सुदर्शन

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आशिकों ने नजरें गड़ा गड़ा कर देखा है । (व्यंग्य/कार्टून)

Posted by K M Mishra on October 9, 2009

पृथ्वी के एक मात्र उपग्रह श्रीमान चांद की अब खैर नहीं । भारत के चन्द्रयान – 1 ने मि0 चांद की सतह पर पानी होने की सम्भावना बतायी तो नासा ने तुरंत एक राकेट चांद की तरफ उछाल दिया जो मि0 चांद की खुपड़िया (ध्रुव) पर एक के एक दो धमाके करेगा और पता करेगा कि चांद पर वाकई में पानी है या एक बार फिर अमेरिका के करोड़ों डालर पर पानी फिर गया है । टक्कर की खबर सुन कर श्रीमान चांद पसीने पसीने हो रहे हैं उस रोगी के माफिक जिसे स्ट्रेचर पर लाद कर मेजर आपरेशन के लिये आपरेशन थियेटर की तरफ ले जाया जा रहा हो ।

श्रीमान चांद की हालत देख कर मुझे उस माशूका का (मेरी नहीं गालिब की) ख्याल आ रहा है जिसके चेहरे पर चेचक निकल आयी थी और उसने कुछ इस तरह अपनी मुसीबत का ठीकरा अपने आशिकों के सिर फोड़ा था ।

ये चेचक के दाग नहीं गालिब ।
आशिकों ने नजरें गड़ा गड़ा कर देखा है ।

श्रीमान चांद की चांद पर अगर इस टक्कर के बाद भी पानी नहीं निकला तो वह तो शर्म से पानी पानी हो जायेंगे । भला यह भी कोई बात होगी कि पानी से लबालब भरी पृथ्वी का रात दिन चक्कर लगाने वाले मि0 चांद के घर से एक बाल्टी पानी भी न बरामद हो । डूब मरने की बात होगी । लेकिन डूबने के लिये भी तो चुल्लू भर पानी की जरूरत होती है । देखते हैं कि आज की इस टक्कर से नासा को कितना पानी मिलता है । मिल जाये तो नासा की नाक भी बची रहे और श्रीमान चांद भी शर्म से पानी पानी होने से बच जायेंगे।

<=शरीफ औरतों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है । नासपीटा रात दिन पृथ्वी के चक्कर लगाता फिरता है । चांद सी शक्ल पर बड़ा गुमान है न तेरे को । इतनी मार मांरूगा कि शेरो-शायरी से चांद सा चेहरा डिलीट हो जायेगा ।

2 Responses to “आशिकों ने नजरें गड़ा गड़ा कर देखा है । (व्यंग्य/कार्टून)”

  1. गिरिजेश राव said

    बहुत हंसा हूँ। एकदम कमीमी पोस्ट – अरे भैया KMM से कमीमी बना दिया।

  2. ये चेचक के दाग नहीं गालिब ।
    आशिकों ने नजरें गड़ा गड़ा कर देखा है
    ye behtarien hai

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