सुदर्शन

फिक्सिंग का मौसम (हास्य-व्यंग्य, कार्टून)

Posted by K M Mishra on March 28, 2009

                                                                                                               – नरेश मिश्र

साधो, सुना तमने! मैच फिक्सिंग के महारथी अजहरूद्दीन क्रिकेट का मैदान छोड़कर सियासत की घुड़दौड़ में शामिल हो गये हैं । अपने लोकतंत्र में सियासत ही ऐसा सर सब्ज और बड़ा मैदान है, जिसमें हर तरह के जानवर स्वछंद हो कर चर सकते हैं । यहाँ गाय, भैंस, भेड़, बकरी, गधे, घोड़े और खच्चर तक आसानी से खप जाते हैं । अपराध की दुनिया में कुख्यात हो चुके किसिम-किसिम के अपराधियों को प्रायश्चित करने के लिए राजनीति के तीर्थ में डुबकी लगानी पड़ सकती है । अपने महान लोकतंत्र के महान कानून के अनुसार जब तक कोई अपराधी अदालत से दोष सिध्द करार नहीं दिया जाता, तब तक वह चुनाव के मैदान में बेखटके चौकड़ी भर सकता है और इस मैदान की घास मनमाने तौर पर चर सकता है । निचली अदालत से सजा मिलने पर भी अपराधी के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा तो खुला ही रहता है । वह जमानत भी पा सकता है और चुनाव लड़ने की परमीशन भी । अपने संजू भइया उर्फ मुन्ना भाई सुप्रीम कोर्ट से परमीशन मिलने की उम्मीद पर आज कल लखनऊ लोकसभा क्षेत्र में चौकड़ी भर रहे हैं । अभी नहीं तो कभी नहीं । मान्यवर अटल जी की आत्मा मुन्ना भाई की उम्मीद्वारी सुनकर आकण्ठ तृप्त हो गई होगी ।

बहर कैफ चुनाव के मौसम में हर सियासी पार्टी फिक्सिंग करती है । कांग्रेस ने अजहरूद्दीन को फिक्स किया तो समाजवादी पार्टी ने संजू भइया को, दोनों में कोई खास फर्क नहीं है । अजहरूद्दीन को मुल्क की क्रिकेट टीम की कप्तानी के दौरान एहसास हुआ कि देश की शान बढाने के लिए लगातार जीत हासिल करने का कोई मतलब नहीं है । जीत के बजाय हार जाने से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है । जीतने पर सिर्फ फीस की बंधी रकम मिलती है। हारने पर दो नंबर की चकाचक कमाई होती है । इस कमाई पर कोई इनकम टैक्स भी नहीं भरना पड़ता है । अब बी.सी.सी.आई. ने उनके बोलने पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है । तो कांग्रेस को उनकी महारत का ख्याल आया । आदमी काम का है, क्रिकेट मैच फिक्स कर सका है । तो चुनाव में कामयाबी भी हासिल कर सकता है । सियासत में ऐसे ही ज़हीन लोगों की शिद्दत से जरूरत पड़ती है ।

मुन्ना भाई बेहद नाबालिग दिमाग सुपर हीरो ठहरे । बेचारे नहीं जानते थे कि मुंबई के डॉन दाउद इब्राहिम के गैंग ने कोई अपराध किया है । आत्म रक्षा का शौक चर्राया तो ए.के.56 राइफल अपने घर में रख ली । मुंबई में धमाके हुए तो घबरा कर विदेश से फोन कर दिया कि घर में रखी राइफल तोड़कर बाहर फैंक दो । लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी । क्राइम ब्रांच के लाग बेहद बेदिल होते हैं । उन्हें संजू भाई की एक्टिंग से कुछ लेना देना नहीं था । अब अदालत ने उन्हें सजा सुना दी है तो वे राजनीति के घाट पर प्रवित्र डुबकी लगाने चले आये ।

फिलहाल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का फिक्सिंग अभियान जारी है । अजहरूद्दीन और संजू बाबा तो फिक्स हो गये । अब बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा की बारी है । अमर सिंह ने सियासत की चूहेदानी में चारा लगा दिया है । बिहारी बाबू अगर चारे पर रीझ गये तो चूहेदानी में खट की आवाज होगी । समाजवादी जयकारा लगायेंगे । बिहारी बाबू टोपी का रंग बदल सकते हैं । सियासत में टोपी का रंग बदलते देर नहीं लगती है । सियासी प्राणियों के दिल का रंग कभी नहीं बदलता, वह सदैव काला रहता है । सरदार की काली कामर चढै न दूजौ रंग । अभी कांग्रेस की फिक्सिंग क्षमता का इम्तिहान चल रहा है । सियासत के मयखाने में हाथी पर सवार भुनगा नजर आता है ।

=> मैच तो बहुत फिक्स किये थे । इंशाल्ला ! अब देश फिक्स करने की बारी है ।

2 Responses to “फिक्सिंग का मौसम (हास्य-व्यंग्य, कार्टून)”

  1. अच्छा व्यंग्य!

  2. Savannah said

    I always wished to be able to write on my site a little something like that. I normally don’t submit comments in blogs however your website made me to, great work.… My best regards, Savannah.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s

 
%d bloggers like this: