सुदर्शन

जग बौराना : शहीदों के कफनखसोट

Posted by K M Mishra on October 31, 2010


लेखक: श्री नरेश मिश्र

साधो, ताली बजा कर इस सीनरी का स्वागत करो । देश के विकास का सब्जबाग दिखाने वाली कांग्रेस ने जनता के सामने मुखौटा हटा कर अपनी असली शक्ल दिखा दी । मैडम सोनिया गांधी ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को मौत का सौदागर कहा था तो सारे कांग्रेसी चारण उनके अंदाजेबयां पर सौ जान से कुर्बान हो गये थे । यह बात दीगर है कि गुजरात की जनता को उनका बयान पसंद नहीं आया। उसने चुनाव में कांग्रेस को चारों खाने चित्त कर दिया ।

अब महाराष्ट्र मे बोतल से कांग्रेस का जिन्न बाहर निकल आया है । बोतल का ढक्कन तो उसी दिन खुल गया था जिस दिन महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष माणिक राव ने कैमरे पर कबूल किया था कि सोनियाजी की वर्धा रैली के लिये महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से दो करोड़ की वसूली की गयी । चव्हाण ने कांख कांख कर कांग्रेस को दो करोड़ का यह जजिया अदा दिया ।

 

मीडिया में यह बातचीत उछली तो कांग्रेस हाईकमान ने माणिकराव को दिल्ली तलब कर लिया । शायद उन्हें आगाह किया गया कि कांग्रेस को इस तरह जनता के सामने बेपर्दा करना बेजा हरकत है । माणिक राव बात करने से पहले आस-पास नजर डाल लिया करें । दीवारों के भी कान होते हैं । कैमरा दीवार से ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि उसकी आंख भी होती है । वह सिर्फ सुनता ही नहीं देखता भी है ।

देशवासियों को बताया गया कि इस मामले में गहराई से जांच हो रही है । जांच का बहाना जरूरी था । बिहार में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं । इसलिये मुर्दे को कालीन में छिपा कर रखने में ही दानिशमंदी थी । लेकिन मुर्दा तो मुर्दा ठहरा । उसे नजरों से छिपाया जा सकता है लेकिन उसकी गंध पर काबू नहीं पाया जा सकता । गरज ये कि गंध बेपनाह उड़ कर देशवासियों के नथुने में भर गयी ।

 

मामला मुंबई के कोलाबा स्थित आदर्श हाउसिंग सोसायटी का है । जिस जमीन पर सोसायटी ने इमारत खड़ी की वह पहले रक्षा विभाग के कब्जे में थी । उसे पहले फौजी अफसरों और नेताओं ने सेना के अधिकार से मुक्त कराया । इस नापाक गठजोड़ का सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ । इस जमीन पर कारगिल युद्ध के शहीदों की विधवाओं को बसाने के लिये छः मंजिली इमारत का प्रस्ताव पास कराया गया । कुदरत के करिश्में से छः मंजिल की यही इमारत आसमान की तरफ उठने लगी और 31 मंजिल पर आकर रूकी ।

इस इमारत में फ्लैटों पर काबिज महान विभूतियों के नाम सुनकर चौंकने की जरूरत नहीं है । इन फ्लैटों पर मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण की सास, उनकी बहू और दूसरे रिश्तेदारों को कब्जा मिला । स्थल सेना के पूर्व कमाण्डर इन चीफ दीपक कपूर, नेवी के बड़े एडमिरल और दूसरे सैनिक अफसरों को भी फ्लैट बांटे गये । कांग्रेस के विधायकों को भी इस लूट में हिस्सा मिला । शिवसेना के एक नेता को भी इस डकैती पर जबान बंद रखने के लिये हिस्सा दिया गया । डकैती के बचे खुचे माल को मालदार नागरिकों ने आपास में बांट लिया । इस इमारत की तामीर में कारगिल शहीदों का नाम भुनाया गया । इन शहीदों की विधवाओं को एक भी फ्लैट नहीं दिया गया ।

