सुदर्शन

ट्रैक्टर की सवारी ।

Posted by K M Mishra on September 7, 2010

यह व्यंग्य लेख एक दूसरी  साईट पर ट्रान्सफर कर दिया गया है. लेख पढने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.

ट्रैक्टर की सवारी

7 Responses to “ट्रैक्टर की सवारी ।”

  1. प्रवीण पाण्डेय said

    ट्रैक्टर में की है और उसकी ट्रॉली में भी की है। जब भी की है, घर आकर सो गये हैं।

  2. arvind mishra said

    साईकिल पर नौसिखिये का चढना आसान उतरन मुश्किल ..लगे हाथ बालू ईंट उतारने के बाद ट्रक के पीछे चढ़ने और ड्राईवर द्वारा ट्रक न रोकने का मंजर बयां करना था : )

  3. ऐसा खतरनाक टाइप का शौक पालते हैं आप? इन ड्राइवर साहब को तो कॉमन वेल्थ गेम में भेंजना चाहिए।

  4. गिरिजेश राव said

    @ कुछ चिल्लाते हुये लड़कों को देखा तो मन ही मन हंसे होंगे – वाक्य ठीक कीजिए। गधों की अच्छी समझ है।

    भोर में नींद खुल गई है। इस समय हास्य व्यंग्य पढ़ने का मेरा पहला अनुभव है। हँसते हुए भी हँस नहीं पा रहा क्यों कि ब्लॉगरी को लेकर मलिकाइन का शक पुख्ता हो जाएगा।

    बहुत सारा इकठ्ठा हो गया है। फुरसत से बाँचते हैं। चलें शवासन करने। हास्य व्यंग्य पढ़ने की यह बेला नहीं है।

  5. I saw something about this topic on TV last night. Nice post.

  6. हास्य व्यंग्य पढ़ने का मेरा पहला अनुभव है। हँसते हुए भी हँस नहीं पा रहा क्यों कि ब्लॉगरी को लेकर मलिकाइन का शक पुख्ता हो जाएगा।

    बहुत सारा इकठ्ठा हो गया है। फुरसत से बाँचते हैं। चलें शवासन करने। हास्य व्यंग्य पढ़ने

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