सुदर्शन

(हास्य व्यंग्य पर आधारित ब्लॉग) अब सुदर्शन www.kmmishra.tk पर भी उपलब्ध है .

Archive for the ‘आतंकवाद’ Category

मुशर्रफ फरार (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on अगस्त 6, 2009

Racing_car_2अबे ओ ! कमनसीब, नासपीटे । रूक जा । इत्ती तेज गाड़ी भगा कर कहां ले जा रहा है ? क्या पाकिस्तान का बार्डर फोड़ कर इरान में जा कर टक्कर मारेगा ।=>

=>परेशान मत हो अब्दुल्ला, वो अपने भूतपूर्व राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ होगें । जब से सुप्रीम कोर्ट ने उनके ऊपर पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाने और सुप्रीम कोर्ट के 60 जजों की बर्खास्तगी के मामले में नोटिस जारी किया है तब से वो ऐसे ही दुनिया भर में कार भगा रहे हैं । अब तो लगता है कि वो लंबे समय तक तड़ीपार रहेंगे ।
=>
इक रस्ता,
आहा, आहा ।
इक राही,
आहा, आहा ।
अब हूं चोर,
पहले था सिपाही,
आहा, आहा ।

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आ गया शत्रुहंता आई.एन.एस. अरिहंत (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on जुलाई 28, 2009

Zardari=>सर जी! एक मशवरा है । या तो पूरी पाक नेवी को सिन्धु या दूसरी नदियों में ट्रान्सफर कर दीजिये या फिर मेरा तबादला कराची से रावलपिंडी कर दीजिये क्योंकि भारतीय नौसेना में आई.एन.एस. अरिहंत और चक्र के आ जाने के बाद अब अपनी नेवी का तो खुदा ही मालिक है ।


मित्रों, 26 जुलाई को आई.एन.एस. अरिहंत का विशाखापत्तनम में जलावतरण हुआ और 27 जुलाई को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के चिंचियाने की आवाज़ सुनाई दी । ”अच्छा नईं कर्र रएं हैं ये आप लोग । कमज़ोर को मारने के लिए इत्ते वड्डे-वड्डे हैवी हथियारां बना रएं हैं । ठीक बात नईं हैं ये । पहले अवाक्स रडार और अब न्यूक्लियर सबमरीन । हम लोग तो पहले से ही तालिबान और अल-कायदा की दी हुई मौत मर रहे हैं । आप लोग क्यूं फालतू में परेशान हो रएं हैं । अब क्या छोरे के टेंटुए पर लात ही धर देंगे । हैं । अपनी तो चङ्ढी-बनयान तक सब गिरवी रखी है वाशिंगटन में । इत्ता पैसा कआं से लायेंगे अम लोग । बोलो ।”

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का कहना है ”भारत का यह कदम समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा में खतरा पैदा कर सकता है ।” भले मानुस लगता है तुमने हमारे शाकाहारी प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह का बयान नहीं पढ़ा है । मनमोहनसिंह जी का कहना है ”हम कोई आक्रामक कदम नहीं उठा रहे है और नहीं किसी को धमकाने के लिये यह कर रहे हैं ।” इसीलिये हमने न्यूक्लियर पनडुब्बी का नाम भी बहुत ही सात्विक और अहिंसा की पूजा करने वाले जैन तीर्थंकरों के नाम पर रखा है । हालांकि कुछ जैन मुनियों को इस नाम पर आपत्ति है लेकिन हम ठहरे अहिंसा के पुजारी । शांति के समय बापू को याद करते हैं और युध्द के समय उनकी लाठी उधार ले लेते हैं । डरने की कोई बात नहीं है । आप हमारे घटिया पड़ोसी हैं और इंशाल्लाह आपके घटियापन में कभी कोई कमी भी न आयेगी लेकिन ये न्यूक्लियर पनडुब्बी आपकी भी रक्षा करेगी । बूझिये कैसे ? अरे भइया ! हर बार लड़ाई तो तुम ही शुरू करते हो और बाद में पिट पिटा कर घर पोलो ले लेते हो । अब इन बेजोड़ हथियारों के खौफ से तुम युध्द शुरू ही नहीं करोगे । इसमे फायदा किसका है । ज़ाहिर है तुम्हारा ही है । लात खाने से बचे रहोगे । अब देखो न, तुम्हारी इज्ज़त आबरू सुरक्षित रहे इसके लिए हमें क्या क्या करम नहीं करने पड़ते ।

