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जग बौराना : लज्जा नहीं आयी ।
Posted by K M Mishra on अक्टूबर 21, 2010
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हम संतन से का मतलब !
Posted by K M Mishra on अक्टूबर 2, 2010
लेखक – नरेश मिश्र
पांच दस नम्बरी, महापापी थे । अपराध करने से जी अघा गया । पुलिस के डंडे ने पीठ से साक्षात्कार किया, बुढ़ापा दस्तक देने लगा तो पांचों पापी गेरूआ वस्त्र पहन कर संत बन गये । तीर्थयात्रा को निकले ये संत एक गांव से गुजर रहे थे तो गांववालों की आवाज सुन कर भीड़ के नजदीक चले गये । एक झाड़ी के पास गांववाले साही को लाठियों से पीट रहे थे । साही के बदन पर कांटे होते हैं । लाठियां कांटे पर चटक रही थीं लेकिन साही का बाल बांका नहीं हो रहा था । उन संतों में जो महापापी था, उसने गांव वालों की ओर देखकर कहा – साही मरै मूड़ के मारे, हम संतन से का मतलब (साही सिर पर चोट करने से मर जाती है लेकिन हम संतों को इस बात से क्या लेना देना) । गांववालों ने संत के उपदेश का पालन करते हुये साही के सिर पर लाठियां बरसाईं, साही टें हो गयी ।
राम जन्मभूमि-बाबरी ढांचा विवाद का फैसला आने से पहले और बाद में हमने ऐसे ही मीडिया माहिर संतों के दर्शन किये । प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रिानिक मीडिया में इनदिनों ऐसे ही संतों की भरमार है जो जमालो की तरह आग लगा कर दूर से तमाशा देखते हैं । अखबार का सर्कुलेशन बढ़ना चाहिये, चैनल की टीआरपी रैंकिंग बढ़नी चाहिये । मुल्क का क्या होगा – इससे मीडिया को कुछ लेना देना नहीं । बर मरै चाहे कन्या, हमे दक्षिणा से काम ।
माननीय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ का बाबरी विवाद पर फैसला आने की खबर मिलते ही मीडिया की बांछें खिल गयीं । बिल्ली के भाग से छींका टूटा । ऐसा सुनहरा मौका बार-बार नहीं आता । प्रयागराज में कुंभ मेला बारह साल बाद जुड़ता है ।
मीडिया मुगलों को एहसास हुआ कि बेहद संगीन मामला है, मुल्क के आसमान पर संकट के बादल गहरा रहे हैं । बादल फटते हैं तो कयामत आती है । आसमान ही फट पड़ा तो क्या होगा । इस मुल्क के लोग तो जाहिल, गंवार और बर्बर हैं । धर्मनिरपेक्षता खतरे में पड़ गयी है । इस मौके पर लोकतंत्र के चौथे खंभे को टट्टर की आड़ से ऐसा तीर चलाना चाहिये कि सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे ।
सेकुलर मीडिया ने जंगल में रोने वाले सियारों को शर्मिंदा कर दिया और वे एक स्वर में हुआ हुआ करले लगे । इस सियार रोदन प्रतियोगिता का चैम्पियन कौन था, निशाने पर कौन साम्प्रदायिक तत्व थे, इसका फैसला हम पाठकों पर छोड़ देते हैं ।
बहरहाल कुछ नमूने तो पेश करने ही पडेंगे । टाइम्स नाऊ चैनल के अर्णव गोस्वामी के चैनल में भाजपा नेता और पेशे से माननीय सुप्रीम कोर्ट के वकील रविशंकर प्रसाद तशरीफ लाये । गोस्वामी ने उन्हें देख कर कमर के नीचे चोट करने का मन बनाया । ऐसे मौकों पर खास तौर से अंग्रेजी सेकुलर मीडिया के निशाने पर भाजपा का होना लाजिमी है । गोस्वामी ने रविशंकर से पूछा – फैसला आने पर भाजपा का अगला कदम क्या होगा ?
