सुदर्शन

नई साईट पर जायें – www.ksudarshan.in

Archive for the ‘अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं’ Category

सत्यवादी जरदारी (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 10, 2009

=> ये नासपीटे दोजख के कीड़े, इनको हमने भारत को काटने के लिए पाला था, ये अब हमीं को काट खाने लगे हैं । अब इनका इलाज अमेरीकी गोलियां और बम हैं । मरो सालों ।

                

           

 पिछली रात पता नहीं कौन सी रूहानी मजबूरी पेश आई कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने हमेशा कि तरह एक बोतल स्काच की जगह दो बोतल स्काच खाली कर दी । शायद उनको मरहूम बेगम बेनज़ीर की याद हद से ज्यादा सता रही थी जबकि इस्लामाबाद के राष्ट्रपति भवन में उनको अमेरिकी राष्ट्रपति वाली सारी सुविधायें मुहैया कराई गयी हैं । यानी कि वो जब चाहे बिल क्लिटंन की तरह सिगार भी पी सकते हैं और पिला भी सकते हैं और पाक सेना भी यही चाहती है कि राष्ट्रपति जरदारी सारी सुविधाओं को भोगें और उसी में मशगूल भी रहें लेकिन बेकायदे आजम जिन्ना साहब के उसूलों के खिलाफ हरगिज़ न जायें । बेकायदे आजम जिन्ना साहब ने ख्वाब देखा था एक इस्लामिक राष्ट्र का जहां फिजाओं में सिर्फ इस्लाम ही इस्लाम तारी हो यानी की सड़कों पर लाशें, एक दूसरे का खून बहाते शिया और सुन्नी, एक अदद मानवाधिकार के लिए रिरियाते भूखे-नंगे बच्चे और औरतें, अपने ही देशवासियों से जूझती पाक सेना ……. और पता नहीं क्या, क्या ।

 जरदारी साहब सवेरे उठे तो उनको रात ख्वाब में चीखती, चिल्लाती मरहूम बेगम बेनजीर की याद आयी । बेनजीर चीख चीख कर उनको आदेश दे रही थीं कि मेरा हत्यारों को कब सजा दोगे । जरदारी साहब बेनजीर की चीख से अब भी उतना ही डरते हैं जितना कि पहले डरा करते थे । सवेरे उठे तो सिर भारी भारी हो रहा था । किसी तरह उठ कर गुसलखाने में जाकर फारिग़ हुए । सवेरे की नमाज़ अदा की और सिर झटकते हुऐ, आहिस्ता आहिस्ता चल कर अपने दीवान-खाने में पहुंचे और सोफे पर ढ़ेर हो गये ।

 तभी पता नहीं किस कोने से एक पत्रकार नाम का प्राणी निकल कर उनके सामने आ गया । जरदारी साहब ने आंखे मिचमिचा कर उसको देखने की कोशिश की । हाथ में कागज और कलम देखी तो समझ गये कि ये कम्बख्त अखबारनवीस की कौम से है । सवेरा हुआ नहीं कि मुंह उठाये चले आये । पूछा, क्या चाहते हो ।

 घिसे हुए पत्रकार ने देश के अंदरूनी हालात पर सवाल दाग दिया ।

 रात की स्काच अभी तक सिर पर दुगुन में तीन ताल बजा रही थी, ऊपर में मरहूम बेगम बेनजीर की भटकती आत्मा की चीखें । जरदारी साहब का ऊपरी माला कुछ देर के लिए सिफर हो गया । उस वक्त तक कामचोर सलाहकार भी सो कर नहीं उठे थे जो रात में हमप्याला बने आगे पीछे घूम रहे थे । राष्ट्रपति को कोई कूटनीतिक जवाब नहीं सूझा और सचाई ज़बान पर आ गयी । ये सब साले आतंकी, हमारे ही पैदा किये हुए हैं । इन सांपों को कल तक हमने इस लिए दूध पिलाया था कि ये जा कर भारत को डसेंगे । दुनिया भर में इस्लाम का नारा बुलंद करेंगे । ये दोजख के कीड़े, हरामी हमीं को काटने लगे । हमारी फौज फिनिट का डिब्बा लेकर इनको साफ करने में लगी है । कीड़े पड़ेंगे, कीड़े इन नासपीटों को, जिन्होंने मेरी बेगम को मुझसे जुदा कर दिया । दिल का दर्द ज़बान पर तो आया ही आया ही आंखों से भी छलकने लगा ।

