सुदर्शन

हाथी की पूंछ पकड़ कर हृदय परिवर्तन

Posted by K M Mishra on February 5, 2009

 

मित्रों, सरकार के पास हज़ारों काम होते हैं । जनता के सामाजिक, आर्थिक कल्याण के लिए सरकार को बड़े पापड़ बेलने पडते हैं । सूबे में शांति व्यवस्था बनाये रखने के लिए पुलिसवालों की नींदहराम करनी पड़ती है । बीच बीच में विरोधी पार्टियों का भी पुलिस की लाठियों की मदद से मानमर्दन करना पड़ता है । मानते ही नहीं है कठोर विरोधी । दलित की लड़की साल में एक बार केक काटकर अपना जन्मदिन मनाले, इतना भी नहीं देखा जाता है दिलजलों से । खैर । सूबे में शांति व्यवस्था बनी रहे इसके लिए सिर्फ पुलिस और अदालतें ही काफी नहीं है । कुछ और उपाय करने भी जरूरी होते हैं । जैसे हृदयपरिवर्तन ।

 

क्लास में जो स्टूडेंट सबसे ज्यादा खुराफती होता है उसको टीचर मॉनीटर बना देते हैं । सॉलिड फार्मूला । अब वो लौंडा दूसरे खुराफाती लौंडों की बोलती बंद कर देता है । क्लास में उसकी मोनोपॉली हो जाती है । अब जिम्मेदारी निभाने में पढाई का जो हर्जा हुआ उसकी भरपाई के लिए वो सुशीला, गायत्री और रजिया के नोट्स फोटो कॉपी करा लेता है । होमवर्क भी निपट गया और सुंदर लड़कियों से यारी भी गांठ ली । क्लास टीचर तिवारी जी सोचते हैं कि मॉनीटर बनते ही मुधकर का हृदयपरिवर्तित हो गया है, आजकल क्लास में शांति रहती है । इधर मधुकर भाई सुशीला और गायत्री का हृदयपरिवर्तन करने के पश्चात शांति ओझा के हृदयपरिवर्तन के लिए नये-नये नुस्खे ढूंढते रहते हैं ।

 

तो मित्रों, सूबे में अपराध पर नियंत्रण रखने के लिए सुश्री मायावती जी को सिर्फ पुलिस प्रशासन पर ही निर्भर रहना ठीक जान नहीं पड़ रहा था । उन्होंने एक दूसरा सस्ता और टिकाऊ रास्ता निकाला है । हृदयपरिवर्तन का । उनका मानना है कि अपराधी छवि वाले व्यक्ति का अपने आप हृदयपरिवर्तन हो जाता है अगर वह बसपा ज्वाइंन कर लेता है । अगर उसके बाद भी उसके कलुषित हृदय में कुछ मैल रह गई है तो रही सही कसर बहन जी के भाषणों से पूरी हो जायेगी । लेकिन सभी दैत्यराजों को ये सुविधा बहनजी उपलब्ध नहीं करवा रही हैं । जैसे इलाहाबाद के फूलपुर से बाहुबली सांसद चिरंजीवी श्री अतीक अहमद जी, जो कि वर्तमान में पूर्व बसपा विधायक राजू पाल की हत्या के इल्जाम में जेल काट रहे हैं और उनके इलाहाबाद पश्चिमी से पूर्व विधायक भाई अशरफ तो ढाई साल से फरार चल रहे हैं, इनका वोट तो अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बहनजी ने संसद में अपने पक्ष में गिरवा दिया लेकिन दैत्यराज को बसपा में शामिल नहीं कर रही हैं । क्यूं करें । यही दैत्यराज हैं जिन्होंने 12-13 साल पहले लखनऊ के सरकारी गेस्ट हाउस में सुश्री मायावती को जिन्दा जलाने का हार्दिक सश्रम प्रयास किया था । दैत्यराज का चुनावी क्षेत्र है फूलपुर और निवास स्थान है इलाहाबाद के चकिया इलाके में । चाहे कहीं से भी चुनाव लड़ें । चुनाव जीतने के लिए साम्यवादी फार्मूला ही अपनाते हैं । बंग्लादेशियों की एक बड़ी फौज को इन्होंने राशन कार्ड और वोटिंग आईकार्ड दिलवाकर भारत का नागरिक बन रखा है । बनारस के संकटमोचन मंदिर में धमाका करने वाला वलीउल्ला इन्हीं के चुनाव क्षेत्र का रहने वाला है और इनके निवास स्थान के अगल बगल के मुहल्ले पिछले कई सालों से इंटेलिजेंस की निगेहबानियों में चल रहे हैं ।

 

मित्रों, आज आम भारतीय राजनीति को धनपिशाचों और बाहुबली दैत्यों का खेल मानता है और इस खेल में आम इंसान के लिए कोई इंट्री नहीं है । इस खेल की इंट फीस ही इतनी ज्यादा है कि एक आम भारतीय एम. पी., एम. एल. ए. छोड़िये गांवसभा और सभासद के चुनाव का खर्चा नहीं बर्दाश्त कर सकता । राजनीति अब देश सेवा नहीं बल्कि एक व्यवसाय है और सत्ता पक्ष की राजनीति सबसे अधिक लाभदायक व्यवसाय । किसी सार्वजनिक पद पर आसीन होने के बाद तो फिर लक्ष्मी जी हर खिड़की-दरवाजे से प्रवेश करने लगतीं है । चुनाव पर हुआ इन्वेस्टमेंट छोड़िये अगले दस चुनाव लड़ने लायक धन का भी इंतजाम हो जाता है ।

 

चुनाव जीतने के लिए गुंडों और धनपिशाचों की जरूरत पड़ती है । सभी राजनैतिक पार्टियों का हित इसी में है कि वे ज्यादा से ज्यादा धनपिशाचों और बाहुबली दैत्यों को अपना उम्मीदवार बनायें क्योंकि ऐसे लोग कम से कम अपनी सीट तो सुरक्षित कर ही लेगें और बुरे वक्त में धन, बल से पार्टी की सेवा भी करेंगें, जैसे विधानसभा में मतदान के वक्त दूसरी पार्टी के एम.एल.ए बन्धुआंे को बरगलाने, नोट सप्लाई करने और नहीं माने तो उनका हरण करने जैसी कार्रवाईयों में काम आते हैं । वक्त की नजाकत और पार्टी की जरूरत के अनुसार हर प्रकार के काम को सहर्ष तैयार रहते हैं । और क्यूं न रहें । सत्ता मिली तो जो पुलिस प्रशासन अब तक इनको कुत्तों की तरह खोजती फिर रही थी अब वो ही इनकी सुरक्षा में लगी रहती है । कोर्ट में चल रहे इनके खिलाफ सारे मुकद्दमे खारिज हो जाते हैं । फिर नई ऊर्जा और स्फूर्ति के साथ ये राष्ट्रनिमार्ण में लग जाते हैं यानि की सरकारी धन के प्रवाह को अपने तिजोरी का रास्ता दिखाने में ।

 

मित्रों, भारत देश एक विशाल चारागाह है । पहले दो सौ साल तक गोरे अंग्रेज बहादुर इसको चरते रहे, फिर 1947 के बाद सफेद, उजले कुर्ते पैजामे वालों की बारी आई, अब इधर दस पंद्रह साल से बाहुबली सांडों ने भी मुंह मारना शुरू कर दिया है । आराम से खाओ यार, इतनी भी क्या जल्दी है । बड़ा उपजाऊ देश है ।

 

 

 

One Response to “हाथी की पूंछ पकड़ कर हृदय परिवर्तन”

  1. thankyou very good

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