सुदर्शन

(हास्य व्यंग्य पर आधारित ब्लॉग) अब सुदर्शन www.kmmishra.tk पर भी उपलब्ध है .

Posts Tagged ‘Hindi’

हम संतन से का मतलब !

Posted by K M Mishra on अक्टूबर 2, 2010

लेखक – नरेश मिश्र

पांच दस नम्बरी, महापापी थे । अपराध करने से जी अघा गया । पुलिस के डंडे ने पीठ से साक्षात्कार किया, बुढ़ापा दस्तक देने लगा तो पांचों पापी गेरूआ वस्त्र पहन कर संत बन गये । तीर्थयात्रा को निकले ये संत एक गांव से गुजर रहे थे तो गांववालों की आवाज सुन कर भीड़ के नजदीक चले गये । एक झाड़ी के पास गांववाले साही को लाठियों से पीट रहे थे । साही के बदन पर कांटे होते हैं । लाठियां कांटे पर चटक रही थीं लेकिन साही का बाल बांका नहीं हो रहा था । उन संतों में जो महापापी था, उसने गांव वालों की ओर देखकर कहा – साही मरै मूड़ के मारे, हम संतन से का मतलब (साही सिर पर चोट करने से मर जाती है लेकिन हम संतों को इस बात से क्या लेना देना) । गांववालों ने संत के उपदेश का पालन करते हुये साही के सिर पर लाठियां बरसाईं, साही टें हो गयी ।

राम जन्मभूमि-बाबरी ढांचा विवाद का फैसला आने से पहले और बाद में हमने ऐसे ही मीडिया माहिर संतों के दर्शन किये । प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रिानिक मीडिया में इनदिनों ऐसे ही संतों की भरमार है जो जमालो की तरह आग लगा कर दूर से तमाशा देखते हैं । अखबार का सर्कुलेशन बढ़ना चाहिये, चैनल की टीआरपी रैंकिंग बढ़नी चाहिये । मुल्क का क्या होगा – इससे मीडिया को कुछ लेना देना नहीं । बर मरै चाहे कन्या, हमे दक्षिणा से काम ।

माननीय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ का बाबरी विवाद पर फैसला आने की खबर मिलते ही मीडिया की बांछें खिल गयीं । बिल्ली के भाग से छींका टूटा । ऐसा सुनहरा मौका बार-बार नहीं आता । प्रयागराज में कुंभ मेला बारह साल बाद जुड़ता है ।

मीडिया मुगलों को एहसास हुआ कि बेहद संगीन मामला है, मुल्क के आसमान पर संकट के बादल गहरा रहे हैं । बादल फटते हैं तो कयामत आती है । आसमान ही फट पड़ा तो क्या होगा । इस मुल्क के लोग तो जाहिल, गंवार और बर्बर हैं । धर्मनिरपेक्षता खतरे में पड़ गयी है । इस मौके पर लोकतंत्र के चौथे खंभे को टट्टर की आड़ से ऐसा तीर चलाना चाहिये कि सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे ।

सेकुलर मीडिया ने जंगल में रोने वाले सियारों को शर्मिंदा कर दिया और वे एक स्वर में हुआ हुआ करले लगे । इस सियार रोदन प्रतियोगिता का चैम्पियन कौन था, निशाने पर कौन साम्प्रदायिक तत्व थे, इसका फैसला हम पाठकों पर छोड़ देते हैं ।

बहरहाल कुछ नमूने तो पेश करने ही पडेंगे । टाइम्स नाऊ चैनल के अर्णव गोस्वामी के चैनल में भाजपा नेता और पेशे से माननीय सुप्रीम कोर्ट के वकील रविशंकर प्रसाद तशरीफ लाये । गोस्वामी ने उन्हें देख कर कमर के नीचे चोट करने का मन बनाया । ऐसे मौकों पर खास तौर से अंग्रेजी सेकुलर मीडिया के निशाने पर भाजपा का होना लाजिमी है । गोस्वामी ने रविशंकर से पूछा – फैसला आने पर भाजपा का अगला कदम क्या होगा ?