 राष्ट्रपति की आंखे नम देख कर वो अखबारनवीस वहां से पोलो ले लिया । लेकिन देरी से कमरे में घुसने वाले राष्ट्रपति के सलाहकार ने जब राष्ट्रपति के मुंह से ये सचाई भरा बयान सुना तो सिर पीट लिया और सोचने लगा कि अब जनरल को इसका क्या मतलब समझायेंगे, क्योंकि कल तक तो भारत से भी कूटनीतिक दबाव पड़ना शुरू हो जायेगा ।

 

 

Posted in अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं, आतंकवाद, कार्टून, पाकिस्तान, भारत, भ्रष्टाचार, युद्ध, राजनैतिक विसंगतियों, हिन्दी हास्य व्यंग्य, cartoon, comedy, Hasya Vyangya, Humor | Tagged: , , , , , , , , | 4 Comments »

अमेरिकी खैरात के दम पर युद्ध की तैयारी । (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on June 9, 2009

=>ये लो, खैरात ।  हमारी आदत है कि पहले अपनी कुटिल नीतियों से किसी देश को भिखारी बना देते हैं, फिर उसे कपड़े, लत्तों, खाने-पीने, दवाई-दारू और छत के लिए भीख देते रहते हैं, ताकि वह कभी अपने पैरों पर दुबारा न खड़ा हो सके और हमेशा हमारे दरवाजे का वफादार कुत्ता बना रहे ।

=>शुक्रिया, शुक्रिया । बड़ी मेहरबानी आपकी । परवरदिगार आपके खज़ाने भरपूर रखे ।

=>जनरल । ये लो डालर । जाकर इन से आला दर्जे़ के टैंक, मिसाइल और लड़ाकू जहाज खरीदो । हमने बहुत पहले कसम खाई थी कि भले ही हमें घास की रोटियां खानी पड़े लेकिन हम एक हजार साल तक भारत से लड़ते रहेंगे । गरीब और भुखमरे पाकिस्तानियों को कपड़े, दवाईयों और छत की कतई जरूरत नहीं हैं । अगर इनको ये सब चीजें मुहैया करा दीं तो कम्बख्तों को इनकी आदत पड़ जायेगी । पहले कश्मीर बाद में कुछ और ।


(हाल ही में प्रकाशित हुई पैंटागन की एक रिपोर्ट के अनुसार बुश सरकार द्वारा पाकिस्तान को दी गई असैन्य सहायता को पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में लगाया था । हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब जानते बूझते हुए भी कुछ दिन पहले ओबामा सरकार ने पाकिस्तान की असैन्य सहायता संसद में प्रस्ताव पारित करके तीन गुनी कर दी ।)

Posted in अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं, आतंकवाद, आर्थिक, कार्टून, पाकिस्तान, बाजार, भारत, भ्रष्टाचार, युद्ध, हिन्दी हास्य व्यंग्य, cartoon, Hasya Vyangya, Humor | Tagged: , , , , , , , , , , , , , | 9 Comments »

मास्टरमाइंड आतंकी बाइज्ज़त बरी (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on June 6, 2009

=>जज साहब,   कृपया मुकद्दमे की बारीकियों पर  नज़र डालें.  मोहतरमा की टांगों से ज्यादा संगीन मुलजिम के अपराध हैं.

दृश्य : लाहौर की एक क्रिमिनल कोर्ट ।

जमादार : मुलजिम हाफिज सईद हाज़िर हों sssss ।

हाफिज सईद : मादर…, नाबीने की औलाद । दीदे फूट गये हैं तेरे । सामने ही तो खड़ा हँ, क्यूं हलक फाड़ कर चिल्ला रहा है । जिस दिन ए.के. -47 की नाल हलक में घुसेड़ दूंगा उस दिन सुनूंगा तेरी आवाज़ ।

जमादार : माई बाप, मुआफ करें, नौकरी है, सो चिल्लाना पड़ता है । फिर आपको कौन नहीं जानता । हिन्दुस्तान से लेकर अमरीका तक बड़े हल्ले हैं आपके । तशरीफ लाइये । अदालत इंतज़ार कर रही है ।