पिरायेगी तो है ही पड़ोसी की मित्रों क्योंकि आई.एन.एस. अरिहंत है काला ब्रह्मास्त्र । एक लगभग अदृश्य पनडुब्बी । जिसे ट्रेस कर पाना पाकिस्तान और चीन के लिए निहायत मुश्किल काम है । 110 मीटर लंबी, काले रबर से कोटिंग की हुयी, 6000 टन की ये पहली स्वेदेशी न्यूक्लियर सबमरीन भारत के लिए पोखरन परमाणु परीक्षण से भी बड़ी उपलब्धि है । आज पूरे विश्व में चार दर्जन से भी ज्यादा देश परमाणु ऊर्जा का दोहन कर रहे हैं । बीसियों देशों के पास परमाणु हथियार हैं । उत्तरी कोरिया और इरान बमबाज बनने के लिए धरती आसमान एक किये हुये हैं । लेकिन न्यूक्लियर सबमरीन सबके बस की बात नहीं है । हम दुनिया के ऐसे छठे देश हैं जिसके पास न्यूक्लियर सबमरीन है । ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है ।

आई.एन.एस. अरिहंत में भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर द्वारा बनाया गया स्वेदेशी ‘प्रेशराइज्ड़ वाटर रियेक्टर’ लगाया गया है जो कि पनडुब्बी को 82 मेगावॉट बिजली की ताकत देता है । एक बार ईंधन लेने के बाद आई.एन.एस. अरिहंत को दसियों-बीसियों साल तक दुबारा ईंधन की जरूरत नहीं पड़ेगी । दूसरी आम डीज़ल पनडुब्बियों की तरह इसको हर रोज सतह पर आकर कार्बन-डाई-आक्साइड निकालने की जरूरत भी नहीं पड़ती है जिसकी वजह से इसको ट्रेस कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है । अबाध ऊर्जा मिलने के कारण इसकी गति भी 25 से 30 नॉटिकल माइल की होगी । फिलहाल इसमें अत्याधुनिक तारपीडो और स्वदेश निर्मित पानी के अंदर से ही 700 कि.मी. तक मार करने वाली एस.एल.बी.एम. के-15 सागरिका मिसाइल लगेगी और बाद में इसमें 500 से 800 कि.मी. तक मार करने वाली क्रूज मिसाइल भी लगा सकते हैं । भारत 3500 कि.मी. तक मार करने वाली एस.एल.बी.एम. के-5 के विकास में लगा हुआ है जो कि आई.एन.एस. अरिहंत और इसके जैसी दूसरी स्वदेशी न्यूक्यिर सबमरीन में लगाई जायेंगी । केन्द्रीय मन्त्रीयमण्डल ने पांच और न्यूक्लियर सबमरीन तैयार करने की अनुमति दे दी है ।

और इसके साथ ही मित्रों इसी सितंबर-अक्टूबर में हमें रूस से आकुला-2 श्रेणी की ”के-152 नेरपा” न्यूक्लियर सबमरीन दस साल के लिये लीज़ पर मिलने जा रही है । 12000 टन वजनी इस न्यूक्लियर सबमरीन का भारतीय नाम है आई.एन.एस. चक्र । फिलहाल इस पर कौन कौन से हथियार लगाये जायेंगे इसके बारे में सरकार अभी कुछ नहीं कह रही है लेकिन उम्मीद यही है कि आई.एन.एस. चक्र आम तौर पर लगने वाली 2500 से 5000 कि.मी. तक मार करने वाली ब्लास्टिक मिसाइलों और 500 से 800 कि.मी. तक मार करने वाली क्रूज़ मिसाइलों से लैस होगी ।