रविशंकर ने छूटते ही सवाल किया – आपने मुझे बतौर वकील परिचर्चा में बुलाया है । अगर आप चाहते हैं कि मैं भाजपा नेता के रूप में जवाब दूं, तो मुझे कुछ नहीं कहना है । आप मुझे गलत रास्ते पर जाने के लिये उकसा रहे हैं ।
गोस्वामी ने होशियारी से अपना बचाव करते हुये कहा – मेरा यह मकसद नहीं था । रामजन्मभूमि के लिये रथयात्रा भाजपा नेता अडवाणी ने की थी । बाकी सारे पैनलिस्ट मुस्कुरा रहे थे । उस वक्त सारे सेकुलर पाखंडियों को लग रहा था कि अदालत का फैसला बाबरी मस्जिद के पक्ष में आयेगा इसलिये लगे हाथ भाजपा, आर. एस. एस., विश्व हिंदू परिषद को लपटने में कोई हर्ज नहीं है । इसके एवज में धर्मनिरपेक्षता का गोल्डमेडल हासिल होगा । लेकिन रविशंकर, अर्णव गोस्वामी से ज्यादा तेजतर्रार निकले । उन्होंने कहा – मुकद्दमें का फैसला माननीय सुप्रीम कोर्ट से हो जाने दीजिये । इस लम्बी बहस का जवाब थोड़े में नहीं दिया जा सकता है ।
नमूना नंबर दो । जी न्यूज के महान बुध्दिजीवी पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेई ने डाक्टर मुरली मनोहर जोशी से पूछा – अदालत का फैसला आने के बाद क्या होगा ।
जोशी जी ने कहा – फैसला आयेगा तब देखा जायेगा आप अभी से अफवाह और सनसनी क्यों फैला रहे हैं ।
फैसला आया तो सारे सेकुलर पाखंडियों के कलेजे पर सांप लोट गया । आगे का कीचड़ उछालू प्लान मुलतवी करना पड़ा । टी आर पी और धंधे का भी बड़ा नुकसान हुआ । अदालत ने मान लिया था कि रामजन्मभूमि की पहचान उसी जगह के रूप में की जाती है जहां बाबरी ढांचा खड़ा था । उस जगह से मूर्तियां हटायीं नहीं जा सकती हैं ।
सेकुलर मीडिया को देख कर खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की कहावत याद आती है । देश की हिंदू-मुस्लिम जनता ने बड़े धीरज और शांति से फैसला सुना । उसने देश के सेकुलर पाखंडियों को आईना दिखा दिया । जाहिर हो गया कि अगर सेकुलर मीडिया और धर्मनिरपेक्ष पाखंडी नेता खामोश बैठे रहते तो भी देश का जनमानस इतना समझदार है कि वह अदालत के फैसले पर भड़क कर सड़कों पर नहीं आता । देश के आम लोग मीडिया और सेकुलर पाखंडी नेताओं से ज्यादा समझदार हैं ।
एक टिटिहरी आसमान की तरफ पंजे उठा कर पीठ के बल लेटी थी । उसे भरोसा था कि अगर आसमान गिरेगा तो वह उसे अपने पंजे पर रोक लेगी । टिटिहरी की गलतफहमी उसे मुबारक । ज्यादा क्या कहें, सिर्फ यही अर्ज करनी है कि इन पांखडी लीडरों और मीडिया माहिरों का नकाब हटा कर उनका असली चेहरा देखने की जहमत उठायें । ये वोटबैंक और पैसे के लिये कुछ भी करने को उधार खाये बैठे हैं ।