रविशंकर ने छूटते ही सवाल किया – आपने मुझे बतौर वकील परिचर्चा में बुलाया है । अगर आप चाहते हैं कि मैं भाजपा नेता के रूप में जवाब दूं, तो मुझे कुछ नहीं कहना है । आप मुझे गलत रास्ते पर जाने के लिये उकसा रहे हैं ।

गोस्वामी ने होशियारी से अपना बचाव करते हुये कहा – मेरा यह मकसद नहीं था । रामजन्मभूमि के लिये रथयात्रा भाजपा नेता अडवाणी ने की थी । बाकी सारे पैनलिस्ट मुस्कुरा रहे थे । उस वक्त सारे सेकुलर पाखंडियों को लग रहा था कि अदालत का फैसला बाबरी मस्जिद के पक्ष में आयेगा  इसलिये लगे हाथ भाजपा, आर. एस. एस., विश्व हिंदू परिषद को लपटने में कोई हर्ज नहीं है । इसके एवज में धर्मनिरपेक्षता का गोल्डमेडल हासिल होगा । लेकिन रविशंकर, अर्णव गोस्वामी से ज्यादा तेजतर्रार निकले । उन्होंने कहा – मुकद्दमें का फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट से हो जाने दीजिये । इस लम्बी बहस का जवाब थोड़े में नहीं दिया जा सकता है ।

नमूना नंबर दो । जी न्यूज के महान बुध्दिजीवी पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेई ने डाक्टर मुरली मनोहर जोशी से पूछा – अदालत का फैसला आने के बाद क्या होगा ।

जोशी जी ने कहा – फैसला आयेगा तब देखा जायेगा आप अभी से अफवाह और सनसनी क्यों फैला रहे हैं ।

फैसला आया तो सारे सेकुलर पाखंडियों के कलेजे पर सांप लोट गया । आगे का कीचड़ उछालू प्लान मुलतवी करना पड़ा । टी आर पी और धंधे का भी बड़ा नुकसान हुआ । अदालत ने मान लिया था कि रामजन्मभूमि की पहचान उसी जगह के रूप में की जाती है जहां बाबरी ढांचा खड़ा था । उस जगह से मूर्तियां हटायीं नहीं जा सकती हैं ।

सेकुलर मीडिया को देख कर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की कहावत याद आती है । देश की हिंदू-मुस्लिम जनता ने बड़े धीरज और शांति से फैसला सुना । उसने देश के सेकुलर पाखंडियों को आईना दिखा दिया । जाहिर हो गया कि अगर सेकुलर मीडिया और धर्मनिरपेक्ष पाखंडी नेता खामोश बैठे रहते तो भी देश का जनमानस इतना समझदार है कि वह अदालत के फैसले पर भड़क कर सड़कों पर नहीं आता । देश के आम लोग मीडिया और सेकुलर पाखंडी नेताओं से ज्यादा समझदार हैं ।

एक टिटिहरी आसमान की तरफ पंजे उठा कर पीठ के बल लेटी थी । उसे भरोसा था कि अगर आसमान गिरेगा तो वह उसे अपने पंजे पर रोक लेगी । टिटिहरी की गलतफहमी उसे मुबारक । ज्यादा क्या कहें, सिर्फ यही अर्ज करनी है कि इन पांखडी लीडरों और मीडिया माहिरों का नकाब हटा कर उनका असली चेहरा देखने की जहमत उठायें । ये वोटबैंक और पैसे के लिये कुछ भी करने को उधार खाये बैठे हैं ।

Posted in हिन्दी हास्य व्यंग्य | Tagged: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , | 4 Comments »

रोज़गार के नये अवसर – 1

Posted by K M Mishra on जुलाई 20, 2010

वित्त मंत्री प्रणव दा ने इस बजट में एक करोड़ बीस लाख नये रोज़गार पैदा करने की बात कही है । कारपोरेट सेक्टर कहता है कि ये सारे रोज़गार नरेगा या आंगनबाड़ी जैसी योजनाओं के लिए है जो ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 100 दिन के ही रोज़गार की गारंटी देते हैं । शहरी और शिक्षित युवकों के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है जबकि आज देश में 20 करोड़ रोज़गार की जरूरत है । तो दोस्तों वित्त मंत्री ने तो बजट संसद में रख कर अपने हाथ झाड़ लिये । अब आप जानो, आपका काम जाने । कांग्रेस तो युवाओं का वोट लेकर पांच साल के लिए तगड़ा रोज़गार पा गयी ।

