सुदर्शन

एक अनोखी चिकित्सा पध्दति

Posted by K M Mishra on January 22, 2009

 

ऐसा तो नहीं है कि आप कभी बीमार नहीं पड़े होंगे । (अरे भाई बदुआयें नहीं दे रहा हँ ।) छीकें होंगे । कभी बुखार चढ़ा होगा । मलेरिया, टाइफाईड, कॉलरा, टी.वी., शुगर । अरे डरिये नहीं बड़ी आम बिमारी हैं । मेरे कहने का मतलब था कि दवा कौन सी लेते हैं । एलोपैथिक या होम्यापैथिक । इन पैथियों का अर्थशास्त्र भी भिन्न भिन्न होता है । भिन्न भिन्न तरीका होता है । अब अगर आपको कोई बिमारी हो गई है (माफ करें । कभी न हो । सिर्फ उदाहरण के लिये ।) और आपकी बिमारी का खर्च आपका विभाग उठा रहा हो तो एलोपैथी चलेगी । इसका स्टैंडर्ड थोड़ा ऊंचा होता है । मेडिकल इक्ज़ाम में भी चे ऊंची चीज होती है । या आप नगदऊ को स्वास्थ्य से कम चाहते हैं तो फिर एलोपैथी की शरण में जायेंगे । इसके बारे में एक नकारात्मक तथ्य यह है कि ये बिमारी के साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी नष्ट कर देती है । इसलिये बुध्दिमान व्यक्ति सलाह देते हैं कि इमरजेंसी में ही इसको सेवा का अवसर दिया जाये ।

मीठी गोलियाँ । होम्योपैथी । इसका अर्थशास्त्र थोड़ा आम आदमी के लेवल का होता है । बस डाक्टर साहब फीस ऊंॅची न लें । दवा दारू वाली उक्ति को इन्होेंने ज्यादा तत्परता से ग्रहण किया है । इसलिये इनकी अधिक्तर दवाएं एलकोहल होती हैं । दो बूंद दारू दवा है । दो पैग मस्ती है । उससे ज्यादा पीने पर पीने वाला रोता है और दुनिया हँसती है । इसके बारे में एक खास बात यह है कि यह मर्ज को दबाती नहीं है बल्कि उसका समुचित उपचार करती है ।

एक है अपनी खास चिकित्सा पध्दति, आयुर्वेद । देशी चीज । ये सस्ती भी होती है और मंहगी भी । अगर आपको गैसटिक ट्रबुल है तो त्रिफला फांक लीजिये । या हींग, अजवाइन । और भी बहुत से देशी मसाले हैं । और अगर आप शाही इलाज चाहते हैं तो फिर ये दस तोला सोना भी जला कर खिलवा सकते हैं । पर ये गैस के लिये नहीं हैं । इसकी खासियत यह है कि इसके लिये घर में ही काफी कुछ उपलब्ध होता है और अगर ज्यादा प्रभाव चाहिये तो किसी वैद्य जी के निकट जाइये । ये ऐसी ऐसी जड़ी बूटियों का नाम गिना देंगे कि खोजे नहीं पाइयेगा । मिलती है पर शहर की किसी खास दुकान पर जिसकी आपको जानकारी नहीं होगी । सी.आई.डी. वाले खोजने में मदद कर सकते हैं यदि उनको भी कोई बिमारी आयुर्वेद से ही दुरूस्त करनी हो । या उनका कोई मुजरिम अपना हाजमा ठीक करने के लिये उस दुकान पर आया हो ।

अब एक ऐसी चिक्तिसा पध्दति की बात करने जा रहा हँ जो की फ्री फंड की है । एक्यूपंचर और एक्यूप्रेशर पध्दति । इस पध्दति में कोई दवा सवा खाने की जरूरत नहीं है बस शरीर का या हाथ का ही कोई हिस्सा दबा कर बैठ जाओ । ज्यादा तेज आराम चाहिये तो सुईयाँ खरीद लो और अपने को पंचर करवा लो । इसके अनुसार हमारे शरीर के जितने भी मुख्य अंग हैं उन सबका कनेक्शन कुछ नसों के द्वारा होता है जो कि पूरे शरीर में फैली होती हैं । हर तरह की बिमारी, जुकाम से लेकर कैंसर तक आप इससे ठीक कर सकते हैं । (बताने वाले तो यही बताया । )