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सीटीबाज मुलायम सिंह । (व्यंग्य/कार्टून)
Posted by K M Mishra on मार्च 25, 2010
अबे ओये! महिला आरक्षण बिल अभी पास नहीं हुआ और तू अभी से सीटी मारने की प्रेक्टिस शुरू कर दिया । =>
महिला आरक्षण बिल पर मुलायम सिंह यादव को क्यों एतराज हैं इसके कारण वो धीरे धीरे करके अब जनता को बता रहे हैं । जो मूलभूत कारण उन्होंने गिनाये हैं उनका ध्यानपूर्वक विश्लेषण करने पर यह ज्ञात होता है कि इस बिल का विरोध करने वाले त्रिमूर्ति यादव शिरोमणि को अपनी जाति आधारित राजनीति का बंटाधार होने का डर सता रहा है ।
प्रात:स्मरणीय मुलायम सिंह जी ने महिला आरक्षण बिल के विरोध में जो कारण गिनाये हैं जरा उन पर गौर करिये ।
1- महिलाओं को लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण हो जाने पर पहले साल विजयी महिला सांसदों की संख्या 33 प्रतिशत होगी । अगले लोकसभा चुनाव में रोटेशन प्रणाली के कारण दूसरे संसदीय क्षेत्रों से 33 प्रतिशत महिलाएं संसद में आ जायेंगी जबकि पिछले चुनाव में विजयी महिलायें फिर अपनी सीट बचाने के लिये चुनाव लड़ेंगी और जीत जायेंगी । फिर अगले लोकसभा चुनाव में नई सीटों पर 33 प्रतिशत आरक्षण होने के कारण अब लोकसभा में 99 प्रतिशत महिलाएं पहुंच जायेंगी । मुलायम सिंह जी भविष्य की उस लोकसभा का स्मरण करके ही कांप जाते हैं जब लोकसभा में 99 प्रतिशत महिलायें देश की नीतियाँ तय कर रही होंगी । उनका मानना है कि महिलायें कड़े कदम नहीं उठा सकतीं हैं और ऐसे में देश कमजोर हो जायेगा और विदेशी शक्तियाँ हावी हो जायेंगी ।
अपनी जवानी के दिनों में अखाड़े के उस्ताद रह चुके मुलायम सिंह को पूरा भरोसा है कि सपा और लालू प्रसाद जी की राजद की महिलाओं के सामने एक नहीं चलेगी और उन्हें अपने बेटों, भतीजों संग यादवों के पारंपरिक व्यवसाय की तरफ लौटना पड़ेगा । मुलायम सिंह को पक्का भरोसा है कि जब वो अपनी सगी बहू डिंपल यादव को तमाम कसरतों के बावजूद नहीं जिता पाये तब दूसरी बहुओं का तो भगवान ही मालिक है । एक दिक्कत यह भी है कि परिवार में इतनी बहुएं और बेटियाँ भी नहीं हैं कि सभी आरक्षित सीटों पर खड़ी हो सकें । दसरे मुलायम सिंह जी महिलाओं द्वारा उठाये गये कड़े कदमों से बुरी तरह कुचले गये हैं । इंदिरा गाँधी की इमरजेंसी से तो वह किसी तरह बच निकले थे लेकिन मायावती की इमरजेंसी में उनका सांस लेना भी मुश्किल हो गया है । महिलाओं के कठोर कदमों से मुलायम सिंह जी को बहुत डर लगता है ।
2- दूसरा कारण महिला बिल के विरोधी यह गिनाते हैं कि इस बिल के पास हो जाने पर सवर्ण महिलाओं की लॉटरी लग जायेगी और मुस्लिम और दलित महिलाओं का कुछ भी भला न होगा ।