युवा मित्रों, ये तो आप जानते ही हो कि अपना हाथ, जगन्नाथ । माफ कीजिएगा टाईम पास की बात नहीं कर रहा हूं बल्कि आपको स्वरोज़गार के नये क्षेत्र बता रहा हूं । हालांकि ये स्वरोज़गार के क्षेत्र नये नहीं हैं लेकिन इनमें नोट कूटने की अपार संभावनाएं हैं और साथ ही ये समाजसेवा से भी जुड़े हुए हैं । स्वरोज़गार के अपने मजे हैं । कोई ससुरा बॉस नहीं होता । जब मन किया काम किया जब मन किया तब बाल-बच्चों को (अगर ये कष्ट आपके ऊपर नहीं पड़ा है) तो बाजूवाली भाभीजी को, पड़ोसी की लड़की को, अपनी हसीन सेक्रेटरी को स्कूटर की पिछली सीट पर बैठाया और सिनेमा देखने या इडली-डोसा के बाद आइसक्रीम खाने निकल गये । जिंदगी का मजा तो इसी में है । जब मन किया काम किया जब मन किया तफरी कर डाली । न किसी के बाप से लेना, न किसी के बाप को देना यानी न लेना एक, न देना दो ।(यह फलसफा गर्ल फ्रैण्ड पर लागू नहीं होता)

तो दोस्तों मैंने इस बढ़ती हुयी बेरोज़गारी पर गंभीरता से विचार किया और इस कारण मुझे एक झपकी भी आयी (दिमाग पर लोड डालते ही थोड़ी देर के लिए दिमाग की एम.सी.वी ट्रिप कर जाती है) । काफी देर तक विचारने (झपकने) के बाद ये लाखों का आइडिया दिमाग में लपलपाया । हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा वाला आइडिया था । ढेर सारे नये स्वरोज़गार के क्षेत्र हैं जिनपर सरकार की नजर नहीं पड़ी है हालांकि सरकार बहुत कुछ इन्हीं तरीकों और सिद्वांतों पर चला करती हैं । इस श्रंखला के अन्तर्गत मैं आपको इन्हीं तरीकों की जानकारी दूंगा । इसमें बहुत ज्यादा इन्वेस्टमेन्ट की जरूरत नहीं है, हां, अपने स्किल डेवलप करना जरूरी है । आप इनको प्रोफेशन का दर्जा दे सकते हैं जैसे डाक्टर, वकील, सी.ए. वगैरह होते हैं । अगर आप गौर से देखेंगे तो हर प्रोफेशनल आदमी मूल रूप से इन्हीं सिध्दांतों की मदद लेता है । चलिए अब ज्यादा आपकी दिमाग का दही नहीं करूंगा और शुरूआत करते हैं इस श्रंखला की पहली कड़ी की ।

रोज़गार नं0 एक – हाईटेक तांत्रिक या ज्योतिषाचार्य बनिये ।

मित्रों, मुंह न बनाओ । कुन्टलों संभावनाएं हैं इस क्षेत्र में और बोरा भर कर नोट भी हैं । घर बैठे आमदनी । पैर छूने वालों की भीड़ । कैश और काइंड में इंकम । बलभर यश । अफसर और नेता चरणों में लोटन कबूतर । बाबा बन कर ठाठ से गद्दी पर विराजो । समाजसेवा की समाजसेवा और खूबसूरत औरतों से संपर्क बढ़ाने के मौके । मैं कहता हूं क्या कमी है इस धंधे में । पैसा ही पैसा और ग्लैमर के साथ नाम भी । कोई आई.ए.एस या किसी मल्टीनेशनल का सी.ई.ओ क्या खा कर तुम्हारी बराबरी करेगा । चलो अब धंधे की बारीकियां भी समझा दूं और ट्रेनिंग कैसे लेनी है वो भी बता दूं । ध्यान से सुनना । हास्य, व्यंग्य समझ कर हंसी में मत उड़ा देना । जीवन बदल जायेगा ।