हाफिज सईद : अबे साले, इंतजार तो हमारा मियां मुशर्रफ तक किया करते थे, ये दो टके की अदालत क्या चीज़ है । भैन….., एक तो मुल्क और इस्लाम के लिए ज़िहाद का नारा बुलंद करते फिरो, ऊपर से ये कोर्ट-कचहरी का चक्कर अलग से । अब कोर्ट में हाजिरी दें कि हिन्दुस्तान में दहशत गर्दी का नंगा खेल खेलें । जब से हरामखोरों ने नज़रबंद किया है ज़िंदगी दोज़ख हो गई है । दो महीने हो गये किसी कश्मीरी औरत के साथ जिना किये।

जज : अरे! आइये, आइये हाफिज साहब । आदाब । आज इधर कैसे आना हुआ आपका । सब खैरियत तो है ।

हाफिज सईद : खुदा खैर करे । जब मुल्क के सिपाही बंदूक छोड़ कर अदालतों के चक्कर लगायेंगे तब परवरदिगार ही इस मुल्क पर रहम खा सकता है ।

जज : ओ अच्छा, अच्छा । अब समझा । कहां तो सरकार को मुबंई हमले के लिए आपको निशाने- पाक से नवाज़ना चाहिए था और कहां काफिरों के ज़रा सा चिल्लाने पर आपको नज़रबंद कर दिया । मिट्टी पड़े मरदूदों के मुंह पर । आप आराम से तशरीफ रखिये । क्या लेंगे ? ठंडा गरम या फिर कुछ खाने को मंगाये ।

हाफिज सईद : अरे नहीं, नहीं । तकल्लुफ़ क्यूं करते हैं । अभी दो प्लेट कबाब घर से खा कर निकला हूं । आज नहीं, फिर कभी घर आकर मजे से चाय-नाश्ता कर जाउंगा । बच्चे कैसे हैं । बेगम का कौन सा महीना चल रहा है । कितने बच्चे हो गये आपके? सात हैं कि आठ ?

जज : आपकी याद्दाश्त भी अब कमज़ोर होने लगी है । नौ तो पहले से ही थे । अबकी जुलाई में कुल दस हो जायेंगे । बड़ा करम है अल्ला ताला का ।

हाफिज सईद : आप भी इस्लाम के सच्चे सिपाही हैं । जितने बच्चे होंगे उतना ही इस्लाम मजबूत होगा । सबको मेरे मदरसे में तालीम के लिए भेज देना । सबको तालिबानी बना दूंगा ।

जज : जी, जी, बहुत अच्छा, शुक्रिया आपका । हां, पेशकार मुकद्दमा शुरू किया जाये ।

सरकारी वकील आगे आता है ।

जज : आप सरकार की तरफ से वकील हैं । मुलजिम का वकील कहां है ।

सरकारी वकील : हुजूर, मैं सरकार और मुलजिम दोनों का ही वकील हूं । सरकार का वकील बन कर नौकरी बजा रहा हूं और हाफिज साहब का वकील बन कर इस्लाम की मदद कर रहा हूं ।

जज : अच्छा ठीक है । बहस शुरू करें ।

सरकारी वकील : हुजूर, मुलजिम पर इल्जाम है कि उसने भारत के शहर मुंबई पर आतंकी हमले के लिए दहशतगर्दों को ट्रेनिंग दी, हथियार और रूपये मुहैया कराये और हमले का पूरा  मंसूबा भी इन्होंने ही तैयार किया ।

जज : वकीले सफाई का क्या कहना है ।

वकील सफाई : हुजूर, ये इल्जाम सौ फीसदी सही हैं । लेकिन चूंकि मुलजिम ने ये सारी कार्यवाही इस्लाम और मुल्क के प्रति अपनी वफादारी दिखाने के लिए की है, इसलिए मुलजिम के जज्बातों का ख्याल रखते हुए इस नेक काम के लिए उसकी हौसलाअफजाई करनी चाहिए और बाइज्ज़त बरी किया जाना चाहिए । ज़िहाद के लिए मर मिटने वाले खुद्दार सैनिकों की जगह अदालतों और कैदखानों में नहीं  है । उन्हें तो काफिरों को उन्हीं की ज़मीन पर जिबह करने  और उनकी औरतों, बच्चियों के साथ जिना करने का पाक काम अजांम देना होता है ।

जज : ठीक कह रहे हैं आप । सरकारी वकील साहब, मुलजिम के खिलाफ आपके पास कोई सबूत या गवाह है या सिर्फ कोरी लफ्फाजी से ही आप काम चलायेंगे ।