मुलायम सिंह जी की इस दलील में भी कुछ दम नजर नहीं आता है क्योंकि अगर मुलायम सिंह और महिला बिल के दूसरे विरोधी इतने ही दलित और मुस्लिम महिलाओं के हितेषी हैं तो उनको दलित और मुस्लिम महिलाओं को टिकट देने से कौन रोक रहा है । बिल तो सिर्फ 33 प्रतिशत आरक्षण की बात करता है आप चाहें तो अपनी पार्टी के सारे टिकट दलित और मुस्लिम महिलाओं को दे दें । आपके हाथ किसी भी कानून ने नहीं बांधे हैं । और अगर बात दलित महिलाओं के सशक्तिकरण की ही है तो कुमारी, बहन, मायावती जी को अपना पूरा समर्थन दे दीजिये । वो दलित भी हैं और माशाल्ला महिला भी ।
3- बिल के विरोध में एक बड़ा ही व्यवहारिक कारण उन्होंने बड़ा सोच समझ कर बताया कि इस बिल के पास हो जाने से ऐसी महिलायें संसद में पहुंचेंगी जिन्हें देख कर मुस्टंडे सीटी बजाने से अपने को नहीं रोक पायेंगे । बाद में उनकी पार्टी ने सफाई दी की बेरोजगारी के कारण युवक सीटी बाजने का पार्टटाईम काम शुरू कर सकते हैं ।
दोनों ही कथनों पर जरा विचार करें । पहला, महिलाओं को देख कर सीटी मारने के महान विचार अभी तक सिर्फ मुलायम सिंह जी के ही विकसित मस्तिष्क में प्रकट हुये हैं । या हो सकता है कि ऐसे विचार बहुत दिनों से उनके मस्तिष्क में कुलबुला रहे हों कि 99 प्रतिशत महिलाओं को संसद में देख कर सपाई अपने आप को सीटी बजाने से न रोक पायें । या फिर 99 प्रतिशत महिलाएं जब संसद सदस्य हो जायेंगी और सपा संसद से साफ हो जायेगी तब सपाई युवक सड़कों पर सिर्फ सीटी बाजाने का ही रोजगार किया करेंगे ।
कुल मिलाकर यादव त्रिमूर्ति को यही भय सता रहा है कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण से कहीं उनकी संयुक्त परिवार वाली पार्टी की खटिया न खड़ी हो जाये और फिर उन्हें वापस अपने दुग्ध उत्पादन के पारंपरिक कार्य की तरफ लौटना पड़े । मुलायम सिंह को गाय भैंसों के सानिध्य से थोड़ी तकलीफ हो सकती है लेकिन लालू जी तो मुख्यमंत्री और रेल मंत्री रहते हुये भी अपने सरकारी बंगले में दुध दुहने की प्रेक्टिस बरकार रखे हुये थे । लालू जी दूरदर्शी हैं । उनको मालूम है कि राजनीति में तो पक्ष-विपक्ष का नाटक लगा रहता है लेकिन कोई अपने असली धंधे को थोड़े ही भूल जाता है । यकीन न हो तो इंकम टैक्स डिपार्टमेंट से पूछ लीजिये । लालू जी अपनी आय का सबसे बड़ा स्त्रोत दुग्ध उत्पादन ही बताते हैं ।

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दारू सुलभ, आलू सस्ती । खींचो पापड़ संग विस्की । (हास्य/व्यंग्य: होली)
Posted by K M Mishra on मार्च 1, 2010
-बुरा न मानो होली है, हिक्क !