पहले तो अख़बार पढना सीखो । काहे कि ये सारे चऊचक धंधेबाज रोज अखबारों के वर्गीकृत पन्ने पर छपते हैं और इनकी कोई जांच भी नहीं होती । विज्ञापन इस तरह का होता है – विवाह में अड़चन, प्रेमविवाह, मोहनी वशीकरण, यंत्र हाथ पर रगड़िये प्रेमी-प्रेमिका भाग आयेंगे, धनवान बनें, व्यापार, विदेश यात्रा, नौकरी, लॉटरी, सौतन, गृहक्लेश, तलाक, अदालत, शिक्षा, संतान न होना, आदि एक यंत्र सौ काम । मिलिए पहाड़ वाले बाबा से । पुराने डॉट के पुल के बगल में, मसाले वाली गली, मिंया की सरांय, अलीगढ ।

इस तरह के विज्ञापन रोज अख़बार में छपते हैं । जाइये पहले वो विज्ञापन पढ़ कर आइये फिर धंधे की बात बताता हूं ।

जारी…………

=>पुत्र तुम्हारे हाथ में कालसर्प योग स्पष्टरूप से दिखाई पड़ रहा है । राहु-केतु ने तुम्हारा जीवन नर्क बना रखा है ।

=>हां महाराज, आप सही कहते हैं । मेरी पत्नी और मेरी सास ही मेरे लिए साक्षात राहु-केतु का अवतार हैं । इनसे मेरे प्राणों की रक्षा का कोई उपाय बतायें ।

Posted in हिन्दी हास्य व्यंग्य | Tagged: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , | 10 Comments »

सुषमा रानी झिंझोटिया का जवाबी प्रेमपत्र(व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on मई 24, 2010


श्री जोखू सिंह जी उपध्याय,
जुग जुग जियें आप, आप ने पिछले पत्र में मुझे पालागी कहा था इसलिये मेरा फर्ज बनता है कि आप को आशीर्वाद दूँ । मुझ को हार्दिक कष्ट है कि टामी (हरामी) ने आपकी तीन पैन्टों का सत्यानाश कर दिया । जब से मुझे टामी की इस कुत्तई का पता चला है मैंने उसे पुचकारना बंद कर दिया है और अब मैं उसे गोद में भी नहीं उठाती हँ । इस टामी ने तो मेरा जीना हराम कर रखा है । तुम से पहले वह मेरे चार और प्रेमियों को काट चुका है । तुम तो खुशनसीब थे । पिछले चार तो इंजेक्शन लगवा रहे हैं ।

जोखू जी, आपने मुझे पहली बार मेरे पिताजी की दुकान पर समोसा बांटते हुये देखा था । उस दिन मेरे खिलखिलाने और बेवजह मुस्कुराने की वजह वही थी जिसके लिये आपने झुंझलाते हुये सर ऊपर उठाया था । असल में आलू हम बोरे का बोरा खरीदते हैं । उस दिन आलू नीचे की थी । उन आलूओं में सड़न पैदा हो गई थी । नमक तो पिताजी भूल ही गये थे और उस दिन धनिया भी मंहगा गई थी । इस लिये मिर्चा जरा ज्यादा डालना पड़ गया था । जब इतना झाम हो तो ग्राहक गरियायेगा है ही । इस लिये जिस दिन समोसों में कोई गड़बड़ होती है मैं ही समोसे बांटती हँ । मेरी मुस्कान मीठी चटनी का काम करती है और सड़े हुये बासी आलू को भी ग्राहक आरम से हजम कर जाता है । हालांकि मेरे लिये तो सभी ग्राहक एक समान है पर उस दिन आप पर नजर पड़ी तो मुझे लगा कि इस आलू में कुछ दम है । फिर आपने मेरे घर के चक्कर मारने शुरू कर दिये । पहले तो मुझे लगा कि कोई शायद समोसों का आर्डर देने आया है, पर जब टामी ने भी आपको पहचानना शुरू कर दिया तब मैंने जाना कि आप मेरे चक्कर में गली के चक्कर लगा रहे हैं । टामी ने जब भी आपको दौड़या मैं खिड़की से देखती रहती और भगवान से मनाती कि आपका बाल भी बांका न हो । आपने भी हार नहीं मानी और इस कमीने टामी से आपने भी खूब लोहा लिया । मैंने यह कसम खायी थी कि जो लड़का टामी के जबड़ों से बच जायेगा वही मुझसे दोस्ती करने के लायक होगा । टामी से लगातार पंगा ले कर आपने मेरे हृदय को जीत लिया है ।