बुरा हो मीडिया का, उसने मुख्यमंत्री को बेनकाब कर दिया । अब कांग्रेस का असली चेहरा देख कर देशवासी दंग है । नरेन्द्र मोदी तो कांग्रेस की डिक्शनरी में मौत के सौदागर हैं लेकिन कांग्रेस क्या है । क्या उसे शहीदों के कफनचोर या कफनखसोट की संज्ञा देने में कोई हर्ज है । जिन शहीदों को कमांडर इन चीफ दीपक कपूर ने चुस्त सलामी दी थी क्या उनके परिवारजनों के साथ यही सलूक होना चाहिये था ।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की नजर में देश की कौन सी शक्ल है । उनके देश की सीमा उनकी सास, बहू और चंद विधायकों पर जाकर खत्म हो जाती है । महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कोयी अनहोनी नहीं की है । उनके पहले पूर्व केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री सतीश शर्मा अपने रिश्तेदारों, चापलूसों, नौकर-चाकर, ड्राइवरों तक को पेट्रोल पंप बांट कर सही रास्ता दिखा चुके हैं । अशोक चव्हाण तो कांग्रेस द्वारा दिखाये रास्ते पर चल रहे हैं ।

साधो, एक झूठ को छिपाने के लिये हजार झूठ बोलना सियासी परंपरा है । अशोक चव्हाण ने जो सफाई दी वह काबिले गौर है । उन्होंने बताया आदर्श हाउसिंग सोसायटी को मंजूरी देते वक्त वे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री नहीं थे । इस सादगी पर कौन न मर जाये ए खुदा । अशोक चव्हाण मुख्यमंत्री नहीं थे तो क्या वे कांग्रेस के मंत्री भी नहीं थे । कांग्रेस बड़ी पार्टी है । हाथ की सफाई दिखाना, लम्बे हाथ मारना कांग्रेस की आदत, इसीलिये तो हाथ के पंजे को कांग्रेस का चुनाव चिन्ह बनाया गया है । कांग्रेस के फौलादी पंजों में देशवासियों की गर्दन जकड़ी है । राम भली करें, देश बच जाये तो अल्ला मियां का शुक्रगुजार होना चाहिये ।

साधो, अभी तुमने क्या देखा है । 70000 करोड़ के कामनवेल्थ गेम्स घोटला का असली चेहरा देखोगे तो तुम्हारी अक्ल शीर्षासन करने लगेगी ।शक सिर्फ यह है कि जो महकमें इस घोटाले की जांच कर रहे हैं अपना फर्ज निभायेंगे या नहीं ।

अशोक चव्हाण का चेहरा देख कर हमें कवि जगन्नाथदास रत्नाकर की लंबी कविता ‘सत्य हरीश्चन्द्र’ का एक अंश याद आ गया जो इस प्रकार है –

कीन्हे कम्बल बसन तथा लीन्हें लाठी कर ।
सत्यव्रती हरिचंद हुते टहरत मरघट पर ।
कहत पुकार पुकार बिना कर कफन चुकाये ।
करहि क्रिया जनि कोउ सबहिं हम देत बताये ।

सत्यवादी राजा हरीशचन्द्र ने अपना कर्तव्य निभाने के लिये जहां अपनी रानी से बेटे के कफन का टुकड़ा कर में लिया था वहीं आज के राजा अशोक चव्हाण तो हरीशचन्द्र के भी नगड़ दादा निकले । उन्होंने कारगिल शहीदों का कफन खसोट लिया । उन्हें यह धत् कर्म करने में कोयी शर्म महसूस नहीं हुयी ।

5 Responses to “जग बौराना : शहीदों के कफनखसोट”

  1. प्रवीण पाण्डेय said

    राजनीति में नैतिकता सर्वोच्च स्तर की होनी चाहिये।

  2. adidas said

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