पड़ोसी के आंगन में खड़ा दशहरी खड़े-खड़े बौरा रहा है । बसंत आ रहा है । इस मौसम में प्रकृति से लेकर जीव-जन्तु तक सभी बौरा जाते हैं । नई-नई पत्तियाँ, रंग-बिरंगे फूल, बौराने के लिये प्रेरित करते हैं । नायिका को जो विरह वेदन वर्षा ऋतु में सताने लगती है उसकी नींव मार्च-अप्रेल में ही पड़ती है । बसंत में बौराया हुआ नायक नायिका से मिलता है । शायद होली पर । होली के दिन हिंदुस्तान में सभी बौरा जाते हैं । रंग बिरंगे हो कर, पी कर, मस्तीयाये बौराये गलियों में घूम रहे हैं । हालांकि अधिक न बौरा जायें इस लिये प्रशासन पुलीस की भी व्यवस्था करती है । पर क्या कीजियेगा, मौसम ही बौराने का है । दारू सुलभ, आलू सस्ती । खींचों पापड़ संग विस्की । अपन तो सिर्फ मीठी लस्सी लेते हैं ।
मार्च अप्रेल का महीना, बसंत का महीना । पड़ोसी के आम के बौराने का महीना । इम्तिहान का महीना । इंकमटैक्स का महीना । गुझीया, पापड़ का महीना । अबीर, गुलाल का महीना । विस्की, रम का महीना और खड़े खड़े बौराने का महीना ।
वर्मा जी परेशान हैं । इंकमटैक्स रिटर्न भरनी है । होली सर पर है, खोआ मंहगा हो गया है । कैसे सब इंतिजाम होगा ? पत्नी साड़ी मांग रही है । बच्चों को कपड़े चाहिये । श्रीमती वर्मा परेशान हैं अभी तक आलू नहीं कटे । होली के लिये चिप्स, पापड़ लेट हो रहे हैं । छोटे वर्मा जी इम्तिहान को गाली दे रहे हैं । ऐन होली पर पड़ रहा है साला । किसी को भी नई कोंपले देखने की फुर्सत नहीं है । ऐ प्रकृति आंटी ! तेरा टेम गलत है । तू अपने बसंत का मौसम आगे पीछे शिफ्ट करले । किसी को भी रंग बिरंगे फूल देखने की फुर्सत नहीं है । रेडियो पर एक गाना आ रहा है । ‘बागों में बहार है, कलियों पे निखार है ।‘ थोड़ी देर में दूसरा गाना आ रहा है ‘टाइम नहीं, मेरे पास टाइम नहीं ।‘
बौराना चरम पर पहुँचता है होली पर । साल भर प्लानिंग बनती है किसके साथ अब की बार बौराया जाये और कितना बौराया जाये कि पिटने और दिगंबरों वाली हालत में पहुँचने से बचे रहें । उन महिलाओं की लिस्ट बनती है जो मजे से गुलाल लगवाती हैं । उन दोस्तों की लिस्ट बनती है जिनके यहाँ मुफ्त की दारू लुटती है । उन चौराहों को याद किया जाता है जहाँ पिछले साल भंग पी कर साष्टांग हो गये थे । और उन दुश्मनों की भी लिस्ट बनती है जिनसे होली पर निपटना है । बड़ा रस है होली में, बस पुलीस वाले हस्तक्षेप न करें । ये कंबख्त कानून व्यवस्था हमेशा आड़े आ जाती है । बीजेपी वाले सही कहते है कि संविधान में संशोधन जरूरी है ।
होली की शाम दुश्मन भी गले लग जाते हैं । इन पंक्तियों को चरितार्थ करने के लिये जो भी रास्ते में मिलता है उससे गले लगा जाता है । रामू श्यामू के घर होली मिलने गया । श्यामू माधव के घर । माधव अपनी ससुराल । और ससुराल वाले घर पर नौकर को छोड़ कर होली मिलने निकले हैं । उस दिन 80 प्रतिशत लोग घर पर नहीं होंगे । इस लिये एक सप्ताह तक लगातार ढ़ूँढ- ढ़ूँढ कर गले लगा जाता है । कुछ लोगों को एक टीस रह जाती है, मित्र तो गले लगा पर भाभी जी ने सिर्फ नमस्ते की । ऐसी होली किस काम की । खैर ।
