सुदर्शन

एक मुकद्दमा 25 पैसे के लिये 29 साल चला ।(व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on September 7, 2009


इलाहाबाद में एक मुकद्दमा 25 पैसे के लिये 29 साल चला और अन्त में गवाहों के मुकरने के कारण् मुलजिम को कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया ।

शुक्र है कि गवाहों को अक्ल आ गई और वे मुकर गये नहीं तो ये मुकद्दमा कम से कम 50 साल तक तो अभी और खिंच सकता था । खिंचता भी क्यों न। लर्नेड काउंसेल यानी की वकील साहब की वाह वाही मुकद्दमा निपटाने में भले होती हो पर बुद्धिमानी तो मुकद्दमा लटकाने में ही होती है । मुवक्किल एक दुधारू गाय है । ये होशियार वकील पर निर्भर करता है कि वो उसको कितना और कब तक दुह सकता है । हांलाकि अब ये काबलियत वकीलों से ज्यादा नर्सिंगहोम के डाक्टरों में ज्यादा पायी जाने लगी है । खैर । अब तक तो इस मामले की दोनों पार्टियों ने कम से कम ढ़ाई लाख रूपये 25 पैसे के लिये फूंक दिये होंगे । अदालत भी बोर हो गयी होगी एक ही घिसी पिटी फिल्म को लगातार 29 साल तक देख देख कर । देर आये दुरूस्त आये । इनका तो भला हो गया लेकिन पूरे भारत में लंबित पचासों लाख़ मुकद्दमों का क्या होगा जिनमें सजा का इंतजार करते करते मुलजिमों की आत्मायें जेल की चहरदीवारी डांक कर परलोक को प्रयाण कर चुकी हैं या सिविल के मामलों में अब दूसरी या तीसरी पीढ़ी अदालत की शोभा बढ़ा रही है । =>

12 Responses to “एक मुकद्दमा 25 पैसे के लिये 29 साल चला ।(व्यंग्य/कार्टून)”

  1. सब की मिली भगल का ही नतीजा हो सकता है एसा महान मुकद्दमा..सभी संबद्ध पक्षों को प्रणाम.

  2. गिरिजेश राव said

    देखिए जहाँ मूँछ का सवाल हो वहाँ समय और तार्किकता वगैरह जैसी सींगे और पूँछे नहीं देखी जातीं । मैं अभी अपने वकील साहब से पूछता हूँ कि मुआमला सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया जा सकता है कि नहीं?

    वैसे चवन्नी (आप की निहायत ही बेसुवादी भाषा में 25 पैसे) की महिमा बहुत भारी है। सुना नहीं क्या सैंया दिल माँगे चवन्नी उछाल के।

  3. भगल=भगत

  4. सूकून की बात है कि खत्‍म हो गया, प‍ता नही अभी कितने 10-20 पैसे वाले मुकदमे पेडि़ग होगे। य‍ह खत्‍म हो गया तो हमें पता चल गया पता नही और कितने लाइन में पेपर में छपने की बाट जोह रहे होगे।

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