जोखू जी आप को नहीं मालूम कि आप मेरे मन मंदिर में बहुत पहले से ही बसे हुये हैं । मैं और आप एक ही डिग्री कालेज में पढ़ते हैं । मुझको दुकान की वजह से और आपको अन्य व्यक्तिगत कार्यों की वजह से कालेज जाने का वक्त नहीं मिलता अन्यथा हमारी मुलाकात पहले ही हो चुकी होती । पिछले साल एनुअल फक्शंन पर जो आपने काव्य पाठ किया था ‘फागुन में आजा बलमवा’ वह मेरे हृदय में उतर गया था । आप का तभी से मुझको इंतजार है । ये बंशी वाले की कित्ती बड़ी किरपा है कि उसने आपको एक दिन आखिर मेरे बाप की दुकान तक पहुंचा ही दिया । किसी ने सच्ची कहा है कि प्रर्थना में बड़ी ताकत होती है।

आगे समाचार यह है कि बापू और भईया मेरी सादी सेठ चमन लाल के बेवड़े लड़के रेवड़ी लाल से करवाना चाहते हैं । जोखू जी अब आपको ही कुछ करना पड़ेगा । वरना वह रेवड़ी लाल एक दिन मुझको आपसे छीन कर ले जायेगा । इधर दो हफ्तों से उसके फोन भी खूब आने लगे हैं । मुझसे पूछ रहा था कि ”इन्ही लोगों ने ले लिया दुप्पटा मेरा, वाला गाना आता है ? नहीं आता हो तो सीख लो ।” सुना है वह रेवड़ी दारू पीने के बाद गाना सुनने का भी शौकीन है । मेरी तो जिंदगी उसको गिलास पकड़ाते और उमराव जान का गाना सुनाते बीतेगी । उस नर्क से बचने का बस एक ही रास्ता है और वह है हम दानों इस बेरहम दुनिया से कहीं दूर भाग चलें । जहाँ न कोई बाप हो, न कोई भाई, न कोई टामी हो और न कोई रेवड़ी लाल हो । रूपयों पैसों की चिंता तुम मत करना । मैं माँ के जेवर और पिता जी की तिजोरी साफ करके आऊंगी । हम यहाँ से भुसावल चले चलेंगे । वहाँ मेरी एक सहेली रहती है । मेरे पिताजी के पैसों से हम एक मिठाई की दुकान खोल लेंगे । बेसन के लड्डू और समोसे बनाना मैं जानती ही हूँ । तुम भी चाय बनाना जानते होगे । हमारी दुकान चल निकलेगी क्योंकि समोसे बेचने की कला तो मैं जानती ही हूँ । फिर तीन चार साल में हमारी मदद करने के लिये तीन चार बच्चे भी होंगे ।

अच्छा पत्र अब खत्म करती हँ । अगर हमारा प्यार सच्चा है तो अगली 3 तारीख को हम इटारसी-भूसावल पेसैंजर में बैठे होंगे । डरने की कोई जरूरत नहीं है । मुझे तीन बार घर से भागने का एक्सपीरियेन्स है । अब की दफा फुल प्रूफ प्लान बनाया है । अगर सब कुछ सही रहा तो हमें कोई पकड़ नहीं पायेगा । खर्चे की फिकर मत करना । मैं सबसंभाल लूंगी ।

तुम्हारे लिये हर खतरा उठाने को तैयार
तुम्हारी भावी संगिनी
सुषमा रानी झिंझोटिया

Posted in हिन्दी हास्य व्यंग्य | Tagged: , , , , , , , | 8 Comments »

बेवड़े पायलेटों से खुदा बचाये । (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on अप्रैल 19, 2010

पिछले साल 42 पायलेटों को शराब पीकर विमान उड़ाते पकड़ा गया था । विमानन कंपनियां का इस मामले में नजरिया सुनकर आपके होश फाख्ता हो जायेंगे । विमानन कंपनियां ‘दुर्घटना से देर भली’ के सिद्धांत से उलटा चलती हैं । उनका प्रिय सिद्धांत है ‘देर से दुर्घटना भली’ इसलिये वो दूसरे पायलेट को बुलाने की जगह उस टल्ली पायलेट को ही विमान सौंप देती हैं ताकि फ्लाइट डिले या कैंसिल न हो जाये ।

विमानन कंपनियां भगवान भरोसे जहाज उड़वा रही हैं । उनका मानना है कि जीवन और मृत्यु तो ऊपर वाले के हाथ है । जिसकी जिस समय मौत लिखी है उसी समय होगी । उससे पहले घबरा कर धंधा खराब करने से परलोक का तो पता नहीं, हां इहलोक जुरूर बिगड़ जायेगा ।

<=हिक्क! और पिलाओ भाई । ऊपर देखो । जब वह दारू पीकर जहाज उड़ा सकता है तो मैं क्या 17 पैग पीकर सायकिल से अपने घर भी नहीं जा सकता । हिक्क!