होली पर 40 प्रतिशत लोगों का पेट खराब रहता है । 25 प्रतिशत लोग पेट खराब न हो जाये इस लिये खाते ही नहीं है । 15 प्रतिशत को अपनी पाचन शक्ति पर भरोसा रहता है जो वाकई में सब कछ पचा लेते हैं । बाकि 20 प्रतिशत मंहगाई की वजह से सिर्फ दाल रोटी का ही इंतजाम कर पाते हैं । ये निजी कारणों से कही आ-जा भी नहीं पाते ।
होली का एक बड़ा मजेदार हिस्सा होता है होलिका दहन । इनका क्या है कि हर साल जलाई जाती हैं पर रावण की तरह हर साल आकर बैठ जाती है । जलाओ मुझे । ये दानों कभी नहीं जलते है, बिल्कुल भ्रष्टाचार और मंहगाई की तरह । नेता कहता है कि हमने मंहगाई और भ्रष्टाचार खत्म कर दिया है लेकिन अगले साल फिर वही मुश्किलें । असल में इन दोने के हर साल ज़िंदा होने का राज़ है चंदा । चंदा खाने वाले हर साल इनको जिंदा कर देते हैं । चंदा लेते जाते है और इनको बिना जलाये ही चले जाते हैं । इस लिये ये असुर कभी नहीं मरते ।
अब जरा मेरी होली पर भी गौर फरमाईये । जैसा कि विदित है कि मैं पतित पावनी माँ गंगा कि तरह स्वच्छ, निमर्ल और पवित्र हँ । इसलिये मेरा मनना है कि जैसे माँ गंगा स्नान नहीं करती हैं वैसे मुझे भी स्नान नहीं करना चाहिये । ये मेरी पवित्रता का अपमान होगा । पर जनसाधरण को कभी-कभी मुझ कस्तूरी मानव से एक भीनी-भीनी सुगंध आती मालूम पड़ती है, जो कि उनकी सिर्फ शंका मात्र है । अत: शंका निवारण के लिये मुझे स्नान नामक क्रिया को संपन्न करना पड़ता है जो कि एक नितांत कष्टप्रद प्रक्रिया है ।
होली से मुझे सख्त चिढ़ है । रंग तो लगवा लूँ पर छुड़येगा कौन ? इसलिये अगर मुहल्ले में या बगल के मुहल्ले में कोई गमी साल भर पहले भी हुयी हो तो ऐन होली के दिन उस मृत्यु लोभी की आत्मा मुझे चिकोटी काटने लगती है । खेलने वालों से हाथ जोड़ कर निवेदन करता हूं । “भइया पड़ोस वाले भई साहब की डेथ हो गई है । हम नहीं खेलेंगे” । कभी कभी तो परिवार के बूढ़े बुजुर्ग स्वर्गवासी हो कर रक्षा कर जाते हैं । ईश्वर उन सब की आत्मा को ऊपर इत्र में नहलाये । ज्यादा हुआ तो गुलाल फुलाल का टीका बहुत है ।
बसंत आ रहा है । पड़ोसी का आम बौरा रहा है । इसकी एक डाल मेरे आंगन में भी आ जाती तो दशहरी का आनंद आ जाता । मैं आम का बौरान और दुनिया का बौरान देखता हूं तो सोचता हँ, चलो कुछ दिन बौरा लिया तो क्या बुरा किया । अभी संसद के शीत अधिवेशन में बौराये हुये सांसदों को देख रहा था । अगर संविधान उन्हें बौराने का हक दे सकता है तो पब्लिक को क्यों नहीं ।
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जेट एयरवेज़ की हड़ताल से यात्रियों की फजीहत । (व्यंग्य/काटूंन)
Posted by K M Mishra on सितम्बर 10, 2009
=>भाई साहब मैं तो मुंबई से दिल्ली जाने वाली जेट एयरवेज़ की फ्लाइट में सवार था । आधे रास्ते में पायलटों की यूनियन ने हड़ताल कर दी, तब मेरे पायलट ने यह एनाउंसमेन्ट की कि जब तक हड़ताल खत्म नहीं होगी वह प्लेन को लैण्ड नहीं करायेगा । मैं तो जमीन पर पहुंच कर बाइ ट्रेन दिल्ली चला जाउंगा । आप कहां जा रहे हैं ?