सरकारी वकाल : हुजूर, भारत से कुछ रद्दी दस्तावेज़ भेजे गयें हैं, जिन्हें कि वो सबूत कह रहे हैं ।

वकीले सफाई : जज साहब, अब भला कागज़ के चंद टुकड़ों के बिना पर क्या हम मुल्क और इस्लाम के खैरख्वाह इस इंसान को कैद कर सकते है । अब ऐसे ही काफिरों की चिल्ल-पों पर कान देने लगेंगे तो हो चुका ज़िहाद और बन चुका पाकिस्तान मुस्लिम देशों का सरदार । अब देखिए इतने सबूत थे डा0 अब्दुल कादिर खां साहब के खिलाफ, अमरीका पीछा पड़ा हुआ था कि उन्होंने ही लीबिया, ईरान जैसे मुल्कों को परमाणु तकनीकि मुहैया करायी थी, तो क्या हम हमारे मुल्क के महान साइंसदान को तिल तिल कर मरने के लिए सी. आई. ए. को सुपुर्द कर देते । फिर हुजूर क्या कोई मुल्क अपने बहादुर सिपाहियों पर इसलिए मुकद्दमा चलाता है कि उसने दुश्मनों को हलाक किया था । भारत के लिए हाफिज साहब भले ही अपराधी हो लेकिन हमारे लिए तो वो इस्लाम का परचम लहराने वाले एक बहादुर सिपाही हैं और पूरे मुल्क को उन पर नाज़ है । मुल्क की भलाई के लिए और ज़िहाद के झंडे को ऊंचा बनाये रखने के लिए मैं इस अदालत से दरख्वास्त करता हूं कि इस महान शख्सियत और सिपाही को इस अदालत से बाइज्ज़त बरी किया जाये ।

जज: सरकारी वकील को और कुछ कहना है ।

सरकारी वकील : नहीं हुजूर । आप जैसा मुनासिब समझें फैसला सुनाएं ।

तभी अदालत का एक कर्मचारी आकर जज के कान में कुछ कहता है ।

कर्मचारी : हुजूर, बलुचिस्तान से मुल्ला उमर और लादेन साहब का तार आया है कि हाफिज साहब को ज़िहाद का परचम लहराने के लिए जल्द से जल्द रिहा किया जाये ।

जज : अच्छा, अच्छा ।

जज : दानों तरफ की दलीलों को सुनने के बाद और पेश किये गये चंद रद्दी सबूतों को देखने के बाद ये अदालत इस फैसल पर पहुंची है कि मुलजिम हाफिज सईद कतई गुनेहगार नहीं हैं और चूंकि भारत  के कानून पाकिस्तान में लागू नहीं होते हैं और कोई भी मुल्क अपने  सिपाहियों को बहादुरी के एवज में उन्हें इनामों से नवाज़ता है नाकि उनको सजा सुनाता है इसलिए ये अदालत इस्लाम और मुल्क के आला सिपाही हाफिज सईद साहब को बाइज्ज़त बरी करती है ।

भीड़ : मुबारक हो, मुबारक हो ।

पत्रकार : हाफिज साहब अब आप आज़ाद हैं । सबसे पहला काम अब आप कौन सा करेंगे ।

हाफिज सईद : बहुत दिन हो गये किसी काफिर का कत्ल किये हुए और कमसिन कश्मीरी सेब दांतो से काटे हुए । कुछ दिन मुज्ज़फराबाद में रह कर पहले शरीर की थकान उतारूंगा उसके बाद कश्मीर की आज़ादी के लिए फिर से ज़िहाद शुरू करूंगा । अच्छा खुदा हाफिज ।

Posted in अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं, आतंकवाद, कार्टून, पाकिस्तान, भ्रष्टाचार, मीडिया, युद्ध, हिन्दी हास्य व्यंग्य | Tagged: , , , , , , , , , , , , | 8 Comments »

भारतीय वायुसेना को मिली गिद्ध दृष्टि (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on May 27, 2009

=>सर जी! ये रहा पूरी पाक वायुसेना का इस्तीफा । भारत के पास अवाक्स आने के बाद अब अपना कोई भी लड़ाकू जहाज सीमा पार से सही सलामत वापस लौटने से रहा । या फिर आप कहो तो अपने सभी जेट फाइटर्स को पेसेंजर प्लेन में तब्दील करवा दें । टूरिज़्म को बढावा मिलेगा,  चार पैसे भी मिल जायेंगे और अमेरिका से भीख भी नहीं मांगनी पड़ेगी ।

