाने लगा है । माँ को धन्यवाद प्रस्ताव पारित करते हैं । एक माँ जो हमें 9 महीने पेट में रखती है, कष्ट सह कर हमें इस दुनिया में लाती है, अपना दूध पिलाती है, पालती है, पोषती है, कितनी ही रातें हमारे द्वारा गीला किये गये बिस्तर पर बिताती है । एक दिन उस माँ को थैंक्स कह दो और दस रूपये का आर्चीज़ का कार्ड थमा दो, बस । बाकी वंदेमातरम । मित्रों, क्या माँ साल के 364 दिन हमारे लिए नौकरानी होती है और एक दिन के लिए वो पूज्यनीय हो जाती है ? हमारी संस्कृति में तो हर दिन मातृ और पितृ दिवस है । जीवित माँ-बाप बच्चों के लिए भगवान से बढ कर होते हैं ।

काशी के एक सेठ थे । अपार दौलत थी । एक दिन ख्याल आया कि अपनी स्व0 माँ के नाम से गंगा नदी पर एक भव्य घाट बनवा दें । घाट बन गया । उसके उद्धाटन पर सेठ जी ने कहा कि उन्होंने मातृ ऋण चुका दिया है । उसी वक्त वह घाट गंगा में समा गया । गंगा जी भी तो एक माँ हैं, वो दूसरी माँ का अनादर कैसे देख सकती थीं । मातृ ऋण से हम कभी उऋण नहीं हो सकते । इसलिए कोशिश करना बेकार है ।

मेरा आर्चाज वालों से निवेदन है कि वे और कार्डों की तरह स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के लिए भी कार्ड छापें । इसी बहाने नई पीढी भारत के स्वतंत्रता संग्राम और अपने संविधान को भी याद कर लिया करेगी । फिर चाहे उस छुट्टी की शाम ”चीयर्स फॉर द इंडिपेंडेंस ऑफ आवर कंट्री” ही हो ।

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क्या कहते हैं सितारे (हास्य/व्यंग्य, कार्टून)

Posted by K M Mishra on April 29, 2009

नरेश मिश्र

साधो, जो पंडित के पोथे मे, सो हमारे अष्टावक्र   भेजे में ! हम इस चुनाव के अधर्म युध्द में यथामति महापुरूषों का भविष्य बता रहे हैं । हमें उम्मीद है कि चुनाव लड़ने वाले और प्रचार करने वाले इस ज्योतिषीय भविष्य कथन से लाभ उठायेंगे ।

जगदीश टाइटलर- आपकी राहु महा दशा खत्म हो गई है । साढेसाती सनीचर भी आपके सिर से उतर कर सी. बी. आई. की खोपड़ी पर सवार हो गया है । सन चौरासी के दौरान बेगुनाह सिखों के कत्ले आम में आपने बड़ा पराकरम दिखाया था और आगे बढ कर दंगाइयों का नेतृत्व किया था । जिन दिल्ली वासियों ने आपको यह महान नेतृत्व करते देखा था, अब साबित हो गया है कि वे नेत्रहीन थे । दिव्य चक्षु तो सिर्फ सी. बी. आई. को कांग्रेस महाप्रभू की कृपा   से मिले हैं । वह अमेरिका तक दौड़ लगाकर इस नतीजे पर पहुंची कि आप बेगुनाह और निखालिस दूध के धुले हैं । कांग्रेस ने आपको संसद का गेट पास दे दिया था, लेकिन भावुक पत्रकार जनरैल सिंह के जूते ने सारा किये कराये पर पानी फेर दिया और आपकी कुंडली में नीच के मंगल   के दोष उजागर हो गये ।

