सुदर्शन

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बोर्ड की परीक्षा (हास्य कविता)

Posted by K M Mishra on अक्टूबर 22, 2008


बोर्ड की परीक्षा में
हाई स्कूल की कक्षा में
एक भाई साहब
मेज पर चाकू गाड़े
परीक्षा देने में तल्लीन थे ।
निरीक्षक ने देखा
पहले खिसिआया
फिर झल्लाया
अंत में छात्र के समक्ष
करबद्ध हो कर
धीरे से बड़बड़ाया ।
हे आर्य ! हे करूश्रे”ठ
आप कॉपी रूपी रणक्षेत्र में
युद्ध खंजर से क्यूं लड़ रहे हैं ?
कॉपी पर जूझ रहा छात्र
गुरू को कुपित नेत्रों से घूर कर
ज़ोर से चिघांड़ा ।
हे विद्यापति ! हे गुरूवर !
भगवान ने आपको
दो आंॅखें मुत में दी,
ऊपर से आपने
लालटेन भी लगा ली ।
पर आप ये न समझ पाये
कि मैंने चाकू
प्र’नपत्र पर क्यूं गाड़ा है ।
हे विद्यानिधि !
आपके पंखे में रेग्युलेटर नहीं है ।
ये तीन पंखों की चिरईया
फुल स्पीड पर फड़फड़ा रही है ।
मेरा प्र’न पत्र
इसकी तीव्र वायु से
उड़ा जा रहा था ।
अतः
मैंने इसकी ला’ा पर
चाकू गाड़ कर
इसको उड़ने से वंचित कर दिया है ।
और कोई बात नहीं
ये तो मात्र पेपरवेट है ।

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5 Responses to “बोर्ड की परीक्षा (हास्य कविता)”

  1. Omkar Sharma said

    wah mian wah
    bahut badia

  2. Hashya Ras is need of our life.Send more…..poems.

  3. K M Mishra said

    @ Dr. S.K.A. Goliya G
    ऊपर की पट्टी में हास्य कविताएं के नाम से एक बटन लगा हुआ है । उस पेज में ढेरों हास्य कविताएं हैं । आभार ।

  4. Super-Duper website! I am loving it!! Will come back again. I am bookmarking your feeds also

  5. Purnima said

    wah wah kya baat hn……..

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