=>मुझको भी जेट वालों ने नीले आसमान में ही उतार दिया । पीछे से एयर इण्डिया का प्लेन आ रहा था तो इस पर ग्वालियर तक के लिये लिफ्ट मिल गयी है । आगे दिल्ली के लिये कोई दूसरा इंतजाम देखूंगा ।
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चार मजेदार खबरें (व्यंग्य/कार्टून)
Posted by K M Mishra on सितम्बर 8, 2009
पहली खबर तो यह कि राष्ट्रपति भवन भी अब चोरों से सुरक्षित नहीं रहा । किसी युवा चोर ने, जिसका दिमाग निश्चित ही कंप्यूटर से तेज दौड़ता होगा, वह कर्मवीर शरीर शौष्ठव प्रतियोगिताओं से प्रेरित हो कर राष्ट्रपति भवन परिसर स्थित हेल्थ क्लब से एक अदद कंम्यूटर और छ: डंबल उड़ा ले गया । दिल्ली पुलिस हलकान है । पुलिस सभी छाती फुलाये, सिक्स-पैक, एट-पैक तराशे, बांहों पर मछलियां पाले युवाओं को घूर घूर कर देख रही है । राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल आजकल रूस के दौरे पर हैं । चोर ने घर खाली देख कर कंप्यूटर और डंबल्स पर हाथ साफ कर दिया । बुढ़िया मर गयी इसका अफसोस नहीं है पर मौत ने घर देख लिया ।


चौयकर्म जब से सभ्यता का विकास हुआ है तभी से बड़ा ही लाभदायक पेशा माना जाता रहा है । ये एक तरह का प्रोफेशन है । यह दिमागदार और कुशल व्यक्तियों का पेशा है । बस इसमें इंकम टैक्स तुरंत जमा करना पड़ता है अन्यथा कारागार जो कि ससुराल जैसा ही सम्मानित स्थान है में कुछ समय के लिये जबरन रहना पड़ सकता है । टैक्स लेने वाले लोग भी वही होते हैं जिनका काम लॉ एण्ड आर्डर मेनटेन करन होता है । अब वो भी बाल बच्चेदार किस्म के मजबूर जीव होते हैं इसलिये सुरक्षा और टैक्स वसूलने की जिम्मेदारियां एक साथ उठाते हैं । चौर्यकर्म के लिये बड़ी ही तीक्ष्ण दृष्टि होनी चाहिये । दूसरे की बहुमूल्य वस्तुओं से प्रेमवश निकटसंबन्ध स्थापित करने का जुनून होना चाहिये (बहुत से सफल चोर तो ये मान कर चलते हैं कि अमुक वस्तु उन्हीं की है, फलां व्यक्ति तो मात्र न्यासी होने का धर्म निभा रहा है और अब उसको इस कर्तव्य से मुक्त कर देना चाहिये) । उस चल सम्पत्ति को उठा कर सफलतापर्वूक फुट लेने की कूवत होनी चाहिये । मित्रों एक चल सम्पत्ति तो ऐसी भी होती है जो कि स्वयं चल कर आपके पास आती है और आप उसे गह कर चंपत हो सकते हैं । उस सम्पत्ति को चुराने का आप पर कोई इल्जाम या अपराध भी नहीं लगेगा । और तो और कुछ परिस्थितयों में तो उस सम्पत्ति का मालिक आपका ऋणी भी रहेगा । इतना दिमाग पर जोर मत डालिये । रोज अखबार मं पढ़ते तो हैं आप कि फलां की बीवी फलां के साथ भाग खड़ी हुयी । भारतीय दण्ड संहिता में इसे अपराध की श्रेणी में नहीं रख गया है । आप इसे समाजसेवा भी मान सकते हैं । चौयकर्म में प्रोमोशन के भी अच्छे चांस होते हैं । धीरे धीरे आदमी पालिटिक्स में आ जाता है फिर लम्बे हाथ मारने लगता है और विदेशी बैंकों में लूट का माल जमा करता है । सफल लोगों की कहानियां सुन सुन कर अंत में अपना ही कलेजा दुखेगा । खैर । दूसरी खबर पर भी दृष्टिपात करें ।