एक लम्बी जद्दोज़हद के बाद भारत को आखिर ‘अवास्क’ मिल ही गया । दुनिया के तमाम देशों ने,  यहां तक कि अमेरिका ने भी हमें ठेंगा दिखा दिया था लेकिन आखिर में हमारी मेहनत रंग लायी और हमें हमारा पहला ‘अवाक्स’ रडार मिल गया । इज्ऱाइल से 1-1 अरब डालर में 3 अवाक्स रडारों का सौदा हुआ । इन रडारों को रूस के तगड़े मालवाहक जहाज आई. एल. -76 पर लगाकर तैयार किया जायेगा हमारा पहला गिद्ध दृष्टि वाला बाज ‘अवाक्स’ । 2010 तक भारतीय वायुसेना को बाकी 2 और अवाक्स रडार मिल जायेंगे । 3 और अवाक्स रडारों की खरीद के लिए अभी बातचीत चल रही है । बाद में इसे भारत में ही विकसित किया जाने लगेगा ।

क्या है अवाक्स ? अवाक्स का पूरा नाम है ‘एयर बोर्न वार्निंग एण्ड कंट्रोल सिस्टम’ । ये एक प्रकार का रडार होता है जो कि बोइंग साइज़ हवाई जहाज की पीठ पर लगाया जाता है । फिलहाल ऐसा रडार कुछ गिने चुने देशों के ही पास है । दक्षिण एशिया में भारत पहला देश होगा जिसके पास ऐसा रडार है ।

अवाक्स के आने से भारतीय वायुसीमा ज्यादा सुरक्षित हो जायेगी और किसी भी प्रकार के वायु हमले को हम बहुत पहले ही पहचान कर नष्ट कर देंगे । ज़ाहिर है इसके आने से हमारे पारंपरिक शत्रु पाकिस्तान की नींद हराम हो जायेगी क्योंकि अब वह हमला करने के पहले सौ बार सोचेगा । वैसे पाकिस्तानी फौज को अल्जाईमर्स की बीमारी है । हर युद्ध में बल भर लात खाने के बाद भी वह सुधरती नहीं और अगली बार किस तरह से भारतीय सेना के हाथों बेइज्ज़त होना है इसकी तैयारी शुरू कर देती है । अब कुत्ते की पूंछ को कोई दोष दे सकता है । पतंगे हैं, जानते है कि शमा के पास जायेंगे तो जल भुन कर राख हो जायेंगे लेकिन क्या करें,  आदत से बाज़ थोड़े ही आयेंगे । जेनेटिकल प्राब्लम है । मो0 अली जिन्ना में थी इसलिए उनके लायक वशंजों में भी है ।

एक अवाक्स रडार 400 कि.मी. तक बड़ी बारीक नज़र रख सकता है । 400 कि.मी. के दायरे में उड़ने वाला कोई भी यान इसकी नज़र से बच नहीं सकता । अवाक्स पल भर में बता देता है कि कौन सा विमान दुश्मन देश का है और कौन सा अपने देश का । विमान किस कम्पनी का है,  मालवाहक है या यात्री विमान या फिर युद्धक विमान । यहां तक कि ब्लास्टिक मिसाइलें और क्रूज़ मिसाइलें भी इसकी नज़रों को धोखा नहीं दे सकतीं । पाकिस्तानी सब सोनिक क्रूज़ मिसाइल ‘बाबर’  अब भारत की वायु सीमा में प्रवेश करते ही गिरा दी जायेगी । अवाक्स एक साथ 400 निशानों पर निगाह रख सकता है और 60 निशानों पर एक साथ हमला कर सकता है । इसको दुबारा ईंधन भरने के लिए जल्दी ज़मीन पर आने की भी जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि इसमें हवा में ही ईंधन भरने की सुविधा है । बड़ी जल्दी ही इसको भारत के पहले सैन्य उपग्रह से जोड़ दिया जायेगा तब इसकी क्षमता में और वृद्धि हो जायेगी ।