हमारे लिये हिंद महासागर आर्थिक और रणनीतिक रूप से निहायत ही महत्वपूर्ण है । हिंद महासगर की एकमात्र सबसे बड़ी नौसेना भारतीय नौसेना है लेकिन पिछले कुछ सालों से चीन हिंद महासागर मे घुसपैठ करने की कोशिश कर रहा है । चीन हिंदमहासागर में हमें चुनौती देने की कोशिश कर रहा है । हिंदमहासागर में शांति बनाये रखने और अपनी सुरक्षा को पुख्ता बनाने के लिए 2016 तक हमें तीन एयरक्राफ्ट कैरियर और 6 से 10 न्यूक्लियर सबमरीन की जरूरत पड़ेगी । विध्वंसक पोत और डीज़ल चालित पनडुब्बियों की संख्या में भी वृध्दि की तत्काल जरूरत है । पाकिस्तान हमारे लिये कभी चुनौती नहीं रहा लेकिन आज हमारे सामने चुनौतियां क्षेत्रीय कम वैश्विक ज्यादा हैं और इनके लिये जल्दी ही कमर कसने की जरूरत है ।

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ज़रा आंख में भर लो पानी (विजय दिवस पर विशेष) (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on जुलाई 27, 2009

कारगिल युध्द . भाग -2

71 के बाद 99 (28 साल का अंतर) एक पूरी पीढ़ी के उग आने का समय । एक पूरी पीढ़ी पैदा होकर जवान हो गई, पाकिस्तान में भी, हिंदुस्तान में भी । युध्द पढ़ा था किताबों में, सुना था बुजुर्गों से, और देखा था टी.वी. पर युध्द आधारित कार्यक्रमों में । कारगिल: हमारी ताज़ी दोस्ती का प्रतीक (लाहौर यात्रा), 28 साल के लम्बे अन्तराल के बाद तूफान का प्रतीक, 50 साल से सुलगती राख में एक चिंगारी का प्रतीक । यह चिंगारी अचानक हवा पाकर शोला हुई, भभकी और हमारे 400 जवानों के खून से अपनी प्यास बुझा कर ठंडी हो गई । कारगिल नई पीढ़ी के लिये एक नया अनुभव था ।

इन दो महीनों में देश में राष्ट्रप्रेम का भीषण ज्वार आया । वीर सैनिकों को रक्तदान के लिये इतनी भीड़ जुटी की इतना खून कैसे, कहाँ सुरक्षित रखें एक प्रश्न था । ज़ज्बा सिर्फ एक कि हमारा लहू उस लहू से मिल जाये जो हिमालय पर काम आया । अरबों रूपये शहीदों के परिवारों के लिये दान दे दिये गये । सहारा परिवार ने 300 सैनिकों के परिवार की जिम्मेदारी अपने ऊपर ली । सारा देश आज सैनिकों के साथ है ।

सरहद के उस पार से गलतफहमियों और सरकारी अफवाहों ने कारगिल पचड़ा शुरू किया । पाकिस्तान और उसकी सेना को यह गलतफहमी है कि किराये के बम और मिसाइलों से वह भारत को फतह कर लेगा । 28 साल में वहां के बूढ़ों की याद्दाश्त कमज़ोर पड़ गई और उनके बच्चों ने गलतफहमियां पाल ली कि अब तो इंडिया गया समझो । नादान पड़ोसी । हिंदुस्तान कोई अफ्गानिस्तान नहीं है । एक अरब में से 1 प्रतिशत भारतीय भी खड़ा हो गया तो पाकिस्तान नक्शे में ढ़ूढ़ते रह जाओगे । ”अरे यहीं कहीं तो था इंडिया और इरान के बीच में । कहाँ गया ?”

