सुदर्शन

आंख के बदले आंख, बीबी के बदले बीबी । (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on August 8, 2009

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च.च.च. । बेचारा बहुत उम्दा तालिबानी था । हमारे कितने जुर्म इसने खुशी खुशी अपने सिर ले रखे थे । अब आई.एस.आई को कोई दूसरा मुर्गा ढूंढना पड़ेगा बलि का बकरा बनाने के लिये । आज जरदारी साहब खूब खुश हुये होंगे । आंख के बदले आंख के नियम के हिसाब से न सिर्फ बीबी के बदले में बीबी मारी गयी बल्कि सूद में बैतुल्ल्ला मेहसूद का भी काम तमाम हो गया । लेकिन बेनजीर की रूह को चैन अब भी नहीं मिलेगा क्यूंकि बैतुल्ला तो सिर्फ एक मोहरा भर था । =>

दो दिन पहले दक्षिणी वजीरिस्तान के एक गांव मकीन में हुये अमेरिकी ड्रोन से मिसाइल हमले में खुंखार तालिबानी आतंकवादी बैतुल्ल्ला मेहसूद अपनी बीबी और ससुर इकरामुद्दीन के साथ मारा गया ।

6 Responses to “आंख के बदले आंख, बीबी के बदले बीबी । (व्यंग्य/कार्टून)”

  1. मारा गया ! अच्छा!

  2. गिरिजेश राव said

    बीवी के बदले बीवी ! जवाब नहीं आप के बोध का।
    हम अपने को ‘बोधू’ पाते हैं आप के आगे।
    वाह।

  3. फिर ख़बर आ गई है कि पाकिस्तानी हमेशा की तरह इस बार भी झूठ ही बोल रहे थे. बैतुल्लाह नहीं मरा. अलबत्ता उसकी बीबी का पता नहीं…हो सकता है आपकी “बीबी के बदले बीबी” वाली कहावत चरितार्थ हो गई हो…कौन जाने.

  4. कितनी बीवियां थीं; कालिया?

  5. K M Mishra said

    सरदार, अखबार में तो दो लिखा था ।

  6. ANUJ GARG said

    plz Send ME its script … … … … … … … ..

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