आपने कभी ऐसे साधुओं को देखा होगा जो कि सुई के बिस्तर पर या कांटो की झाड़ पर लेटे होते हैं । मुझको लगता है कि एक्यूप्रेशर या एक्यूपंचर की शुरूआत ऐसे ही हुयी होगी । चीन वाले तो झूठ बोलने में माहिर ही हैं । कह दिया हमने खोजा है । झूठे, धोखेबाज कहीं के (चीन के) । हाँ तो मैं कह रहा था कि कांटों के बिस्तर पर कोई बिमार साधु बेहोश हो कर गिर गया होगा । कुछ देर में उसकी सारी नसें तड़ाक फड़ाक ठीक हो गई होगी । बुध्दि हरी हो गई होगी । सटाक से उसने चिलम निकाली होगी । गांजा भरा होगा । एक सुट्टा खींचा होगा और जोर से चिल्लाया होगा यूरेका‘ ‘यूरेकामतलब फ्री फंड का इलाज ।

आधुनिक एक्यूप्रेशर में भी यही होता है । अब आप बबूल के दस फिट के झाड़ को घर में तो रख नहीं सकते हैं इसलिये प्लास्टिक की कांटेदार प्लेट चलन में हैं । उस पर खड़े हो जाइये और स्वस्थ अनुभव कीजिये । टोटल यौगिक आनंद ।

अब चलिये एक्यूपंचर की तरफ । साइकिल में पंचर हो तो हवा निकलती है । शरीर में पंचर हो तो खून निकलता है । ज्यादा बढ़िया फायदा चाहिये हो तो दस ठो सुई खरीद लो और किसी विशेषज्ञ से ठुंसवालो । दर्द नहीं होता है । बस चींटी सी काटती है । कभी कभी खून भी निकल आता है पर इससे ज्यादा रक्तदान तो आप हर रात मच्छरों को कर देते हैं । खबराने की कोई जरूरत नहीं है सब ठीक हो जायेगा । इससे भी तेज फायदा चाहिये तो विशेषज्ञों में विशेषज्ञ, सयाने (कसाई) विशेषज्ञ बिजली का भी इंतजाम किये रहते हैं । एक से बारह वोल्ट का करंट सुईयों में प्रवाहित करा देंगे । कुछ नहीं होगा बस हल्का सा चुनचुनायेगा । ज्यादा तेज होगा तो आप खुद ही सीकी ध्वनि करते हुये हाथ हटा लेंगे । पर घबराइये नहीं फिर से कोशिश कीजिये ।

ये पध्दति हमारे आम जीवन में भी बहुत कारगर है । अब जैसे सासू माँ का सिर दर्द कर रहा है तो बहू गले पर एक्यूप्रेशर का प्रयोग कर सकती है । यदि आपके सिर में दर्द किसी नाम के आदमी ने उत्पन्न किया हो तो आप एक्यूपंचर विधी अपनायें । इसमें आप सुई की जगह चाकू या कोई भी लंबा नुकिला डंडा ले लीजिये और के शरीर में कहीं भी जैसे सिर, छाती, पेट में घुसा दीजिये । खत्म, दर्द खत्म ।

एक्यूप्रेशर और एक्यूपंचर में आधे मरीजों का दर्द सुई, करंट और विशेषज्ञों की निमर्म तत्परता देख कर ही भाग जाता है । बाकी आधा मर्ज भी चला ही जाता है क्योंकि जो भी हो चिक्तिसा पध्दति तो है ही ।

3 Responses to “एक अनोखी चिकित्सा पध्दति”

  1. मनोरंजक. आभार.

  2. संगीता पुरी said

    हमारे घर के सामने ही एक्‍यूपंक्‍चर की क्लिनिक है…..और डाक्‍टर साहब हमारे मित्र ही हैं।

  3. anmol said

    i did not like it because it is uncopyable
    other websites allow copying of their material but not you

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