मित्रों,   हमारे परम शत्रु पाकिस्तान की एक सबसे बड़ी कमज़ोरी है उसकी भौगोलिक स्थिति । पाकिस्तान की चैड़ाई मात्र 400 से 500 कि.मी. है । इसके अलावा पाकिस्तान के सभी समृद्ध और बड़े शहर कराची से लकर पेशावर तक सिर्फ एक 150 कि.मी. की पतली सी पट्टी में ही सिमटे हुए हैं । इसीलिए दुनिया भर के युद्ध विशेषज्ञ ये मानते हैं कि अगर भारत पाकिस्तान को मटियामेट करना चाहे,  वह भी बिना आणविक हथियारों के तो भी उसको मुश्किल से 7 से 10 दिन ही लगेंगे । वज़ह साफ है । हमको सिर्फ 150 कि.मी. की पतली पट्टी पर कब्ज़ा करना होगा । पाकिस्तान ये बात अच्छी तरह से जानता है । इसलिए वह अपना मुख्य युद्धक विमान एफ-16 इरान की सीमा से सटे शहर चगाई,  बलुचिस्तान में रखता है । वह भली भांति जानता है कि भारत से लड़ेगें तो फ़ना फ़िल्ला हो जायेंगे । लेकिन वो बेचारा भी क्या करे । जिन्ना साहब उसे एक अनुवाशिंक बीमारी दे गये हैं भारत से लड़ते रहने की । प्यारे पड़ौसी,   सुबह-शाम प्राणायाम किया करो । इससे सभी प्रकार की बीमारियां ठीक हो जाती हैं । तुम्हारी भी ठीक हो जायेंगी । अब देखो न आतंकवाद की जो विष बेल तुमने हमारे लिए लगाई थी वो अब तुम्ही को जकड़ कर तुम्हारा खून पी रही है । दसियों लाख स्वात निवासी आज शरणार्थी  बने दर दर की ठोकरें खाते घूम रहे हैं ।  आधा पाकिस्तान गृहयुद्ध की आग में जल भुन कर भुट्टा हो गया है । तुमने तो पड़ौसी की एक आंख फोड़ने के लिए अपनी दोनो ही आंखें फोड़ लीं ।

Posted in अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं, अवाक्स रडार, आतंकवाद, कार्टून, पाकिस्तान, भारत, युद्ध, राष्ट्रीय, हिन्दी हास्य व्यंग्य, cartoon, Hasya Vyangya, Humor | Tagged: , , , , , , , , , , | 6 Comments »

उत्तर कोरिया ने फिर किया परमाणु परीक्षण (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on May 26, 2009

यह लेख ट्रांसफर कर दिया गया है एक नई साईट पर. पढने के लिए नीचे क्लीक करें.

उत्तर कोरिया का हाईड्रोजनबम के बाद मिसाइल धमाका.

Posted in अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं, आतंकवाद, कार्टून, पाकिस्तान, भ्रष्टाचार, युद्ध, राजनैतिक विसंगतियों, हिन्दी हास्य व्यंग्य, cartoon, Hasya Vyangya, Humor | Tagged: , , , , , | 3 Comments »

मान गया पाकिस्तान (व्यंग्य, कार्टून)

Posted by K M Mishra on May 13, 2009

=>पाकिस्तान को भारत से कोई खतरा नहीं है । हमें खतरा पाकिस्तान में फल-फूल रहे आतंकवादियों से है । – पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ।

=>मियां जरदारी साहब, ये तो हमको बहुत पहले से मालूम है कि पाकिस्तान को भारत से कोई खतरा नहीं है, बल्कि भारत को ही हमेशा पाकिस्तान से हमले का डर सताता रहता है । इतिहास गवाह है सन 47, 65, 71 और 99 में युद्ध आपने ही शुरू किये थे । हमें तो मजबूरन अपनी रक्षा में आपको लतियाना पड़ा था । खैर देर आये दुरूस्त आये । देखते हैं कितने दिनों तक आपकी बुद्धि सही सलामत रहती है । अल्ला ताला आपके होश-हवास पाकिस्तान में भी दुरूस्त रखे । आमीन ।

Posted in अन्तर्राष्ट्रीय घटनाओं, आतंकवाद, कार्टून, पाकिस्तान, भारत, भ्रष्टाचार, मीडिया, युद्ध, राजनैतिक विसंगतियों, राष्ट्रीय, सामाजिक, cartoon, Hasya Vyangya, Humor | Tagged: , , , , , , , , , , , , , | 2 Comments »