सुदर्शन

पाकिस्तान के सत्य की जीत । (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on September 27, 2009

नवरात्र के नौ दिन अत्यंत शुभ और चमत्कारी होते हैं । श्रध्दालु नौ दिन व्रत रखते हैं, देवी का पाठ करते हैं और मनमांगी मुराद पाते हैं । दशहरा असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक माना जाता है । जो सत्य पर डटा रहता है उसकी विजय निश्चित है । महात्मा गांधी सत्य की माला जपते-जपते शहीद हो गये पर जितनी कद्र उनके सिध्दांतों की पड़ोसी दुश्मन देश पाकिस्तान ने की उसका चारआने भी अगर भारत सरकार ने की होती तो आज ये दिन न देखना पड़ता ।

पड़ोसी दुनिया जहान की फिक्र भुला कर सत्य पर डटा हुआ है । जो होगा देखा जायेगा । कोई गुनाह थोड़े ही कर रहे हैं । मुहब्बत और जंग में सब जायज होता है । हम न छोड़ेंगे सच का रास्ता, भले ही ये रास्ता कांटों भरे जंगल से गुजरता हो । दुनिया से जो उखाड़ते बने उखाड़ ले । डर-वर नहीं लगता है हमको सच बोलने से । साला एक झूठ के लिये हजार झूठ बोलने पड़ते हैं । झूठ बोल कर भी देख लिया । सौ स्टेटमेंट देने पड़ते हैं । अब झूठमूठ का कोई लफड़ा नहीं पालते हम लोग । सीधे सीधे सच का सामना करते हैं । इकदम खरा, 24 कैरेट सोने के माफिक सच । देशहित में हम दुनिया में आग लगा रहे हैं । पड़ोसी का घर फूंक रहे हैं । हथियार जमा कर रहे हैं । परमाणु बम की तकनीकि अपने जैसे हरामी मुल्कों को बेच रहे हैं । आतंक की सबसे बड़ी फैक्ट्री हमने सरकारी पैसे से लगाई है और माल सारी दुनिया में एक्सपोर्ट कर रहे हैं । इस्लाम का परचम लहराने के लिये और भी जो जरूरी होगा, वह भी करेंगे । आतंक फैलाना हमारा जन्मसिध्द अधिकार है । हमारा जन्म ही आतंक फैला कर हुआ था । जिन्ना ने डाइरेक्ट एक्शन लिया था हम डाइरेक्ट-इनडाइरेक्ट दोनो तरह से आतंक की फसल तैयार करते हैं । आतंक हमारा राष्ट्रीय उद्योग है । पब्लिक सेक्टर और प्राइवेट सेक्टर दोनो ही इस धंधे में लगे हुये हैं और जो इन दोनो में नहीं आते उनकी हम आतंक का लघु उद्योग लगाने में मदद करते हैं, न सिर्फ पाकिस्तान में बल्कि अफ्गानिस्तान, कश्मीर, सूडान, लीबिया, उत्तर कोरिया, तमाम गरीब अफ्रीकी देशों में । (अब क्या अपने ग्राहकों की पूरी लिस्ट ही आप को सौंप दें ।)

इधर एक हम हैं । सच भी ऐसे बोलेंगे जैसे झूठ बोल रहें हों । नजरें झुका कर । महीन दबी आवाज में । चोरों की तरह । बड़े मुल्कों की शर्ट खींच खींच कर बता रहे हैं – सर जी एक हमारा पड़ोसी मुल्क है । बड़ा बमबाज । रोज हमारे यहां बम फोड़ जाता है । उसको बोलिये कि शरीफों के मुहल्ले में ऐसी हरकत न किया करे । एटिकेट्स देखिये । दुश्मन मुल्क को दुश्मन तक न बोलेंगे और नाम भी ससुरे का जबान पर नहीं लायेंगे, जैसे शुध्द भारतीय पतिव्रताएं अपने भरतार का नाम जबान पर नहीं लेतीं बिल्कुल वैसे । भारत सरकार की हैसियत उस लड़की के बाप की है जिसकी नाबालिग लड़की को दबंगों ने उसके ही घर में घुस कर रेप किया हो और वो बेचारा कानून की दुहाई देता बलात्कार की मेडिकल रिपोर्ट लिये थाने में घूम रहा है । भारत सरकार भी क्या करे । पं0 नेहरू के पद चिन्हों पर भी तो चलना है । वो कश्मीर मामला यूएनओ की चौकी में ले गये थे । ये मुंबई हमाले के साक्ष्य दुनिया भर को कूरियर करते फिर रहे हैं । 1947 से 2009 तक के बलात् दुराचार की मेडिकल रिपोर्ट लिये दुनिया भर में घूम रहे हैं । हालत ये है कि बौना बंग्लादेश तक हमको कुछ नहीं समझता । पता करिये कहीं अब्दुल कादिर खान साहब ने परमाणु बम का फार्मूला शेख हसीना को भी तो नहीं सप्लाई कर दिया था । म्यांमार तो बम फोड़ने की दहलीज पर पहुंच भी चुका है ।