Posted in हिन्दी हास्य व्यंग्य | Tagged: , , , , , , , , , , , , , , , , | 16 Comments »

जी0 एस0 एल0 वी0 – डी 3 बंगाल की खाड़ी को समर्पित । (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on अप्रैल 16, 2010





वही ठेठ गंवई अंदाज । कोई शुभ काम शुरू करने से पहले गांव के चऊरा (ग्राम देवता) को बलि दी जाती है । इसरो के ग्राम देवता बंगाल की खाड़ी में रहते हैं इसलिये हर नई तकनीकी पहले वहां समर्पित की जाती है तब आगे काम बढ़ाया जाता है । परंपरा तो निभानी ही पड़ेगी ।

Posted in हिन्दी हास्य व्यंग्य | Tagged: , , , , , , , , , , , , | 8 Comments »

सानिया मिर्जा का निकाह : पार्ट टू । (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on मार्च 31, 2010

हनुमत जंयती के दिन भी हैदराबाद के बजरंग दल कार्यकर्ताओं को अपना फर्ज याद रहा और वो समय निकाल कर सानिया मिर्जा के घर के सामने प्रदर्शन कर आये । नसीहत दे आये । अपनी मुफ्त एडवाइस दे आये कि बहन कुछ तो शर्म करो । जब अमेरिका के इतने समझाने के बावजूद भी हम पाकिस्तान से वार्ता नहीं कर रहे हैं तो तुम मामले को इतना पर्सनली क्यों ले रही हो । निगोड़े पाकिस्तान से सम्बन्ध अच्छे बनाने के लिये तुम क्यों अपने आप को कुर्बान कर रही हो । जिन पाकिस्तानी क्रिकेटरों को आईपीएल में 20-20 खेलने के लायक नहीं समझा गया उनसे तुम जिंदगी का टेस्ट मैच खेलने की तैयारी कर रही हो । फिर ये भी तो देखो पाकिस्तान रहेगा तो पाकिस्तान ही । दुश्मन मुल्क । कुछ टेनिस मैच हारने से तुम्हारे दिमाग को धक्का लगा है । तुम्हें आराम की जरूरत है न कि ऐसे फालतू डिसीजन लेकर देश भर के युवकों की नींद हराम करने की । यहाँ तुम्हारी मिनी स्कर्ट पर एक बार फतवा जारी हुआ था तो उसका हम सभी ने तहे दिल से विरोध किया था, पाकिस्तान तो फतवों का देश है, वहाँ क्या बुर्के में टेनिस खेलोगी । वगैरह, वगैरह । तो मित्रों, सही बतायें इस घबर से करोड़ों भारतीय दिलों को धक्का लगा था लेकिन असली मर्द तो बजरंगदल वाले निकले जो कम से कम अपना विरोध तो दर्ज करा आये ।

जब बजरंगी भाई लोग सानिया के घर के बाहर इस राष्ट्रीय मुद्दे पर खुले आम अपनी बात रख रहे थे तभी तमाम पत्रकारों ने उन्हें घेर लिया और उनमें से जो सबसे कर्मठ, अनुभवी कार्यकर्ता दिख रहा था उसको घेर कर प्रश्न पूछने लगे ।

पत्रकार : आप लोगों ने आज कैसे टाईम निकाला ? आज तो हनुमत जयंती है ।

कार्यकर्ता : हम लोग सवेरे ही हनुमान जी को मत्था टेक, सवा किलो मोतीचूर चढ़ाकर कर आये हैं । शाम को फिर आरती में शामिल होंगे । दिन के समय अपने काम पर निकले हैं । कर्म ही धर्म है । कर्म से बजरंगदली कभी पीछा नहीं हटता है ।

पत्रकार : आप लोग तो हनुमान जी के भक्त है फिर सानिया मिर्जा की शादी में क्यों बाधा डाल रहे हैं ?

