सुदर्शन

(हास्य व्यंग्य पर आधारित ब्लॉग) अब सुदर्शन www.kmmishra.tk पर भी उपलब्ध है .

Archive for the ‘आर्थिक’ Category

मुशर्रफ फरार (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on अगस्त 6, 2009

Racing_car_2अबे ओ ! कमनसीब, नासपीटे । रूक जा । इत्ती तेज गाड़ी भगा कर कहां ले जा रहा है ? क्या पाकिस्तान का बार्डर फोड़ कर इरान में जा कर टक्कर मारेगा ।=>

=>परेशान मत हो अब्दुल्ला, वो अपने भूतपूर्व राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ होगें । जब से सुप्रीम कोर्ट ने उनके ऊपर पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाने और सुप्रीम कोर्ट के 60 जजों की बर्खास्तगी के मामले में नोटिस जारी किया है तब से वो ऐसे ही दुनिया भर में कार भगा रहे हैं । अब तो लगता है कि वो लंबे समय तक तड़ीपार रहेंगे ।
=>
इक रस्ता,
आहा, आहा ।
इक राही,
आहा, आहा ।
अब हूं चोर,
पहले था सिपाही,
आहा, आहा ।

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अभी तो मैं जवान हूं । (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on अगस्त 1, 2009


राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बूटा सिंह के सुपुत्र सरबजोत सिंह को कल सी.बी.आई ने ठेकेदार रामाराव पाटील से एक करोड़ रूपये घूस लेने के आरोप में हिरासत में ले लिया । इस पर श्री बूटा सिंह का कहना था कि यह सब उनके राजनीतिक कॅरियर को समाप्त करने का षडयंत्र है ।

ओये बूटे ! मेरे यार । तुसी ये बता कि आम हिन्दुस्तानी तो साठ साल की उम्र में रिटायर हो जाता है । तू 70-75 साल की उम्र में भी रिटायर नहीं होना चाहता । सच्ची सच्ची बता, तू क्या 110 साल की उम्र में रिटायर होगा । ये तेरी रब को याद करने की उम्र है कि घूस खाने की । कुछ तो शर्म कर । इस्तीफा दे-दे और जाकर स्वर्ण मंदिर में मत्था टेक अपना । वाहे गुरूजी तेरे को माफ करने की पूरी कोशिश करेंगे ।

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जहां हरे-हरे नोट बंटते हैं (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on जुलाई 24, 2009

=>क्या बतायें दिन में चार बार ये मशीन हैंग कर जाती है । मैं तो यहां आने से पहले हथौड़ी और प्लास घर से ले कर चलता हूं । जहां मशीन फंसी दो हथौड़ी नीचे कस कर जमा दी और नोट प्लास लगाकर खींच लिये ।

कल बचपन के लंगोटिया मित्र (अब इस कहावत को बदल कर कच्छा मित्र या अंडरवियर फै्रण्ड कर देना चाहिए, क्योंकि लंगोट अब सिर्फ हनुमानजी के मंदिर में ही दिखती है, लोग जॉकी या फै्रन्ची से काम चला लेते हैं और बरसात के उमस भरे दिनों में तो दाद-खाज- खुजली के डर से कछ महापुरूष तो वो भी नहीं पहनते ।) चन्द्रनिधि जी दिल्ली से इलाहाबाद पधारे । पुराने मित्र के दर्शन से मन मुदित, प्रफुल्लित हुआ । मेहमान भगवान समान होता है, इसलिए भगवान को भोग लगाने के लिए कुछ प्रसाद भी होना जरूरी है और प्रसाद के लिए धन का होना, इसलिए उनको लेकर बगल के एस.बी.आई. के ए.टी.एम. बूथ तक चला गया । उस ए.टी.एम. बूथ में मेला लगा हुआ था । तमाम लोग पैसा निकालने के लिए लाइन में बूथ के अन्दर खड़े थे, मानो वहां मुफ्त के नोट बंट रहे हों । हर पीछे वाला अपने से आगेवाले को मुफ्त तकनीकी सलाह दे रहा था । ये दृश्य इलाहाबादियों के लिये आमबात है लेकिन दिल्ली से आये चन्द्रनिधि जी से रहा नहीं गया और उन्होंने अपनी नेक सलाह फ्री ऑफ कॉस्ट ब्राडकॉस्ट कर दी कि एक बार में एक ही व्यक्ति को बूथ में इंटर करना चाहिए । बूथ के अंदर भीड़ लगाना नियमों के खिलाफ है । उनका ये सुभाषित सुनकर कुछ मुस्कुराये, कुछ खिसिआये, कुछ ने दूसरी तरफ मुंह कर लिया और सबसे आगे वाले को उनके पीछे वाले सज्जन तकनीकी मार्गदर्शन देते रहे ।

