सुदर्शन

हम संतन से का मतलब ! (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on September 26, 2009

_____________________________लेखक – नरेश मिश्र

चार कुकर्मी थे । निहायत नापाक । वारदात करने के बाद पुलिस से बचने के लिये चारों ने गेरूआबाना धारण किया । गेरूआ वस्त्र तमाम कुकर्मों को ढ़क लेता है ।चारों कुकर्मी संत बन कर तीर्थयात्रा पर निकल लिये । रास्तें में एक गांव के बाहर कुछ किसान एक साही को लाठियों से पीट रहे थे । उनकी लाठियाँ साही के कांटों पर गिर कर बेअसर हो रही थीं । किसान लाठी चलाकर पसीने से लथपथ हो गये । साही सिकुड़ी बैठी रही । चारों कुकर्मी संत बड़ी दिलचस्पी से किसानों की मशक्कत देख रहे थे । पहले के हत्यारे थे इसलिये उन्हें साही के मारे जाने का इंतजार था । साही नहीं मरी तो एक संत ने चिल्लाकर कहा ”नारायण, नारायण । साही मरे मूड़ के मारे । हम संतन से का मतलब ।” (साही सिर पर चोट करने से मरती है लेकिन हम संतन को इससे क्या मतलब)

किसान संत का इशारा समझ गये । उन्होंने साही के सिर पर लाठियों से चोट की । साही तड़प कर मर गयी । संत नारायण नाम का उच्चारण करते अपने रास्ते चले गये । उन्हें कोई पाप नहीं लगा ।

अपने इंडिया दैट इज भारत में ऐसे संतों की कमी नहीं है । एक ढूढ़ों हजार मिलते हैं । हाल ही में दिल्ली पुलिस ने एक कुख्यात नक्सली चिंतक, दार्शनिक को गिरफ्तार किया । ये महान बुध्दिजीवी इन दिनों तिहाड़ की सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं । केन्द्रीय मंत्री चिदंबरम ने तिहाड़ जेल का मुआयना किया । मुआयने के बाद वे इस जेल के इंतजामात से खुश नजर आये । हमारी उल्टी खोपड़ी में यह कीड़ा रेंग रहा है कि चिदंबरम के तिहाड़ मुआयने और माओवादी आइडियोलोग के उस जेल में रहने के बीच कोई अंदरूनी रिश्ता तो नहीं है । वैसे नक्सली बेहद खुंखार भेड़िये होते हैं । कांग्रेसी नेता व मंत्री भी इनसे खौफ खाते हैं । चिदंबरम शायद तिहाड़ मुआयने के जरिये नक्सलियों को यह संदेश देना चाहते हों कि उनके बुध्दिजीवी नेता खैरियत से हैं । उन्हें कोई तकलीफ नहीं है ।

छत्तीसगढ़ में तैनात कोबरा बटालियन ने दंतेवाड़ा में नक्सलियों को घेर कर उनका बड़ी तादद में सफाया कर दिया । घेराबन्दी के दौरान हथियार बनाने की एक फैक्ट्री भी पकड़ी गयी । यह खबर सुन कर हमें कोई अचरज नहीं हुआ । स्वावलंबन अच्छी बात है । चीन के मुकाबले हमारी हवाई सेना स्वालंबी हो न हो नक्सली तो अपनी लड़ाई के दौरान अपने पैरों पर खड़ा होना सीख गये हैं । चीन से बरास्ते नेपाल हथियार कहां तक मंगाते रहेंगे । आज नहीं तो कल इस देश पर नक्सलियों को ही हुकूमत करनी है । उन्हें हमारे देश की पुलिस और फौज से मुकाबला करने के लिये अपने ही कारखाने के हथियारों पर भरोसा करना होगा ।
जिन अक्लमंदों को हमारे लोकतंत्र की ताकत पर जरूरत से ज्यादा भरोसा है उन्हें चीन के इतिहास पर गौर करना चाहिये । चीन में माओ के हमले से पहले च्यांग-काइ-शेक की लोकतांत्रिक सरकार थी । माओ की चंगेजी सेना ने चीन की सरहद पार कर मुख्य भूमि पर हमला किया तो च्यांग-काइ-शेक बहुत लाल ताल हुये । उन्होंने बड़े गर्व से ऐलान किया कि चीन की लोकतांत्रिक सरकार आतंकवादियों का जोरदार मुकाबला कर उन्हें समुद्र में ढकेल देगी । माओ का तो कुछ नहीं बिगड़ा खुद च्यांग-काइ-शेक फना हो गये । जो मुल्क इतिहास से सबक नहीं सीखता उसे इतिहास सबक सिखाता है ।

