सुदर्शन

मंहगाई का तोड़ (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on November 23, 2009

आदमी क्या खाये और क्या पीये ? मंहगाई सुरसा चाची के मुंह से भी बड़ा मुंह फाड़ती जा रही है । इसके मुंह से सिर्फ ‘अति लघुरूप’ (अत्यंत गरीब) में विचरने वाले ही बच सकते हैं या फिर ‘कनक भूधराकार सरीरा’ वाले (सोने से मढ़े हुये लोग)। नीची उड़ान उड़ने वाले मध्यमवर्ग की छाया पकड़ कर ये उन्हें पीस कर खाती जा रही है । साल भर के अंदर गेंहू, चावल, दाल, फल, सब्जी सब आसमान में पहुंच गये । मुद्रस्फीति की दर राजा बलि का सिर हो गयी और मंहगाई वामन महाराज का पैर ।=>
=>अबे इत्ते वड्डे वड्डे आंसू क्यूं बहा रहा है । लगन का सीजन आ गया है । सूट ड्राइक्लीन करवा कर कोट की ऊपरी जेब में एक रंगीन लिफाफा सजा ले और किसी भी बारात में घुस जा । जाकर विथ फैमिली जितनी मर्जी करे उतनी दाल पी । जेबों में सलाद भर ले । लेडीज पर्स में पुलाव भरवा ले । मोजों में फ्रूट चाट घुसेड़ ले और टाई में रसगुल्ले ठूंस ले । और अब भी जी न भरे तो पन्नी में कचौड़ियां और मिक्स पनीर का भगौना उड़ेता चल । बसिअउटा खाने का मजा ही कुछ और होता है । ये सारी चीजें मात्र 51 रू0 में उपलब्ध हैं । फालतू में मंहगाई का मुंह इंचीटेप से नाप रहा है । नेताओं से हराम का माल खाना सीख ले, सुखी रहेगा ।

14 Responses to “मंहगाई का तोड़ (व्यंग्य/कार्टून)”

  1. वाह भाई वाह! जोरदार आइडिया सुझाया है। लगता है पूरी तरह आजमा कर जारी किया गया नुस्खा है। इसे पेटेन्ट करा लीजिए।🙂

  2. वाह भाई वाह! जोरदार आइडिया सुझाया है।
    लगता है पूरी तरह आजमा कर जारी किया गया नुस्खा है।
    इसे पेटेन्ट करा लीजिए।🙂

  3. K M Mishra said

    जो बोले सो कुण्डी खोले !

  4. K M Mishra said

    EE idea Madhu Koda Ji se liya gaya hai.

  5. venus kesari said

    ठीक है तैयारी शुरु कर देते है

  6. हा हा हा, पहले पता था कि नेता लोग बहुत खब्‍बू होते है, बाद में पता चला कि खब्‍बू बाये हाथ से काम करने वाले को कहते है।🙂

  7. इलाहबाद जाकर ई आईडिया ट्राई करते हैं….:-)

  8. ई जो तनखाह बढ़ के अचानक डेढ़ा दूना हो गई है ऊ पैसवा आवेगा कहाँ से? कुबेर महराज के इहाँ से?
    अरे भाई नुस्खा किलियर है। एक हाथ दे दूजी से ले।
    … सबसे बढ़िया दाल खाना छोड़ दें – यूरिक एसिड बढ़ता है।
    चीनी खाना छोड़ दें – डायबीटिज होती है।

    जीना छोड़ दें – प्रदूषण फैलता है।

  9. K M Mishra said

    सबसे बढ़िया दाल खाना छोड़ दें – यूरिक एसिड बढ़ता है।
    चीनी खाना छोड़ दें – डायबीटिज होती है।

    जीना छोड़ दें – प्रदूषण फैलता है।

    हैं! बताओ हमें पता ही नहीं था कि सरकार हमारा कित्ता ख्याल रखती है । आम आदमी की इस सरकारी एहसान के बोझ के तले तो साली पूरी गृहस्थी पिसी जा रही है । एक दिन सहियए में इस ऋण से उऋण् होने के लिये प्राण विसर्जित करने पडेंगे ।

  10. sharad said

    haan ab hume bhi yahi try karna hoga tabhi kuch ho sakta hai….nhi i to a
    aise gujara nhi hone wala.

  11. rajesh rana said

    yaa anyone want to try it.then it is good . beacause nobody want to commprise with anything .so this is the right way .to go forward.t kyoki isse p aisa bhi rahega aur izzat bhi…

  12. sksinha said

    Mishra ji aap ke vyang bade hi achhe lage mujhe.

  13. very said

    I simply couldn’t leave your web site before suggesting that I actually loved the quality data a person provide for your guests? Is gonna be back continuously to test up on new posts

  14. Hemant Mehra said

    “जेबों में सलाद भर ले । लेडीज पर्स में पुलाव भरवा ले । मोजों में फ्रूट चाट घुसेड़ ले और टाई में रसगुल्ले ठूंस ले” ।हा हा हा. हंसा हंसा के पेट दर्द करवा दिया आपने. क्या धासुं आइडिया दिया है.

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