मैंने चन्द्रनिधि को समझाया । भाई ये दिल्ली नहीं है । दिलवाले देखने हों तो यहां इलाहाबाद में देखो और वह भी इस ए.टी.एम. बूथ में । तुम बाहर जाकर इलाहाबादी संस्कार बिसर गये हो । हम लोग हमेशा एक दूसरे की मदद को तत्तपर रहते हैं । अगर बाजू वाली भाभीजी आधी रात को भी आवाज़ दें, हम मदद के लिए तुरंत दीवार फांद जाते हैं । तुम कहीं जा रहे हो । रास्ता भटक गये । किसी राहगीर से या पास खड़े किसी आदमी से पूछ कर देखो । उसको रास्ता न भी मालूम होगा तब भी वो बंदा मदद करने को इतना तत्पर होगा कि रास्ता बताये बिना मानेगा नहीं और उसके बाद आप भटके हुये रॉकेट की तरह किसी बंगाल की खाड़ी की शोभा बढायेंगे । जब तक हम दिन में दो -चार लोगों की मदद नहीं कर देते पेट में मरोड़ उठती रहती है, रात ठीक से नींद नहीं आती और सुबह पेट भी ठीक से साफ नहीं होता । इलाहाबादियों के लिए सेवा परमो धर्म: है । आप रेलवे स्टेशन पर उतरते हैं । पहली बार इलाहाबाद आये हैं । जार्ज टाउन जाना है । एक भुवनमोहनी मुस्कान लिये रिक्शावाला आपका मन मोह लेता है । अब वो आधे शहर का चक्कर लगाते हुये अलोपीदेवी के मंदिर होते हुये, आन्नद भवन के सामने से गुजर कर उसका ऐतिहासिक महत्व बताते हुए तकरीबन एक घंटे बाद जार्ज टाउन पहुंचेगा । आप पहली बार इलाहाबाद आये हैं । ऐसा परोपकारी, यात्रीसेवी रिक्शावाला पाकर गदगद हुये जा रहे हैं । जाहिर है इस सेवा का यथोचित भुगतान तो करेंगे ही । तमाम तरह की सेवायें हैं । जो हम लोग समय समय पर करते रहते हैं । हाइकोर्ट आये मुवक्किलों की, संगम आय स्नानार्थियों की, एजी ऑफिस में पेंशन छुड़ाने आये रिटायर्ड व्यक्तियों की, इलाहाबाद की कोचिंगों में पढने आये विद्यार्थियों की । तमाम प्रकार की सेवायें हैं । अब सब आपको बताने लगें तो आप दांतों तले उंगलियां चबाने लगोगे । अब देखिये आपकी नरम-नरम उंगलियां बची रहें इस लिए मैं ज्यादा नहीं बता रहा हूं । ये भी तो एक प्रकार की सेवा हुयी न । निस्वार्थ सेवा । कुछ मांगा आपसे । कुछ नहीं । ये भी नहीं कहा की भले मानुस एक टिप्पणी ही कर देना । नहीं कहते हम लोग । ऐसे ही हैं । निस्वार्थ सेवी ।

चन्द्रनिधि भाई मेरी बात ठीक से समझ चुके थे । उनके पुराने संस्कार जागृत हो गये । उन्होंने सबसे आगे खड़े व्यक्ति को अपनी सेवाएं देनी शुरू कर दी । वह व्यक्ति ठीक से अपना ए.टी.एम. कार्ड इंटर नहीं कर पा रहा था । चन्द्रनिधि ने उसको पूरा प्रोसेस एक के बाद एक समझाया । यहां तक कि उस भलेमानुस को उसका पासवर्ड तक बताया । ”भाईसाहब आप पहले 0752 डाल रहे थे, फिर भूल कर आप 0754 डालने लगे । इसीलिए मशीन रिजेक्ट कर दे रही थी । अब देखिए, ले लिया न । कितना निकालना है ।” उस व्यक्ति ने जवाब दिया ”नहीं मुझे तो सिर्फ बैलेंस चेक करना था ।” चन्द्रनिधि जी चकित होकर उस व्यक्ति का श्रीमुख ताकने लगे । सिर्फ बैलेंस चेक करने के लिए ये श्रीमान जी पिछले दस मिनट से मशीन के साथ मगजमारी कर रहे थे । मित्रवर खिसिआये हुये मुझे ताक रहे थे और मैं उनको देख कर मुस्कुरा रहा था । वही इलाहाबादी मुस्कान ।