माया कोडनानी – आपको पीड़ा पहुंचाई है गोचर में, मकर राशि में भ्रमण कर रहे नीच के वृहस्पति ने । आपने नरोदा-पाटिया के दंगे में दंगाइयों का नेतृत्व किया था । कोर्ट को साफ दिखाई पड़ा कि आपका दंगाइयों को भड़काने   में हाथ था । इस मुल्क में सांप्रदायिक दंगे तो कांग्रेस के शासन में ही बहुत हुए हैं लेकिन जमाने को सिर्फ भाजपा हुकूमत के दौरान हुए दंगे ही नजर आते हैं । अब फिलहाल आप जेल की कोठरी में कैद हो कर सिर्फ उस दिन का इंतजार कर सकतीं है जब जल्लाद आपकी गर्दन के नाप का फंदा तैयार करेगा । इस मुल्क में जो होता है, वह सिर्फ ऊपर वाले की मर्जी से ही होता है । ऊपर वाले का पता है – दस जनपथ, नई दिल्ली ।

सलमान खान – आपने सही वक्त पर कांग्रेस के चुनाव प्रचार का झण्डा उठाया है । चिंकारा शिकार मामले में आप अभी बरी नहीं हुए हैं । पंडित ने आपको चुनावी नक्षत्रों में कांग्रेस के लिए जप, श्रमदान और व्रत रखने की सलाह दी है । इन दिनों कांग्रेस की यथा सामर्थ्य पूजा करने से और कांग्रेसी उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रचार करने से आपको इस संकट से मुक्ति मिल सकती है । लेकिन आप अपनी आदतों से बाज नहीं आयेंगे और दोबारा कुछ ऐसा कर बैठेंगे कि कानून के शिकंजे में फंस जायेंगे । आप जैसे आदतन अपराधियों के लिए कांग्रेस की छत्र-छाया मुफीद साबित होती है ।

शाहरूख खान – आपकी शुक्र की महादशा में नीच के शनि की अन्तर्दशा शुरू हो चुकी है, इसीलिए आप इनकम टैक्स के पचड़े में फंसे हैं । आपके लिए भी कांग्रेस का जप, दान, व्रत और चुनाव प्र्रचार लाभ दायक रहेगा । लालू और मुलायम सिंह ने भी कुंडली में पापग्रहों की कुदृष्टि से बचने के लिए यही अनुष्ठान किया था । कलिकाल में कांग्रेस के जप, दान और व्रत से मानोवांछित फलों की प्राप्ति होती है और राज दरबार में भी सम्मान के अवसर आते रहते हैं ।

अमिताभ बच्चन – अमर सिंह से सावधान रहें । यह नेता केतु की महादशा में जनमा है और लग्न में भी इनके उच्च का केतु विराजमान है । केतु का अर्थ होता है कैतव । कैतव का मतलब होता है चालबाजी और धूर्तता की पराकाष्ठा । अमर सिंह शकुनी के नये अवतार हैं । ये शुभचिंतकों को संकट में फंसा कर दिलकश हंसी हंसते हैं। उन जैसों के लिए शायर ने कहा है – हुए तम दोस्त जिसके, उसका दुश्मन आसमां क्यों हो । आपने एक बार उत्तर प्रदेश में दम है, क्योंकि जुर्म यहाँ कम हैका नारा लगाकर देख लिया । अब खामोश होकर बैठिये । सपा की ग्रह दशा सुधरेगी तो आपके दिन भी खुद ही बहुर जायेंगे । चुनाव के हंगामे से दूर रहना आप के लिए ठीक रहेगा ।

फिलहाल मित्रों, अभी इतने ही लोगों की कुण्डली तैयार हो पाई है । बाकी की कुण्डलियां विचार कर जल्द ही आपके समक्ष पेश की जायेंगी ।   तब तक के लिए विदा ।

 

 

=>जजमान, शनि में राहु की अन्तर्दशा चल रही है । नीच का चन्द्रमा जल्द ही आपको किसी युवती के हाथों तिरस्कृत करवायेगा । वक्री मंगल की राशीश बुध पर कुदृष्टि है । हाथ पैर के साथसाथ दिल के भी टूटने का भय है । एक साल तक सभी स्त्रियों को मां-बहन की दृष्टि से देखें । बुरा समय गुजर जायेगा ।

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