कार्यकर्ता : हम बाधा नहीं डाल रहे हैं । त्रेतायुग में हनुमान जी ने सीता माता के अपहरण का दण्ड देने के लिये दुष्ट रावण की लंका जला डाली थी । आज माँ सीता के देश में लड़कियाँ खुद ही वीजा लेकर रावण के देश जाना चाहती हैं । हम तो सिर्फ अपना फर्ज समझ कर समझाने की कोशिश भर कर रहे हैं ।

पत्रकार : ये कैसा कर्म है ? कोई अपनी मर्जी से शादी भी नहीं कर सकता है ।

कार्यकर्ता : हम शादी के खिलाफ नहीं है । यहाँ तक की बजरंगदली भी शादी करते हैं, बस हम लोग मंगलवार को शादी नहीं करते हैं । रही सानिया मिर्जा की पाकिस्तानी क्रिकेटर से शादी की बात तो हम इसका विरोध करते हैं । पाकिस्तान हमारे यहाँ रोज बम विस्फोट करता है । आतंकवादी भेजता है । मुबंई काण्ड के बाद से तो हमारे रिश्ते वैसे भी पाकिस्तान से खराब चल रहे हैं । जब किसी स्तर पर कोई वार्ता नहीं हो रही है तब ऐसे में दुश्मन मुल्क से शादी ब्याह के रिश्ते बनाना कौन सी समझदारी की बात है । फिर शादी ही करनी है तो भारत में कौन सी दूल्हों की कमी पड़ी है । इमरान खान (आमिर खान का भतीजा) से लेकर इरफान खान तक तमाम कुंवारे लड़के खड़े-खड़े सूखे जा रहे हैं । किसी को भी रिश्ता भेज सकते थे । देश की खातिर तो हम भी दूसरी शादी कर सकते हैं ।

पत्रकार : क्या आपको इस शादी में किसी षडयंत्र की बू आती है ?
कार्यकर्ता : अगर कोई षडयंत्र होगा तो उसकी बू सुरेश चिपलूनकर जी कब की सूंघ चुके होंगे । इसके बारे में विस्तार से जानकरी के लिये उनका ब्लॉग वॉच करिये । वैसे एक प्रतिबंधित क्रिकेटर से शादी करना कोई समझदारी की बात नहीं है । सानिया का नाम इससे पहले शोएब से कभी जोड़ा भी नहीं गया । दाल में कुछ न कुछ तो काला जरूर है ।

मित्रों इस प्रश्नवार्ता के बाद चुपके से पत्रकार ने एक टिटहरी से बजरंगदलिये से जो कि भीड़ में सबसे पीछे गुटखा कर इधर उधर पिच-पिच करता खड़ा था एक बड़ा ही व्यवसायिक सवाल पूछ डाला कि क्या इस प्रदर्शन के लिये किसी ने आपको चंदा वगैरह दिया था । इस पर वह बजरंगदली रहस्यमयी मुस्कान मुस्काते हुआ बोला ”बड़े काईयां पत्रकार हो यार तुम तो । देशहित में हम कड़ी धूप में जान हल्कान किये जा रहे हैं और आप इसमें भी धंधे की बात सोच रहे हो । अब जब पूछ ही लिया है तो नाम न छापो तो हम बताये देते हैं । इस प्रदर्शन के लिये हमको सानिया के एक्स मंगेतर सोहराब मिर्जा ने पैसे दिये थे । हालांकि मामला इतना सेंसिटिव है कि हम देश भर के पीड़ित युवकों की खातिर वैसे ही सानिया के घर पर प्रदर्शन करने जा रहे थे लेकिन जब प्रदर्शन के लिये फाइनेंसर उपलब्ध हो जाये तो हम उसकी भावनाओं की भी कद्र करते हैं ।”

तो मित्रों ये थी कुल कहानी हनुमत जयंती के दिन सानिया मिर्जा के घर प्रदर्शन करने वाले बजरंगदलियों की ।

Posted in हिन्दी हास्य व्यंग्य | Tagged: , , , , , , , , , , , , , , , , , , , , | 14 Comments »

 
Follow

Get every new post delivered to your Inbox.

Join 57 other followers