दूसरी खबर और भी जोरदार है । पिछले व्यंग्य लेख में मैंने आपको बताया था कि आंध्र प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री राज शेखर रेड्डी के गम में 142 लोगों ने अपने प्राण विसर्जित किये थे यानी कि आत्महत्या कर ली थी । नये आंकड़ों के अनुसार अब तक कुल 344 लोगों ने खुशी-खुशी खुदकुशी की है । गिनीज बुक वाले अगर सो न रहे हों तो कृपया काम पर लग जायें । एक अदद रिकार्ड के लिये इतनी लाशें उनके लिये काफी होंगी । भारतीय दंड संहिता में आत्महत्या के प्रयास को अपराध माना गया है पर आत्महत्या को अपराध नहीं माना गया है । मरे हुये को आप कैसे दण्डित करोगे । आंध्र की कांग्रेस सरकार ने कानून के इसी छेद का फायदा उठाते हुये सभी आत्महत्या करने वालों के परिवार को मुआवजा देने की घोषण की है । अब आंध्र सरकार आत्महत्या को सरकारी प्रोत्साहन दे रही है । आप खाली बैठे हैं, बेरोजगार हैं तो किसी भी कांग्रेसी नेता के समर्थन में देह त्याग दीजिये । आपको शहीद का दर्जा और मुआवजा दोनो तुरंत मिलेगा । आपके पीछे आपके बाल बच्चे आपको दुआएं देंगे । अपने समर्थकों के लिये और वोट बैंक बढ़ाने के लिये कांग्रेस ऐसे कृत्य सहर्ष करती है । जैसे कि अभी हाल ही में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने आतंकवादियों के परिवारों को पेंशन दी और माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक घोषित अपराधी के परिवार को मुआवजे में दस लाख रूपये देने का आर्डर किया । विस्तार से जानने के लिये सुरेश चिपलनूकर के ब्लॉग पर विजिट करें ।
अगली खबर नितांत शक्तिवर्धक है और इस खबर को डाबर च्यवनप्राश और असली शिलाजीत बनाने वाली कम्पनी दोनो ने एक साथ प्रायोजित किया है । राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत ने रविवार को अहमदाबाद में कहा कि संघ के पास किसी भी राजनीतिक दल से अधिक ताकत है । उनके इस कथन पर किसी और राजनीतिक पार्टी को एतराज हो सकता है पर भाजपा को नहीं । रोहतक से भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह का बयान आया कि पार्टी में अगर किसी ने जिन्ना के महिमा मंडन की जुर्रत की तो उसकी खैर नहीं ।
और अंत में बिलियर्ड्स के बादशाह, भारत के लाल, पंकज अडवाणी को ढेरों बधाई जिसने कल वर्ल्ड प्रोफेशनल बिलियर्ड्स चैंपियनशिप जीत कर देश का नाम रोशन किया । 
=>जियो भारत के लाल । शाबाश बहादुर । ऐसे ही देश का नाम ऊंचा करते रहो ।
मजेदार खबरों का सिलसिला यही रोकता हूँ क्योंकि बिजलीरानी के जाने का समय हो गया है और मेरे कंप्यूटर का यूपीएस बिगड़ा पड़ा है । जय रामजी की ।
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देश प्रेम के दो शब्दों के सामंजस्य में वशीकरण मंत्र है, जादू का सम्मिश्रण हैं । यह वह कसौटी है जिस पर देश भक्तों की परख होती है । - मैथिलीशरण गुप्त
























श्री कृष्ण गोविन्दाय नमः स्वाहा .
वक्रतुंड महाकाय कोटि सूर्यसमप्रभ ।
निर्विध्नं कुरू मे देव सर्वकार्येशु सर्वदा ।।
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।
ऊं नमः कमलवासिन्यै स्वाहा . 

