सुदर्शन

कलमुंही भैंसों की मौज (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 16, 2009

=>री बहना, थोड़ा तेज पांव चला । तुझे पता नहीं कि कल रात हुयी बारिश से परेड ग्राउंड में एक बड़ा तालाब बन गया है । आस पड़ोस की सभी भैंसे सुबह से ही वहां मौज कर रही हैं ।

=>जाओ, जाओ अनपढ कहीं की । आज का अखबार पढती तो परेड ग्राउंड न जाकर मुंबई की ट्रेन पकड़ती । तेज बारिश के कारण अमिताभ बच्चन के बंगले प्रतीक्षा में भी एक बड़ा सा तालाब बन गया है । मैं तो वहीं जाने की तैयारी कर रही हूं । अमिताभ जी अपने इलाहाबाद के हैं । क्या वो दो दिन के लिए हमारी मेजबानी भी न करेंगे ।

मित्रों इस ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में कभी 1857 की क्रं।ति का बिगुल बजा था । माघ मेले और कुंभ मेले के दौरान परेड ग्राउंड में तिल रखने की भी जगह नहीं होती है । बरसात के मौसम को छोड़ कर बाकी समय लड़के यहां क्रिकेट खेला करते हैं । और बरसात में यहां भैंसों का एकछत्र राज होता है । वे यहां बने बरसाती तालाबों में आनन्द के साथ जल किलोल करती हैं और हम जैसे लोग उनकी फोटो खींच कर ब्लागिंग को नया आयाम देते हैं ।

4 Responses to “कलमुंही भैंसों की मौज (व्यंग्य/कार्टून)”

  1. ओह, मालुम न था – इस चौपाये को भैंस कहते हैं!
    हम क्या जाने साहित्य की बातें। साइबर्ब के आदमी।

  2. सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said

    अभी तो बरसात शुरू ही हुई है और आप नजर लगाने लगे। थोड़ा रहम करो जी…!
    जरा जम के बरस लेने दीजिए फिर मुकेश का गाना लगा के सुनिए..
    बरखा रानी, जरा जम के बरसो, मेरा दिलवर जा न पाए जरा झूम के बरसो…🙂

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