सुदर्शन

हमीं से मोहब्बत, हमीं से लड़ाई ……..(व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on November 18, 2009


वही हो रहा है मित्रों जिसका मुझे डर था । शांति का नोबेल भारत को भारी पड़ने जा रहा है । मियां ओबामा न्यूक्लियर डील के बाद भी अपनी आंखों के मोतियाबिंद से छुटकारा नहीं पा सके हैं । डील के एक साल बाद अचानक उन्होंने भारत से परमाणु अप्रसार पर आश्वासन पत्र की मांग कर डाली। भारत का परमाणु अप्रसार में अब तक का बेदाग रिकार्ड उनकी आंखों के मोतियाबिंद ने छिपा दिया । मियाँ ओबामा, अमेरिकी सरकार आज भी आई.एस.आई जो कि पूरी दुनिया में फैले आतंकवादियों की घोषित मालकिन है को गुप्त रूप से धन मुहैया कराती है, उससे आज तक कोई आश्वासन पत्र नहीं प्राप्त कर सकी और हम जो कि विश्व शांति के सबसे ऊंचे एफिल टावर है सो तुम्हें दिखाई नहीं पड़ रहा है । गांधी के भारत के साथ ऐसा सलूक । धन्य हो तुम और तुम्हारी चिरकुटई । चित्थड़ कहीं के, तुम्हें शांति के नोबेल का मोतियाबिंद हुआ है, जिसका कोई इलाज नहीं । ओबामा मियां, तुम शांति के नोबेल की झाड़ पर ज्यादा दिन नहीं टिक पाओगे और जल्द ही मुंह के बल अफ्गानिस्तान, पाकिस्तान में ढेर पड़े मिलोगे ।

शांति के नोबेल का साईड इफैक्ट अब नजर आने लगा है । ओबामा आजकल चीन की यात्रा पर हैं । चीन के नाम से आजकल बड़े बड़ों की पेंट गीली हो जा रही है । ओबामा ठहरे वैसे ही शांति के पुजारी । एक बयान में तिब्बत की दिक्कत को सुलटा दिया । ”तिब्बत चीन का हिस्सा है और दलाई लामा को चीन के साथ बैठ कर सब मसले सुलटा लेने चाहिये ।” प्राचीन काल के संतों वाली मोहक अदाएं । एक डायलॉग बोला और हो गया दुष्ट का हृदय परिवर्तन । बीजिंग से आया ओबामा का यह बयान दुष्ट दलाईलामा का हृदय परिवर्तन कर देगा । आक्रमणकारी चीन ने तिब्बत हड़प लिया तो क्या हुआ । समरथ को नाहीं दोष गुसाईं । विश्व शांति के लिये बड़ी-बड़ी कीमतें चुकानी पड़ती हैं । अबकी कीमत चुकाने की बारी दलाईलामा की है । दबंगों ने एक गरीब, दुखियारी माँ का अपहरण कर लिया तो शांति के पुजारी उसके रोते बच्चे को विश्व शांति की नसीहत देकर चुप करा रहे हैं । ओबामा तुम टुन्न हो गये हो शांति के नोबेल की शराब से । जब तक किसी नाली में नहीं गिरोगे तब तक इसका हैंगओवर बना रहेगा ।

ओबामा के राष्ट्रपति बनने से पहले बड़े हल्ले थे । बड़ी उम्मीदें थीं कि जो गंदगी जार्ज बुश पूरी दुनिया में फैला कर गये हैं शायद ओबामा उसे साफ कर सकें । शुरू शुरू में ऐसा लग भी रहा था । लेकिन शांति का नोबेल लग रहा है सारा खेल ही चौपट कर डालेगा । नवजात ओबामा के सकुमार कंधों पर इत्ता भारी बोझ । कदम डगमागने लगे हैं । तिब्बत चीन का हिस्सा है, भारत से परमाणु अप्रसार के लिये आश्वासन पत्र की मांग, अफ्गानिस्तान में नर्म तालिबानियों की तरफ झुकाव ये सब शांति के नोबेल की करतूत है ।

जल्द ही मनमोहन सिंह ओबामा के सरकारी मेहमान बनने जा रहे हैं । मनमोहन के एजेंडे में इस्तेमाल हो चुके यूरेनियम के पुनर्संस्करण की तकनीकी हासिल करना है और ओबामा के एजेंडे में भारत को ठेंगा दिखाना है । मुझको लगता है कि आश्वासन पत्र की मांग भारत पर प्रेशर बनाने के लिये की जा रही बार्गेनिंग भर है । बना लो प्रेशर । यहां तो एन.एस.जी. से छूट मिलते ही भारत सरकार ने न्यूक्लियर डील की हांडी आधे दर्जन देशों के साथ चढ़ा ली है । तुम नहीं सनम, कोई और सही । रानी रूठेगी तो अपना ही सुहाग लेगी । डील नहीं होगी तो तुम्हारी ही कम्पनियां बैठ कर टापेंगी । और अच्छा ही है कि यह डील न हो क्योंकि हमारे वैज्ञानिक हैवी वॉटर रियेक्टर और लाइट वॉटर रियेक्टर दोनों ही प्रकार के न्यूक्लियर रियेक्ट बनाने में सक्षम हैं । पूर्ण स्वेदेशी न्यूक्लियर सबमरीन आई. एन. एस. अरिहंत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है । रही सही कसर हम रूस और फ्रांस से तकनीकी सहयोग लेकर पूरी कर लेंगे । रही यूरेनियम की उपलब्धता की बात तो लाखों टन यूरेनियम मेघालय और राजस्थान मे पड़ा हुआ है । भारत में किसी चीज की कमी नहीं है प्यारे ओबामा । बस नेताओं को कमीशन खाने का रोग लगा हुआ है । यही हमारी सबसे बड़ी दिक्कत है ।

<=ओबामा के राष्ट्रपति बनने से पहले बड़े हल्ले थे । लेकिन अब इनके लच्छन देख कर अवधी की एक कहावत याद आती है ''रात भर सोहर गायेन । सवेरे देखे तो बेटवा के औजारय नाहीं ।''

5 Responses to “हमीं से मोहब्बत, हमीं से लड़ाई ……..(व्यंग्य/कार्टून)”

  1. रात भर सोहर गायेन । सवेरे देखे तो बेटवा के औजारय नाहीं ye gajab hai

  2. बहुत शानदार लेखन। अवधी कहावत तो कमाल की है। एक दममस्त। अभी भी गुदगुदी लग रही है।
    यह ओबामा तो एकदम प‍इया निकला। लामबन्दों के आगे घुटना टेक चुका है। पहली बार अमेरिकियों ने इतना बड़ा ब्लण्डर किया अपने चुनाव में।

  3. As the Cherry Blossom season coincides with both the fiscal and calendar years in Japan, it marks the arrival of new beginnings – students start their first
    day of school and new employees start their first day of work.
    The king forbade spinning on distaff or spindle, or the possession of one, upon pain of death, throughout the kingdom,
    but all in vain. But one drawback is that hair will grow back quite fast as the cr.

  4. Hi to every one, the contents present at this web page are
    truly remarkable for people knowledge, well, keep up the good work fellows.

  5. great site man

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