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मदहोश करने का पक्का सरकारी इंतज़ाम (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on जुलाई 17, 2009

=>हिक्क! मदहोशी का डबल तड़का । सुरा और सुंदरी दोनो साथ- साथ । आखिर प्रशासन ने हमारी भी सुध ले ही ली । ठीक सामने पुलिस की चेतक रात दिन पहरा देती रहती है ताकि कोई नासपीटा हमारे आनन्द में बाधा न पहुंचाये । शाबाश ! पहली बार अच्छा इंतजाम किया है सरकार ने हम बेवड़ों के लिए । हिक्क!
->ये है इलाहाबाद का प्रतिष्ठित गल्र्स इंटर कालेज ”सेण्ट एंथोनी गल्र्स इंटरमिडियट कालेज“ और उससे मात्र पचास मीटर की दूरी पर शासनादेश और माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेशों की खिल्ली उड़ाती अभी हाल ही में शुरू हुयी ये ठेका देशी शराब की दुकान । जल्दी ही मिड डे मील की जगह सरकारी देशी शराब के ठेके ले लेंगे और सरकार की शिक्षा नीति भी बदल कर “खूब पियो, खूब पढो” हो जायेगी ।

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रोज़गार के नये अवसर – 1 (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on जुलाई 15, 2009


वित्त मंत्री प्रणव दा ने इस बजट में एक करोड़ बीस लाख नये रोज़गार पैदा करने की बात कही है । कारपोरेट सेक्टर कहता है कि ये सारे रोज़गार नरेगा या आंगनबाड़ी जैसी योजनाओं के लिए है और ग्रामीण क्षेत्रों में मात्र 100 दिन के ही रोज़गार की गारंटी देते हैं । शहरी और शिक्षित युवकों के लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं है जबकि आज देश में 20 करोड़ रोज़गार की जरूरत है । तो दोस्तों वित्त मंत्री ने तो बजट संसद में रख कर अपने हाथ झाड़ लिये । अब आप जानो, आपका काम जाने । कांग्रेस तो युवाओं का वोट लेकर पांच साल के लिए तगड़ा रोज़गार पा गयी ।

युवा मित्रों, ये तो आप जानते ही हो कि अपना हाथ, जगन्नाथ । माफ कीजिएगा टाईम पास की बात नहीं कर रहा हूं बल्कि आपको स्वरोज़गार के नये क्षेत्र बता रहा हूं । हालांकि ये स्वरोज़गार के क्षेत्र नये नहीं हैं लेकिन इनमें नोट कूटने की अपार संभावनाएं हैं और साथ ही ये समाजसेवा से भी जुड़े हुए हैं । स्वरोज़गार के अपने मजे हैं । कोई ससुरा बॉस नहीं होता । जब मन किया काम किया जब मन किया तब बाल-बच्चों को (अगर ये कष्ट आपके ऊपर नहीं पड़ा है) तो बाजूवाली भाभीजी को, पड़ोसी की लड़की को, अपनी हसीन सेक्रेटरी को स्कूटर की पिछली सीट पर बैठाया और सिनेमा देखने या इडली-डोसा के बाद आइसक्रीम खाने निकल गये । जिंदगी का मजा तो इसी में है । जब मन किया काम किया जब मन किया तफरी कर डाली । न किसी के बाप से लेना, न किसी के बाप को देना यानी न लेना एक, न देना दो ।