उनको पड़ी है कि एक युध्द में कश्मीर झपट लेंगे । हम राह देख रहे हैं कि बंग्लादेश हो गया, अब पाकिस्तान भी निपटा दें । कारगिल को युध्द नहीं कहा जा सकता है । लगभग 100 किमी. के अखाड़े में डंड बैठक हो गई । पाकिस्तान को अक्ल आ गई कि अपनी औकात पंजा लड़ाने की भी नहीं है अगर कुश्ती हुयी तो एक भी हड्डी साबूत नहीं बचेगी । अमेरिका से चंदा मांगकर जैसे तैसे रोटी चलती है । इंडिया ने ठोंक दिया तो अस्पताल का बिल भी वल्ड बैंक खाते में जोड़ लेगा । ( या फिर कफ़न का खर्चा ) ।

नवाज शरीफ चीन गये । चीन ने कहा ‘अच्छे बच्चे लड़ाई नहीं करते । चलो इंडिया को सॉरी बोलो और कारगिल खाली करो ।’ नवाज नहीं माने । अमेरिका गये । क्लिंटन ने समझाया ‘शांति से रहना सीखो, नहीं तो पॉकिटमनी भी बंद कर दूँगा ।’ बिचारे शरीफ सोचे इंग्लैंड से भी बात कर ली जाये । उसने भी कह दिया ‘ 50 साल के बच्चे अब तो बड़े बन जाओ । ये लड़ना झगड़ना कब छोड़ोगे ? बच्चों कि लड़ाई में बड़े नहीं पड़ते । चलो कारगिल वापस करो ।’ शरीफ शराफत से पाकिस्तान लौट आये । डर भी लग रहा था कि कहीं सरहद पर हिंदुस्तान की तरफ मुँह की हुई तोपें अगर इस्लामाबाद की ओर मुड़ गईं तो उनकी खटिया खड़ी और तख्ता पलट जायेगा ।

शरीफ ने घुसपैठियों से अपील की ”मुज़ाहिद भाइयों, अब वापस आ जाओ । इंडिया डर गया है । इस्लाम कहता है कि डरे हुये को सताना गलत है । वापस आ जाओ (अगर जिंदा हो तो, लाशें हमारे किसी काम की नहीं) क्योंकि हमारा मकसद पूरा हो गया है (लात खाये बहुत साल हो गये थे, बल भर खा लिया है ) वापस आ जाओ क्योंकि अब तुमको देने के लिये राशन और गोलियां खत्म हो गई हैं और हमारी जेब भी खाली हो गई है । हमको मालूम है कि तुम बहुत बहादुरी से लड़ रहे हो पर किसी गरीब मजलूम पर जुल्म नहीं ढ़ाना चाहिये । इंडिया को सबक मिल गया है । कश्मीर मुद्दे का अन्तर्राष्ट्रीय करण हो गया है (कोई भी देश पाकिस्तान के साथ नहीं है । कश्मीर इंडिया के ही पास रहेगा ) वापस चले आओ नहीं तो इंडियन आर्मी पाकिस्तान में घुस आयेगी और हम लोगों को इरान, अफ्गानिस्तान में शरणार्थी बन कर रहना पड़ेगा

कारगिल से घुसपैठियों ने जवाब दिया । ”कमीने शरीफ, तुमने हमको धोखा दिया । हमारे पास खाने को कुछ नहीं है । गोली और गोले खा कर हमारे काफी साथी मारे गये । तुमने कहा था भारतीय कमजोर होते हैं पर वो तो हमारे बाप निकले । एक बार यहाँ से निकल भागें तो तुमको भी देख लेंगें ।” तभी वहाँ एक गोला गिरा ”बड़ाम” । ”अब क्या देखेंगे, खेल ही खत्म हो गया । आह…… मरा….रे.. ।”

युध्द खत्म हो चुका है और अब उनकी बारी है जो युध्द कभी नहीं लड़ सकते पर काठ की तलवारें लहराने में माहिर हैं । ये हैं हमारे आदरणीय नेतागण और बुध्दजीवी का लेबल चिपकाये हुये तमाम बुध्दिजीवी । कारगिल को चुनावी मुद्दा नहीं बनाया जायेगा पर हम देखेंगे कि कारगिल का बारूद तेरहवीं लोकसभा में काम आयेगा । पिछली 18 जुलाई रविवार को रात्रि मे एक कार्यक्रम मुंबई के फिल्मी कलाकारों ने शहीद जवानों को समर्पित किया ‘ऐ वतन तेरे लिये’ । शहीदों की आत्माओं की शांति के लिये तथा उनके दु:खी परिवारों को ढ़ाँढ़स बंधाने के लिये ‘प्यार तो होना ही था’, ‘लवेरिया हुआ’, ‘पहला नशा पहला खुमार’ आदि गाने सुनाये जा रहे थे । बीच बीच में बालीवुड के कलाकार आकर श्रध्दांजलियां दे रहे थे ।

