सुदर्शन

किफायत-शारी के सदके ।(व्यंग्य)

Posted by K M Mishra on September 18, 2009

लेखक – नरेश मिश्र

गांधी जी सरदार पटेल और महादेव भाई देसाई के साथ यरवदा जेल में बंदी थे । सरदार बापू के मुंहलगे थे । इसलिये उनसे मजाक करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते थे । बात गांधी जी की बकरी पर चल पड़ी । बापू ने गाय का दूध पीना बंद कर बकरी पर भरोसा किया था । सरदार ने कहा ”महादेव भाई, देश में यह चर्चा आम है कि गांधी जी की बकरी को काजू, किशमिश, मुनक्का और बादाम खिलाया जाता है ।” महादेव भाई मुस्कुराये ”अगर यह सच हो तो अपका इरादा क्या है ।” सरदार छूटते ही बोले ”मैंने तय किया है कि मैं भी बकरी का दूध पियूंगा । यही दूध पीने में किफायत शारी है ।” हम बापू और सरदार के इस मजाक की चर्चा यूं ही नहीं कर रहे हैं । हमें सोनिया जी और वली अहद राहुल जी के सफर याद आ रहे हैं ।

सोनिया जी ने इकनॉमी क्लास में हवाई यात्रा की तो वह मीडिया की सुर्खियाँ बन गयीं । मंत्रिमण्डल के एक सहयोगी शशि थरूर इकनॉमी क्लास को मवेशी दर्जा कहते हैं । अब सोनिया जी ही शशि थरूर को समझा सकती हैं कि वे मवेशी क्लास में सफर नहीं कर रहीं थीं । शशि थरूर की माने तो इस मुल्क में हजारों मवेशी हर रोज हवाई यात्रा करते हैं । कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी तो चार कदम और आगे बढ़ गये । उन्होंने एक टी.वी. चैनेल को छाती ठोंक कर बताया कि वे मालवाहक जहाज से भी सफर करने को तैयार हैं । वैसे कांग्रेस का माल बेहद कीमती होता है । हवाई कं0 ऐसे माल को बुक करने से पहले सौ बार सोचेगी ।

सोनिया जी की इकनॉमी क्लास यात्रा के लिये उनके आस पास की चार सीटें खाली रखी गयीं । हवाई कं0 वाले बता सकते हैं कि पांच इकनॉमी क्लास सीटों का कुल किराया बिजनेस क्लास की एक सीट से कम या है या ज्यादा । सरदार पटेल ने बकरी का दूध पीने का फैसला बेवजह नहीं लिया था । वे जानते थे कि अगली पीढ़ी में कांग्रेस की कमान युवराज राहुल गांधी संभालेंगे जो दिल्ली से लुधियाना तक शताब्दी रेल से सफर करेंगे । उनकी इस बेहद चालाकी भरी प्रायोजित यात्रा में चमचे टी.वी. चैनेल और चुकंदर पत्रकार साथ चलेंगे । इनका खर्च भी कांग्रेस को उठाना पड़ेगा । ये कदम-कदम पर युवराज राहुल की रेल यात्रा का ब्यौरा मीडिया के जरिये जनता को सुनाते रहेंगे । पिछली सदी में ब्रिटेन के युवराज प्रिंस ऑफ वेल्स भारत पधारे थे । उनकी इस यात्रा का देश के कोने कोने में विरोध हुआ था लेकिन अंग्रेजी मीडिया इस यात्रा की शोभा वर्णन करने में कलम तोड़ रहा था ।

फिलहाल देश की जनता को बरगलाने में कांग्रेस का जवाब नहीं है । कांग्रेस का जूठन भी चाणक्य को मिल जाता तो वे निहाल हो जाते । इन दिनों कांग्रेस पार्टी और उसके शासित प्रदेशों में किफायत-शारी का कोहराम मचा हुआ है । एक से बढ़ कर एक त्यागी सामने आ रहे हैं । सारे मंत्री तनख्वाह में बीस फीसदी कटौती का फैसला कर चुके हैं । मुल्क जानता है कि तनख्वाह से मंत्रियों और नौकरशाहों की सेहत मे सुधार नहीं होता । रिश्वत में कोई कटौती घोषित नहीं की गई है । सरकार के काम करने का यही तरीका है ।

अब राहुल बाबा की लुधियाना यात्रा का जायजा लें । वे हवा में उड़ते तो सुरक्षाबलों की तैनाती कम होती । वे जमीन से यात्रा कर रहे थे तो कदम-ब-कदम सुरक्षाबल तैनात किये गये । वापसी में कांग्रेसी कार्यक्रम के अन्तर्गत पथराव भी प्रायोजित किया गया । इस पथराव का आंखों देखा हाल एक चैनल ने दर्शकों को सनसनीखेज तरीके से सुनाया । इस कमन्टेटर को भी गुड वर्क के लिये कोई मोटा पारिश्रमिक तो मिला ही होगा । अब इस घटना की जांच के लिये पुलिस के आला अफसरान पब्लिक का काम छोड़ कर प्राथमिकता के आधार पर सिर खपा रहे हैं ।

अगर देशवासी भूल रहे हों तो हम बता दें कि हरियाणा में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं । मुख्यमंत्री हुड्डा को वोटों की भारी बारिश में नहाये बिना चैन कहाँ । विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस को अभी तक मुंह की खानी पड़ रही है । मंहगाई जनता की कमर तोड़ रही है । बेरोजगारी, मंदी से मुल्क के लोग परेशान हैं । भूखे बच्चे को भेड़िये का डर दिखा कर चुप कराने की कला में कांग्रेसी माहिर हैं । नारे गढ़ने में उसका जवाब नहीं । इंदिरा जी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था लेकिन गरीबी का भूत है कि आजतक देशवासियों के सिर से उतरने का नाम ही नहीं ले रहा ।

किफायत-शारी का ढोंग कांग्रेस की सियासत का नया दांव है । उम्मीद करनी चाहिये की देश के वोटर कांग्रेस पर तरस खायेंगे और उसे वोट करेंगे । बिचारे कांग्रेसी किफायत-शारी का ढोंग ही सही कुछ कर तो रहे हैं । दूसरी पार्टियों को तो पाखण्ड फैलाना भी नहीं आता । कांग्रेस की किफायत शारी पर शायर कह गये हैं –

इस सादगी पर कौन न मर जाये ए खुदा ।
लड़ते हैं मगर हाथ में तलवार भी नहीं ।

मुहरें लुटी जा रही हैं और कोयले पर पहरा बिठाया जा रहा है । पेनी वाईज़, पाउण्ड फुलिश का मुहावरा ऐसे ही नहीं चल पड़ा है । समझ सकें तो समझिये वरना 100 रू0 किलो की अरहर दाल खा कर ई.वी.एम. में हाथ के पंजे का बटन दबाइये । यह पंजा जल्दी ही आपका गला घोंटने वाला है ।

9 Responses to “किफायत-शारी के सदके ।(व्यंग्य)”

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