तो दोस्तों मैंने इस बढ़ती हुयी बेरोज़गारी पर गंभीरता से विचार किया और इस कारण मुझे एक झपकी भी आयी (दिमाग पर लोड डालते ही थोड़ी देर के लिए दिमाग की एम.सी.वी ट्रिप कर जाती है) । काफी देर तक विचारने (झपकने) के बाद ये लाखों का आइडिया दिमाग में लपलपाया । हींग लगे न फिटकरी, रंग भी चोखा वाला आइडिया था । ढेर सारे नये स्वरोज़गार के क्षेत्र हैं जिनपर सरकार की नजर नहीं पड़ी है हालांकि सरकार बहुत कुछ इन्हीं तरीकों और सिद्वांतों पर चला करती हैं । इस श्रंखला के अन्तर्गत मैं आपको इन्हीं तरीकों की जानकारी दूंगा । इसमें बहुत ज्यादा इन्वेस्टमेन्ट की जरूरत नहीं है, हां, अपने स्किल डेवलप करना जरूरी है । आप इनको प्रोफेशन का दर्जा दे सकते हैं जैसे डाक्टर, वकील, सी.ए. वगैरह होते हैं । अगर आप गौर से देखेंगे तो हर प्रोफेशनल आदमी मूल रूप से इन्हीं सिध्दांतों की मदद लेता है । चलिए अब ज्यादा आपकी दिमाग का दही नहीं करूंगा और शुरूआत करते हैं इस श्रंखला की पहली कड़ी की ।

रोज़गार नं0 एक – हाईटेक तांत्रिक या ज्योतिषाचार्य बनिये ।

मित्रों, मुंह न बनाओ । कुन्टलों संभावनाएं हैं इस क्षेत्र में और बोरा भर कर नोट भी हैं । घर बैठे आमदनी । पैर छूने वालों की भीड़ । कैश और काइंड में इंकम । बलभर यश । अफसर और नेता चरणों में लोटन कबूतर । बाबा बन कर ठाठ से गद्दी पर विराजो । समाजसेवा की समाजसेवा और खूबसूरत औरतों से संपर्क बढ़ाने के मौके । मैं कहता हूं क्या कमी है इस धंधे में । पैसा ही पैसा और ग्लैमर के साथ नाम भी । कोई आई.ए.एस या किसी मल्टीनेशनल का सी.ई.ओ क्या खा कर तुम्हारी बराबरी करेगा । चलो अब धंधे की बारीकियां भी समझा दूं और ट्रेनिंग कैसे लेनी है वो भी बता दूं । ध्यान से सुनना । हास्य, व्यंग्य समझ कर हंसी में मत उड़ा देना । जीवन बदल जायेगा ।

पहले तो अख़बार पढना सीखो । काहे कि ये सारे चऊचक धंधेबाज रोज अखबारों के वर्गीकृत पन्ने पर छपते हैं और इनकी कोई जांच भी नहीं होती । विज्ञापन इस तरह का होता है – विवाह में अड़चन, प्रेमविवाह, मोहनी वशीकरण, यंत्र हाथ पर रगड़िये प्रेमी-प्रेमिका भाग आयेंगे, धनवान बनें, व्यापार, विदेश यात्रा, नौकरी, लॉटरी, सौतन, गृहक्लेश, तलाक, अदालत, शिक्षा, संतान न होना, आदि एक यंत्र सौ काम । मिलिए पहाड़ वाले बाबा से । पुराने डॉट के पुल के बगल में, मसाले वाली गली, मिंया की सरांय, अलीगढ ।

इस तरह के विज्ञापन रोज अख़बार में छपते हैं । जाइये पहले वो विज्ञापन पढ़ कर आइये फिर धंधे की बात बताता हूं ।

जारी…………

=>पुत्र तुम्हारे हाथ में कालसर्प योग स्पष्टरूप से दिखाई पड़ रहा है । राहु-केतु ने तुम्हारा जीवन नर्क बना रखा है ।

=>हां महाराज, आप सही कहते हैं । मेरी पत्नी और मेरी सास ही मेरे लिए साक्षात राहु-केतु का अवतार हैं । इनसे मेरे प्राणों की रक्षा का कोई उपाय बतायें ।

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उत्तर भारत में सूखे की आशंका (व्यंग्य, कार्टून)

Posted by K M Mishra on जून 27, 2009


=>सखी, इस भीषण गर्मी में चार कोस दूर तालाब से मटकी में पानी भर कर लाते-लाते मेरे पैरों में छाले पड़ गये  । एक दिन धरती माता की तरह मेरी कमर भी सूख कर चटक जायेगी ।


=>ए खुदा, पिछले साल मेरे शौहर ने बाढ राहत में खूब पैसा कमाया था, इस साल सूखा राहत में इनको फिट करवा दो । पुरानी स्कोडा कार बदल कर इस साल नई मर्सडीज़ बेंज लेने का इरादा है ।

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