राष्ट्रीय पुरूस्कार से सम्मानित जावेद अख्तर और उनकी पत्नी शबाना आज़मी ने अपने विशाल ज्ञान का परिचय दिया और जोश में भारत की आबादी को ‘साढ़े नौ सौ करोड़’ बताया । कारगिल के शहीद आपका आरकेस्ट्रा सुनने के लिये शहीद नहीं हुये हैं । माना शहादत पर आंसू नहीं बहाये जाते पर मुजरा भी नहीं किया जाता है ।
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(ये व्यंग्य अगस्त 1999 में इलाहाबाद से प्रकाशित हुआ था ।)

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कारगिल युद्ध भाग : 1 (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on जुलाई 25, 2009

मित्रों यह व्यंग्य मैंने आज से दस साल पहले तब लिखा था जब भारत- पाकिस्तान के बीच कारगिल युद्ध चल रहा था । जुलाई में कारगिल युद्ध को दस साल पूरे हो गये हैं । ये व्यंग्य समर्पित है कारगिल के शहीदों को । उम्मीद है आपको पसंद आयेगा ।

मई के महीने में दो सिरीज एक साथ शुरू हुयी । एक क्रिकेट वर्ल्डकप सीरिज दूसरी कारगिल सिरीज । इंडियन क्रिकेट टीम को शुभकामनायें मल्टीनेशनल मिलीं । होंडा वालों ने बलायें लीं, इधर अफ्रीका ने बोहनी बुरी कर दी । एल. जी. वालों की दुआयें लगी जिम्बाब्वे ने धो दिया । विल्स का आशीर्वाद मिला आस्ट्रेलिया ने पटरा कर दिया । वर्ल्डकप जीतने के लिये पेप्सी नहीं लस्सी पीनी चाहिये । आ हा ।

इधर कारगिल सिरीज में कोई मल्टीनेशनल स्पॉन्सर नहीं था । भारतीय सेना ने पाकिस्तानियों की मिट्टी पलीद कर दी । ऐसे मामलों में सिर्फ हम भारतीयों की दुआयें ही बहुत हैं । स्वदेशी का जमाना है । नवाज भाई अपने घर का कचड़ा इधर मत डाला करो । कश्मीर कोई हज करने की जगह नहीं है कि भई गंगा नहाने गये थे वहीं मर गये तो स्वर्ग पक्का । तुम्हारे यहाँ जनसंख्या ज्यादा हो गई हो तो सल्फास पर सब्सिडी दे दो । उँही खाये खाये मरा करें । फालतू में हमारी गोलियों का क्यों नुकसान करवाते हो । अटल जी की बस यात्रा के बस में नहीं है कि तुमको समझा सकें । तुमको समझाने के लिये तो सुखोई, मिराज ले कर आना पड़ेगा । लातों के भूत बातों से नहीं मानते हैं ।

इमरान खान भी बुध्दिमानी की बात कर लेते हैं । बबुआ कहत रहा कश्मीर समस्या सरहद पर नहीं पिच पर सुलझानी चाहिये । मैनचेस्टर में भारतीय टीम ने अकरम पहलवान का नाड़ा ढ़ीला कर दिया । इमरान म्याँ अब कश्मीर कश्मीर मति चिल्लइयो ।

हमारे अमन पसंद पड़ोसी पाकिस्तानियों का इतिहास कुछ कमजोर है । गरीब देश है, वहाँ कि कौम पढ़-लिख नहीं पाती है । कह रहे थे नियंत्रण रेखा ठीक से निर्धारित नहीं है । जो कि शिमला समझौते में बकायदा बतायी गयी है । कोई बात नहीं । 71 के बाद से कोई क्लास नहीं ली है न । अब की जायेंगे तो नियंत्रण रेखा ईरान के बार्डर से नाप आयेंगे । अटल जी गलत कहते हैं कि पड़ोसी बदले नहीं जाते हैं । हमारा नया पड़ोसी ईरान होगा और इस्लामाबाद पर तिरंगा लहरायेगा ।

हमारे जासूसों ने पाकिस्तान के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ मुहम्म्द अजीज और सेनाध्यक्ष मुशर्रफ के बीच टेलीफोन पर हुयी बातचीत टेप कर ली थी । उसके बाद हमारे जासूसों ने नवाज शरीफ और सरताज अजीज की भी टेलीफोन पर हुयी एक महत्वपूर्ण बातचीत को टेप कर लियाद्व पर उस बातचीत को गुप्त रखा गया । वह महत्वपूर्ण बातचीत यहाँ पर दी जा रही है ।

शरीफ : हेलो, सरताज अजीज । मैं शरीफ बोल रहा हँ । पैकिंग हो गई ।
अजीज : क्या शरीफ मियां, मैं ही मिला था भारत भेजने को । जब से सुना है दस्त शुरू हो गये हैं । आप तो मेरा मेडिकल सर्टिफिकेट ले लो । मैं कहीं नहीं जाऊंगा ।
शरीफ : क्या बकवास कर रहे हो । अमेरिका से चार बार फोन आ चुका है । अन्तर्राष्ट्रीय दबाव पड़ रहा है बातचीत के लिये । तुम्हारा नाम पक्का हो चुका है । तुम्ही जा रहे हो ।
अजीज : मैं नहीं जाऊंगा । नहीं जाऊंगा । मैं इस्तीफा देता हूँ । मेरे बड़े बड़े बच्चे हैं । मुझे कुछ हो गया तो वो बेचारे तो भूखों मर जायेंगे और क्या जरूरत थी मुझसे पहले वो छ: सैनिकों की लाशें भेजने की । अगर उन्होंने मेरे नाक कान उखाड़ लिये तो मैं सुनूंगा कैसे और सांस कैसे लूंगा ।
शरीफ : वो लाश मैने नहीं भिजवाईं थीं । वो तो कम्बख्त जनरल के बच्चे ने भेज दी । चला जा मेरे सर के ताज । चला जा यार, तेरे हाथ जोड़ रहा हँ । चला जा भाई वरना ये जनरलवा मुझ को ही ठेल देगा ।
अजीज : मैं किसी कीमत पर नहीं जाऊंगा ।
शरीफ : नहीं जाओगे तो तुमको भारत में पाकिस्तान का राजदूत बना दूंगा । अजीज : अच्छा धमकी देते हो तो चला जाता हँ पर सुबह जाऊंगा और शाम को वापस भाग आउंगा । रूकुंगा एक दिन भी नहीं ।
शरीफ : अरे यार तू जा तो, तेरे को रिटर्न टिकट फ्री दे रहा हँ ।
अजीज : जा तो रहा हँ पर बात क्या करूंगा ?
शरीफ : बात वात कुछ नहीं करनी है । तुम जाना और सुबह 2-3 घंटे गुसलखाने में ही लगा देना । बैठक में देरी से पहुँचना । फिर जब बातचीत शुरू हो तो मौसम की बात करना । जसवंत का हाल चाल पूछना । अगर वह घुसपैठ की बात करे तो कहना कश्मीर में आज कल मौसम बहुत सुहावना है इसलिये कुछ लोग बिना पासपोर्ट के घूमने चले गये होंगे । टूरिस्ट वगैरह हैं । घूम टहल कर वापस आ जायेंगे ।
अजीज : अगर वह नियंत्रण रेखा के बारे में पूछे तो क्या जवाब दूंगा ।
शरीफ : कह देना शिमला समझौते वाली फाइल कहीं खो गई है, जिसमें नियंत्रण रेखा की स्थिति बताई गई है । इसलिये हम अपनी टीमें भेज कर पुरानी नियंत्रण रेखा को ढूंढ़ रहे हैं ।
अजीज : वो जसवंत बोलेगा कि वो भी अपनी सेना लगा कर हमारी मदद कर रहा है । तब ? और उन छ: सैनिकों की लाश के बारे में पूछेगा तो क्या जवाब दूंगा ।
शरीफ : अमां तुम बोलते बहुत हो । अगर वो ये सब पूछने लगे तो तुम दस्त का बहाना कर के बैठक जल्दी खत्म कर देना ।

पाकिस्तान सरकार को दस्त आने शुरू हो गये होंगे क्योंकि उसके बॉस अमेरिका और चीन भी हाथ झटक कर खड़े हो गये हैं इधर हमारे जवान उसके सिर पर चढ़ते जा रहे हैं । पाकिस्तान तो उधार की रोटी खाता है । सीमा पर पटाखे छोड़ने के लिये शरीफ और पाकिस्तानी सेना को पूरा पाकिस्तान गिरवी रखना पड़ेगा । ऐसी दिवाली उनका दिवाला जल्दी ही निकाल देगी । भगवान न करे कि पाकिस्तान चौथा युध्द घोषित कर दे । पर अगर अबकि युध्द हुआ तो या तो बंग्लादेश की पूरी एक श्रंखला बना देंगे या फिर बावन साल पहले नेहरू द्वारा की हुयी गलती को ही सुधार देंगे । कम्बख्त पाकिस्तान भारत का अभिन्न अंग है । और अंत में सलाम है उन सब शहीदों की वीरता को जिनका आज प्रत्येक भारतीय ऋणी है ।

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले ।
वतन पर मरने वालों को यही आखिरी निशां होगा ।


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सत्यवादी जरदारी (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on जुलाई 10, 2009

=> ये नासपीटे दोजख के कीड़े, इनको हमने भारत को काटने के लिए पाला था, ये अब हमीं को काट खाने लगे हैं । अब इनका इलाज अमेरीकी गोलियां और बम हैं । मरो सालों ।

                

           

 पिछली रात पता नहीं कौन सी रूहानी मजबूरी पेश आई कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने हमेशा कि तरह एक बोतल स्काच की जगह दो बोतल स्काच खाली कर दी । शायद उनको मरहूम बेगम बेनज़ीर की याद हद से ज्यादा सता रही थी जबकि इस्लामाबाद के राष्ट्रपति भवन में उनको अमेरिकी राष्ट्रपति वाली सारी सुविधायें मुहैया कराई गयी हैं । यानी कि वो जब चाहे बिल क्लिटंन की तरह सिगार भी पी सकते हैं और पिला भी सकते हैं और पाक सेना भी यही चाहती है कि राष्ट्रपति जरदारी सारी सुविधाओं को भोगें और उसी में मशगूल भी रहें लेकिन बेकायदे आजम जिन्ना साहब के उसूलों के खिलाफ हरगिज़ न जायें । बेकायदे आजम जिन्ना साहब ने ख्वाब देखा था एक इस्लामिक राष्ट्र का जहां फिजाओं में सिर्फ इस्लाम ही इस्लाम तारी हो यानी की सड़कों पर लाशें, एक दूसरे का खून बहाते शिया और सुन्नी, एक अदद मानवाधिकार के लिए रिरियाते भूखे-नंगे बच्चे और औरतें, अपने ही देशवासियों से जूझती पाक सेना ……. और पता नहीं क्या, क्या ।

 जरदारी साहब सवेरे उठे तो उनको रात ख्वाब में चीखती, चिल्लाती मरहूम बेगम बेनजीर की याद आयी । बेनजीर चीख चीख कर उनको आदेश दे रही थीं कि मेरा हत्यारों को कब सजा दोगे । जरदारी साहब बेनजीर की चीख से अब भी उतना ही डरते हैं जितना कि पहले डरा करते थे । सवेरे उठे तो सिर भारी भारी हो रहा था । किसी तरह उठ कर गुसलखाने में जाकर फारिग़ हुए । सवेरे की नमाज़ अदा की और सिर झटकते हुऐ, आहिस्ता आहिस्ता चल कर अपने दीवान-खाने में पहुंचे और सोफे पर ढ़ेर हो गये ।