अब देखिये पाक की सीनाजोरी । जुलाई में राष्ट्रपति जरदारी ने कबूला था कि आतंकवादी हमारे ही पैदा किये हुये सांप हैं । इन्हें हमने भारत के लिये पाला था लेकिन अब ये हमारे लिये ही मुसीबत बने हुये हैं । पिछले महीने पूर्व राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ ने फरमाया कि हर अमेरिकी मदद का इस्तेमाल हम भारत के खिलाफ करते हैं । अमेरिका द्वारा दी गयी पोतभेदी हार्पून मिसाईल का जमीनी संस्करण तैयार करके पाकिस्तान ने अमेरिकी कानून की धज्जियां उड़ा दी । अभी परमाणु विज्ञानी अब्दुल कादिर खान का एक पुराना प्रेमपत्र प्रकाश में आया जो कि उन्होंने 2003 में अपनी पत्नी को लिखा था । इस पत्र में उन्होंने कुबूला था कि पाकिस्तान के परमाण्ाु अभियान में सबसे बड़ा मददगार चीन है । पाकिस्तान ने अपना पहला परमाणु परीक्षण सन 1989 में चीन में किया था । बाद में पाकिस्तान सरकार (मरहूम प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो) और पाक सेना ने परमाणु तकनीकि को इरान, उत्तर कोरिया, लीबिया जैसे दूसरे शांतिपरस्त देशों को बेच दिया था । इतने बड़े बड़े खुलासे । इतने महान सच दुनिया के सामने उद्धाटित हुये बस कुछ ही दिनों में । दुनिया, खासकर अमेरिका इस महान सच की रोशनी से अभिभूत हो गया । सत्यवादी पाकिस्तान की पीठ थपथपाने के लिये खुश होकर अमेरिकी संसद ने अगले पांच साल तक प्रतिवर्ष डेढ़ अरब डॉलर की अमेरिकी मदद वाले कानून को हरी झंडी दिखा दी । इसके अलावा अमेरिकी संसद ने युध्द कोष विधेयक के तहत 40 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद को भी मंजूरी दे दी ।

पाकिस्तान ने अपना सत्य ज्यादा जोरदार तरीके से रखा इसलिये अरबों डॉलर की अमेरिकी मदद उसे दे दी गयी । भारत सरकार ने अपना सत्य मनमोहनी कांग्रेसी तरीके से रखा इसलिये हमे एनपीटी की नसीहत दे दी गयी । वैसी ही नसीहत जैसी कि बलात्कार की शिकार लड़की के बाप को थाने में दी जाती है । गलती से इस बाप के पास अपनी लाइसेंसी बंदूक है इसलिये थानेदार उस बंदूक को थाने में जमा कराने पर भी जोर दे रहा है । गोलियां तो न्यूक्लियर डील में जमा ही करवा ली गयीं थी (न्यूक्लियर रियेक्टरर्स को सैन्य और असैन्य में विभाजित करवा कर ।) देखते हैं बंदूक कब तक बची रहती है ।

शुक्रिया, शुक्रिया हुजूरेआला । इन पैसों से हम आपके दुश्मनों की भी खबर लेंगे और अपने दुश्मनों की भी । =><

9 Responses to “पाकिस्तान के सत्य की जीत । (व्यंग्य/कार्टून)”

  1. Sanjay said

    Bhai Saheb, bahut sahi kaha aapne.

  2. Sanjay said

    माननीय मिश्रा जी, हम तो आप के पन्खा ही बन गये । आज कल *+ चैनल पर एक, हमेशा की तरह बेहूदा कार्यक्रम चल रहा है जिस मे उत्तम वधू की तलाश की जा रही है । अपने अन्दाज मे इस बारे मे लिखिये । आशा करता हू आपको लिखने का आनन्द आयेगा और हमे भी आनन्द की प्राप्ति हो जायेगी । विचार पसन्द आये तो गौर फ़र्माने की क्रपा कीजिये । अरे साहब, हम भी तो आप का लिखा खन्गालते-२ चलीसिया गये है ।
    सादर आपका
    सन्जय

  3. Badreesh Shukla said

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