सुदर्शन

रोज़गार के नये अवसर – 1 (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on July 15, 2009


वित्त मंत्री प्रणव दा ने इस बजट में एक करोड़ बीस लाख नये रोज़गार पैदा करने की बात कही है । कारपोरेट सेक्टर कहता है कि ये सारे रोज़गार नरेगा या आंगनबाड़ी जैसी योजनाओं के लिए है और ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 100 दिन के ही रोज़गार की गारंटी देते हैं । शहरी और शिक्षित युवकों के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है जबकि आज देश में 20 करोड़ रोज़गार की जरूरत है । तो दोस्तों वित्त मंत्री ने तो बजट संसद में रख कर अपने हाथ झाड़ लिये । अब आप जानो, आपका काम जाने । कांग्रेस तो युवाओं का वोट लेकर पांच साल के लिए तगड़ा रोज़गार पा गयी ।

युवा मित्रों, ये तो आप जानते ही हो कि अपना हाथ, जगन्नाथ । माफ कीजिएगा टाईम पास की बात नहीं कर रहा हूं बल्कि आपको स्वरोज़गार के नये क्षेत्र बता रहा हूं । हालांकि ये स्वरोज़गार के क्षेत्र नये नहीं हैं लेकिन इनमें नोट कूटने की अपार संभावनाएं हैं और साथ ही ये समाजसेवा से भी जुड़े हुए हैं । स्वरोज़गार के अपने मजे हैं । कोई ससुरा बॉस नहीं होता । जब मन किया काम किया जब मन किया तब बाल-बच्चों को (अगर ये कष्ट आपके ऊपर नहीं पड़ा है) तो बाजूवाली भाभीजी को, पड़ोसी की लड़की को, अपनी हसीन सेक्रेटरी को स्कूटर की पिछली सीट पर बैठाया और सिनेमा देखने या इडली-डोसा के बाद आइसक्रीम खाने निकल गये । जिंदगी का मजा तो इसी में है । जब मन किया काम किया जब मन किया तफरी कर डाली । न किसी के बाप से लेना, न किसी के बाप को देना यानी न लेना एक, न देना दो ।

तो दोस्तों मैंने इस बढ़ती हुयी बेरोज़गारी पर गंभीरता से विचार किया और इस कारण मुझे एक झपकी भी आयी (दिमाग पर लोड डालते ही थोड़ी देर के लिए दिमाग की एम.सी.वी ट्रिप कर जाती है) । काफी देर तक विचारने (झपकने) के बाद ये लाखों का आइडिया दिमाग में लपलपाया । हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा वाला आइडिया था । ढेर सारे नये स्वरोज़गार के क्षेत्र हैं जिनपर सरकार की नजर नहीं पड़ी है हालांकि सरकार बहुत कुछ इन्हीं तरीकों और सिद्वांतों पर चला करती हैं । इस श्रंखला के अन्तर्गत मैं आपको इन्हीं तरीकों की जानकारी दूंगा । इसमें बहुत ज्यादा इन्वेस्टमेन्ट की जरूरत नहीं है, हां, अपने स्किल डेवलप करना जरूरी है । आप इनको प्रोफेशन का दर्जा दे सकते हैं जैसे डाक्टर, वकील, सी.ए. वगैरह होते हैं । अगर आप गौर से देखेंगे तो हर प्रोफेशनल आदमी मूल रूप से इन्हीं सिध्दांतों की मदद लेता है । चलिए अब ज्यादा आपकी दिमाग का दही नहीं करूंगा और शुरूआत करते हैं इस श्रंखला की पहली कड़ी की ।

रोज़गार नं0 एक – हाईटेक तांत्रिक या ज्योतिषाचार्य बनिये ।

मित्रों, मुंह न बनाओ । कुन्टलों संभावनाएं हैं इस क्षेत्र में और बोरा भर कर नोट भी हैं । घर बैठे आमदनी । पैर छूने वालों की भीड़ । कैश और काइंड में इंकम । बलभर यश । अफसर और नेता चरणों में लोटन कबूतर । बाबा बन कर ठाठ से गद्दी पर विराजो । समाजसेवा की समाजसेवा और खूबसूरत औरतों से संपर्क बढ़ाने के मौके । मैं कहता हूं क्या कमी है इस धंधे में । पैसा ही पैसा और ग्लैमर के साथ नाम भी । कोई आई.ए.एस या किसी मल्टीनेशनल का सी.ई.ओ क्या खा कर तुम्हारी बराबरी करेगा । चलो अब धंधे की बारीकियां भी समझा दूं और ट्रेनिंग कैसे लेनी है वो भी बता दूं । ध्यान से सुनना । हास्य, व्यंग्य समझ कर हंसी में मत उड़ा देना । जीवन बदल जायेगा ।

पहले तो अख़बार पढना सीखो । काहे कि ये सारे चऊचक धंधेबाज रोज अखबारों के वर्गीकृत पन्ने पर छपते हैं और इनकी कोई जांच भी नहीं होती । विज्ञापन इस तरह का होता है – विवाह में अड़चन, प्रेमविवाह, मोहनी वशीकरण, यंत्र हाथ पर रगड़िये प्रेमी-प्रेमिका भाग आयेंगे, धनवान बनें, व्यापार, विदेश यात्रा, नौकरी, लॉटरी, सौतन, गृहक्लेश, तलाक, अदालत, शिक्षा, संतान न होना, आदि एक यंत्र सौ काम । मिलिए पहाड़ वाले बाबा से । पुराने डॉट के पुल के बगल में, मसाले वाली गली, मिंया की सरांय, अलीगढ ।

इस तरह के विज्ञापन रोज अख़बार में छपते हैं । जाइये पहले वो विज्ञापन पढ़ कर आइये फिर धंधे की बात बताता हूं ।

जारी…………

=>पुत्र तुम्हारे हाथ में कालसर्प योग स्पष्टरूप से दिखाई पड़ रहा है । राहु-केतु ने तुम्हारा जीवन नर्क बना रखा है ।

=>हां महाराज, आप सही कहते हैं । मेरी पत्नी और मेरी सास ही मेरे लिए साक्षात राहु-केतु का अवतार हैं । इनसे मेरे प्राणों की रक्षा का कोई उपाय बतायें ।

2 Responses to “रोज़गार के नये अवसर – 1 (व्यंग्य/कार्टून)”

  1. बढ़िया बढ़ते साधन हैं. एक दिन भारत को ज्योतिषियों का देश कहा जाएगा…:-)

  2. वाह! “बाबा बंगाली भूतनाथ” के नाम पर कापीराइट करवा लेते हैं पहले!🙂

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