अपने देश में माओवादियों के समर्थक तरह तरह के संत वेश धारण कर विचर रहे हैं । इसमें कुछ संत चिंतक, दार्शनिक मार्गदर्शक हैं । कुछ स्वंयसेवी संगठनों का चोला पहन कर मुल्क की जड़ों में मठा डाल रहे हैं । ऐसे ही देशद्रोहियों की छत्रछाया में माओवाद फल-फूल रहा है । एक टी.वी. चैनल पर बहस के दौरान माओवादी चिंतक वारवरा राव ने फरमाया कि क्रांतिकारियों को दुश्मन के खिलाफ जंग में हमेशा से खूंरेज कह कर बदनाम किया गया है । भगत सिंह को भी अंग्रेज खूनी और अपराधी कहते थे । इस बंदे का बयान सुन कर हमारे कान में खौलते तेल की धार पड़ गयी । हम सोचने लगे कि शहीदे आजम भगत सिंह तो ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लड़े थे । उन्होंने किसी हिन्दुस्तानी को भूल भी कर नहीं मारा था । तो इस पट्टे ने ऐसे महान शहीद का नाम अपने हक में क्यों भुनाना चाहा । फिर हमें जाट और तेली का किस्सा याद आया । जाट और तेली पड़ोसी थे । तेली ने कहा – ‘जाट रे जाट, तेरे सिर पर खाट ।’ जाट भुन्ना कर बोला – ‘तेली रे तेली, तेरे सिर पर कोल्हू ।’ तेली मुस्कुराया ‘जाट तूने कहावत तो कही लेकिन तुक नहीं बैठा । जाट छूटते ही बोला ‘तुक नहीं बैठा तो क्या हुआ । तेरे सिर पर खाट से ज्यादा वजन तो लद गया ।’
=>
शहीदे आजम भगत सिंह ने आज से 75 साल पहले ये तो अंदाजा लगा लिया था कि कल इस देश पर काले अंग्रेज राज करेंगे लेकिन पाकिस्तान और चीन की मदद से इस देश को तोड़ने वाले साम्यवादी गद्दारों के बारे में उन्हें अगर जरा भी अनुमान होता तो शायद वे फांसी का फंदा छोड़ कर भविष्य के इन देशद्रोहियों से निबटने के तरीके ढूंढते जो आज उनके नाम का भी बेजा इस्तेमाल करने से नहीं चूक रहे हैं ।

4 Responses to “हम संतन से का मतलब ! (व्यंग्य/कार्टून)”

  1. वर्वर राव के चेले बहुत हैं ब्लॉग जगत पर। पहले मल्ल युद्ध को उतर आते थे। आजकल पंजा नहीं लड़ाते। आस्तीन में मुस्कराते हैं कि ये मूर्ख क्या जानें साम्यवाद की महिमा!🙂

  2. यह रहे वर्वर!

  3. Amazing! Your blog has a ton comment posts. How did you get all of these people to look at your post I’m envious! I’m still learning all about blogs on the internet. I’m going to click on more articles on your blog to get a better understanding how to get more visable. Thanks!

  4. A very helpfull site – many thanks I wish you will not mind me writting about this post on my internet site I will also leave a linkback many thanks

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: