ये आग कब बुझेगी ? (व्यंग्य/कार्टून)
Posted by K M Mishra on October 31, 2009
पिछले 36 घंटे से जयपुर के सीतापुर इलाके में इंडियन आयल के डिपो में अग्निदेव ने अपनी क्रोधाग्नि प्रज्जवलित कर रखी है । भारत सरकार एक पंथनिरपेक्ष सरकार है इसलिये वह किसी धर्म-कर्म के मामले में हाथ नहीं डालती । नीति के विरूध्द होता है । इसलिये हमारे सुयोग्य केन्द्रीय मंत्री श्री मुरली देवड़ा ने अपने दोनो हाथ खड़े कर दिये हैं । उनका कहना है कि किसी भी प्रकार की कोशिश बेकार है इसलिये हम अग्निदेव का क्रोध शांत होने का इंतजार करेंगे । आग सब कुछ जला कर खुद-ब-खुद खत्म हो जायेगी । वही बात हुयी कि गाड़ी में ब्रेक की क्या जरूरत है, टकरा कर अपने आप रूक जायेगी । तब तक क्या करेेंगे ? दिल्ली में बैठ कर टी.वी. पर अलाव तापेंगे । ग्यारह टैंकर फट चुके हैं । बारहवें के भी फटने का मजा लेना है । दीपावली के बाद 1000 करोड़ का दिवाला निकल रहा है ।
मित्रों, ज्वलनशील पदार्थ रखने के लिये सरकार से लाइसेंस लेना जरूरी होता है । ज्वलनशील पदार्थ रखने के लिये तमाम सुरक्षा के मानकों को पूरा करना होता है । जब सरकारी कम्पनियां ही मानकों को पूरा करने में लापरवाही बरत रही हैं तब दूसरों से तो उम्मीद करना ही बेकार है । जयपुर की घटना के बाद तेल मंत्रालय कह रहा है कि हमने कभी इतनी बड़ी आग के बारे में सोचा ही नहीं था । भइया जब बुझाने का बूता नहीं है तब इत्ता मसाला एक जगह इकट्ठा ही क्यों करते हो । जन, धन और पर्यावरण का टेंटुआ दबाने के लिये । सरकार भले न सोचे मगर ऐसे डिपो, रिफाइनरियों, रिफलिंग स्टेशनों के बगल में मकान लेने वाले सबसे पहले यही सोचते हैं कि अगर किसी दिन ससुरा फटा तब कितना बड़ा इलाका स्वाहा होगा? जनता को सरकार की औकात के बारे में कफी कुछ पता होता है ।
हमेशा की तरह जांच के लिये एक कमेटी का गठन कर दिया गया है । पता नहीं ये कोई दुर्घटना है या पड़ोसी की वह करतूत जिसकी चेतावनी पिछले दो महीने से इज़रायल, अमेरिका सहित प्रधानमंत्री तक खुद दे चुके हैं । जो भी हो लेकिन इससे देश भर में फैले आयल डिपो की सुरक्षा पर शंका उठनी शुरू हो गयी है । बहुत से डिपो और रिफलिंग स्टेशनों की दूरी तो आबादी से अधिक दूर भी नहीं है । जयपुर के अग्निकाण्ड ने आतंकियों को खूब नयनसुख प्रदान किया होगा । इस प्रकार के डिपो और रिफलिंग स्टेशन आतंकियों के लिये साफ्ट टार्गेट तो नहीं ? चेक कर लो भइया । कहीं अगली बार फिर से न कह दो कि हमारी सरकार पंथनिरपेक्ष सरकार है और देवी-देवताओं के काम में हम लोग टांग घुसाने की कोशिश नहीं करते हैं ।



=>प्रणाम अग्निदेव ।
देश प्रेम के दो शब्दों के सामंजस्य में वशीकरण मंत्र है, जादू का सम्मिश्रण हैं । यह वह कसौटी है जिस पर देश भक्तों की परख होती है । - मैथिलीशरण गुप्त























श्री कृष्ण गोविन्दाय नमः स्वाहा .
वक्रतुंड महाकाय कोटि सूर्यसमप्रभ ।
निर्विध्नं कुरू मे देव सर्वकार्येशु सर्वदा ।।
या देवी सर्वभूतेषु विद्यारूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ।
ऊं नमः कमलवासिन्यै स्वाहा .
Gyan Dutt Pandey said
दुर्घटना तो सम्भव है। पर ये डिपो आबादी से दूर होने चाहियें।
गिरिजेश राव said
भाई डिपो तो आबादी से दूर ही बनते हैं। उनका क्या करें जो डिपो बनने के बाद जान गँवाने उसके आस पास आ बसते हैं – चाय की दुकान, ढाबा कम चकलाघर, उठाईगीर, टैंकरों से तेल निकालने के संयंत्र, खोमचे वाले, ट्रांसपोर्टर दलाल … एक डिपो एक उन्नत सभ्यता का केन्द्र बन जाता है जिसमें सरकार की भूमिका इतनी ही होती है कि वह आँख बन्द रखती है। सभ्यता के विकास में टाँग अड़ा कर सरकार बदनाम नहीं होना चाहती। इसका एक लाभ यह होता है कि सभ्यता के विनाश का कारण भी कोई उसे नहीं बताता।
सभी अग्निदेव को दोष देंगे – चिनगारी या फुफकारी। ये कोई नहीं पूछेगा कि अग्निदेव के रौद्र रूप के आह्वान को साम गायन किन लोगों ने किए? कौन अध्वर्यु थे कौन होता ? ये न कहिएगा कि होता से कुछ नहीं होता।
गिरिजेश राव said
आग बुझ गई है। अपने ब्लॉग पर अब दूसरी आग लगाइए।
sunil pandey said
इंडियन आयल और महाराष्ट्र जैसे जगहों में लगी आग तो बुझ दी जाती है लेकिन आपके द्वारा लगाई गई कलम की यह आग तो कभी बुझती ही नहीं। प्रभू आपने जो परोरते हैं वह अदभुत है। इसका कोई सानी नहीं है। सीखने को बहुत कुछ मिलता है
Hitesh Mathpal said
साहब आग है- कहीं भी लग सकती है या लगाई जा सकती है. जब संसद और होटल ताज में तक आग लगा दी फिर बेचारे इंडियन आयल का क्या दोष, उसे तो और भी सरकारी बाबु चला रहे हैं. और अगर पडोसी इस कार्य में भागीदारी देने से वंचित रह गया हो तो क्या अपने भ्रष्टाचारी अफसर आतंकियों से कम हैं, क्या पता आयल सिक्यूरिटी फंड साहब नयी गाडी खरीद लायें हो. हिन्दुस्तान है गुरु ,यंहा सब चलता है..