 तभी पता नहीं किस कोने से एक पत्रकार नाम का प्राणी निकल कर उनके सामने आ गया । जरदारी साहब ने आंखे मिचमिचा कर उसको देखने की कोशिश की । हाथ में कागज और कलम देखी तो समझ गये कि ये कम्बख्त अखबारनवीस की कौम से है । सवेरा हुआ नहीं कि मुंह उठाये चले आये । पूछा, क्या चाहते हो ।

 घिसे हुए पत्रकार ने देश के अंदरूनी हालात पर सवाल दाग दिया ।

 रात की स्काच अभी तक सिर पर दुगुन में तीन ताल बजा रही थी, ऊपर में मरहूम बेगम बेनजीर की भटकती आत्मा की चीखें । जरदारी साहब का ऊपरी माला कुछ देर के लिए सिफर हो गया । उस वक्त तक कामचोर सलाहकार भी सो कर नहीं उठे थे जो रात में हमप्याला बने आगे पीछे घूम रहे थे । राष्ट्रपति को कोई कूटनीतिक जवाब नहीं सूझा और सचाई ज़बान पर आ गयी । ये सब साले आतंकी, हमारे ही पैदा किये हुए हैं । इन सांपों को कल तक हमने इस लिए दूध पिलाया था कि ये जा कर भारत को डसेंगे । दुनिया भर में इस्लाम का नारा बुलंद करेंगे । ये दोजख के कीड़े, हरामी हमीं को काटने लगे । हमारी फौज फिनिट का डिब्बा लेकर इनको साफ करने में लगी है । कीड़े पड़ेंगे, कीड़े इन नासपीटों को, जिन्होंने मेरी बेगम को मुझसे जुदा कर दिया । दिल का दर्द ज़बान पर तो आया ही आया ही आंखों से भी छलकने लगा ।

 राष्ट्रपति की आंखे नम देख कर वो अखबारनवीस वहां से पोलो ले लिया । लेकिन देरी से कमरे में घुसने वाले राष्ट्रपति के सलाहकार ने जब राष्ट्रपति के मुंह से ये सचाई भरा बयान सुना तो सिर पीट लिया और सोचने लगा कि अब जनरल को इसका क्या मतलब समझायेंगे, क्योंकि कल तक तो भारत से भी कूटनीतिक दबाव पड़ना शुरू हो जायेगा ।

 

 

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अमेरिकी खैरात के दम पर युद्ध की तैयारी । (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on जून 9, 2009

=>ये लो, खैरात ।  हमारी आदत है कि पहले अपनी कुटिल नीतियों से किसी देश को भिखारी बना देते हैं, फिर उसे कपड़े, लत्तों, खाने-पीने, दवाई-दारू और छत के लिए भीख देते रहते हैं, ताकि वह कभी अपने पैरों पर दुबारा न खड़ा हो सके और हमेशा हमारे दरवाजे का वफादार कुत्ता बना रहे ।

=>शुक्रिया, शुक्रिया । बड़ी मेहरबानी आपकी । परवरदिगार आपके खज़ाने भरपूर रखे ।

=>जनरल । ये लो डालर । जाकर इन से आला दर्जे़ के टैंक, मिसाइल और लड़ाकू जहाज खरीदो । हमने बहुत पहले कसम खाई थी कि भले ही हमें घास की रोटियां खानी पड़े लेकिन हम एक हजार साल तक भारत से लड़ते रहेंगे । गरीब और भुखमरे पाकिस्तानियों को कपड़े, दवाईयों और छत की कतई जरूरत नहीं हैं । अगर इनको ये सब चीजें मुहैया करा दीं तो कम्बख्तों को इनकी आदत पड़ जायेगी । पहले कश्मीर बाद में कुछ और ।


(हाल ही में प्रकाशित हुई पैंटागन की एक रिपोर्ट के अनुसार बुश सरकार द्वारा पाकिस्तान को दी गई असैन्य सहायता को पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने में लगाया था । हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब जानते बूझते हुए भी कुछ दिन पहले ओबामा सरकार ने पाकिस्तान की असैन्य सहायता संसद में प्रस्ताव पारित करके तीन गुनी कर दी ।)

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